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350 मरीजों की साढ़े दस लाख में लैब से कराई जांच
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पानीपत। सिविल अस्पताल के पास तीन महीने से हेपेटाइटिस-बी और सी जांच करने की किट नहीं है। नतीजा स्वास्थ्य विभाग निजी लैब से जांच करा रहा है, जिसके लिए उसे भुगतान करना पड़ता है। सिविल अस्पताल में जांच के लिए 350 रोगी आए हैं। इनको कूपन देकर निजी लैब में जांच के लिए भेजा गया। विभाग ने इन रोगियों की जांच पर साढ़े दस लाख रुपये खर्च किए हैं। डॉक्टरों की ओर से कई बार जांच किट की डिमांड भी भेजी गई है, लेकिन अब तक किट नहीं मिली है।
गौरतलब है कि अप्रैल में हेपेटाइटिस-बी और सी किट मिलने के बाद जांच शुरू हुई थी। सरकार ने दोनों टेस्ट के लिए किट उपलब्ध कराई थी। दोनों किट से 200 रोगियों की जांच की गई। 29 सितंबर को हेपेटाइटिस-सी की किट खत्म हुई और हेपेटाइटिस-बी की किट अगस्त के पहले सप्ताह में ही समाप्त हो गई थी। तब से किट नहीं मिली और इस वजह से अतिरिक्त खर्च बढ़ गया। डॉक्टरों का कहना है कि अगर उन्हें जांच किट मिल जाए तो सरकार के लाखों रुपये बच सकते हैं, क्योंकि उनके पास जांच सभी मशीनें हैं।
3250 रोगी ले चुके हैं फायदा
सिविल अस्पताल में 2017 में हेपेटाइटिस-बी और सी का इलाज शुरू हुआ था। अब तक सिविल अस्पताल में 3250 रोगी लाभ ले चुके हैं। अस्पताल में काले पीलिया के सैंपलों की जांच इस साल अप्रैल में शुरू हुई थी। हेपेटाइटिस-बी और सी की एक-एक किट मिली थी। अब तीन बार सरकार को डिमांड भेजी जा चुकी है, लेकिन अभी तक कोई किट नहीं मिली है। फिलहाल सिविल अस्पताल में 340 लोगों का इलाज चल रहा है।
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ऐसे मिलता है कूपन से फ्री में इलाज
हेपेटाइटिस रोग की पुष्टि मरीज को एक कूपन जारी किया जाता है। इस कूपन के जरिए मरीज निजी लैब में निशुल्क वायरल लोड टेस्ट कराता है। कूपन से मरीज को निशुल्क दवा दी जाती है। कोर्स पूरा करने के तीन माह बाद दोबारा जांच की जाती है। रोग के लक्षण मिलते हैं तो दोबारा तीन माह तक इलाज कराना पड़ता है। अगर सरकार से किट मिल जाए तो जिले की कोरोना जांच लैब में काला पीलिया के मरीजों के सैंपल की जांच हो सकती है।
रोगियों को परेशानी नहीं हो रही, हम निजी लैब में करा रहे जांच
सिविल अस्पताल में जांच किट नहीं है। हम निजी अस्पताल में रोगियों की जांच करवा रहे हैं। सरकार इसके लिए भुगतान कर रही है। रोगियों को परेशानी नहीं हो रही है। किट के लिए डिमांड भेजी जा चुकी है। - डॉ. संजीव ग्रोवर, पीएमओ सिविल अस्पताल
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गौरतलब है कि अप्रैल में हेपेटाइटिस-बी और सी किट मिलने के बाद जांच शुरू हुई थी। सरकार ने दोनों टेस्ट के लिए किट उपलब्ध कराई थी। दोनों किट से 200 रोगियों की जांच की गई। 29 सितंबर को हेपेटाइटिस-सी की किट खत्म हुई और हेपेटाइटिस-बी की किट अगस्त के पहले सप्ताह में ही समाप्त हो गई थी। तब से किट नहीं मिली और इस वजह से अतिरिक्त खर्च बढ़ गया। डॉक्टरों का कहना है कि अगर उन्हें जांच किट मिल जाए तो सरकार के लाखों रुपये बच सकते हैं, क्योंकि उनके पास जांच सभी मशीनें हैं।
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3250 रोगी ले चुके हैं फायदा
सिविल अस्पताल में 2017 में हेपेटाइटिस-बी और सी का इलाज शुरू हुआ था। अब तक सिविल अस्पताल में 3250 रोगी लाभ ले चुके हैं। अस्पताल में काले पीलिया के सैंपलों की जांच इस साल अप्रैल में शुरू हुई थी। हेपेटाइटिस-बी और सी की एक-एक किट मिली थी। अब तीन बार सरकार को डिमांड भेजी जा चुकी है, लेकिन अभी तक कोई किट नहीं मिली है। फिलहाल सिविल अस्पताल में 340 लोगों का इलाज चल रहा है।
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ऐसे मिलता है कूपन से फ्री में इलाज
हेपेटाइटिस रोग की पुष्टि मरीज को एक कूपन जारी किया जाता है। इस कूपन के जरिए मरीज निजी लैब में निशुल्क वायरल लोड टेस्ट कराता है। कूपन से मरीज को निशुल्क दवा दी जाती है। कोर्स पूरा करने के तीन माह बाद दोबारा जांच की जाती है। रोग के लक्षण मिलते हैं तो दोबारा तीन माह तक इलाज कराना पड़ता है। अगर सरकार से किट मिल जाए तो जिले की कोरोना जांच लैब में काला पीलिया के मरीजों के सैंपल की जांच हो सकती है।
रोगियों को परेशानी नहीं हो रही, हम निजी लैब में करा रहे जांच
सिविल अस्पताल में जांच किट नहीं है। हम निजी अस्पताल में रोगियों की जांच करवा रहे हैं। सरकार इसके लिए भुगतान कर रही है। रोगियों को परेशानी नहीं हो रही है। किट के लिए डिमांड भेजी जा चुकी है। - डॉ. संजीव ग्रोवर, पीएमओ सिविल अस्पताल