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मन पर नियंत्रण के लिए ब्रह्मज्ञान जरूरी : साध्वी कालिंदी
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कथा करते साध्वी कालिन्दी भारती। संवाद
पानीपत। जब तक मानव मन को नियंत्रित करने की पद्धति नहीं प्रदान की जाती, तब तक समाज में भयानक कुरीतियां व व्याधियां जन्म लेती रहेंगी। इस मन को काबू में करने के लिए ब्रह्मज्ञान की नितांत आवश्यकता है।
ये विचार शनिवार को साध्वी कालिंदी भारती ने साप्ताहिक ज्ञान यज्ञ में कथा के दौरान कहे। दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान द्वारा सेक्टर-12 स्थित कटारिया लैंड में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा साप्ताहिक ज्ञान यज्ञ का शनिवार को छठा दिन रहा। कथावाचक साध्वी कालिंदी भारती ने बताया कि आर्थिक मंदी, बेरोजगारी, निरंतर तनाव व दबाव और पल-पल बढ़ती प्रतिस्पर्धा ने आज युवा पीढ़ी को नशे के भयावह साम्राज्य का पथिक बना दिया है।
उन्होंने कहा कि युवा स्वतंत्र देश का वासी होते हुए भी वह नशे की गिरफ्त में आकर पराधीनता का जीवन व्यतीत कर रहा है। जिस युवा के सहारे कोई देश स्वयं के लिए उज्ज्वल भविष्य की किरणें देखता है, आज वही युवा अपने देश के भविष्य पर प्रश्नचिह्न बनकर खड़ा हो गया है। असामाजिक तत्व तो पहले ही देश पर घात लगाकर बैठे हैं क्योंकि सारी दुनिया में से सबसे ज्यादा युवा भारत में ही हैं। नशीले पदार्थ घरों में सेंध लगाकर उनके हंसते-खेलते जीवन को लूट रहे हैं। जिससे पारिवारिक और नैतिक मूल्य स्वार्थपरायणता की चिता पर जलकर राख हो रहे हैं। देश के लगभग 73 मिलियन लोग नशे के आदी हो चुके हैं, जिनमें से 24 प्रतिशत की उम्र तो 18 साल से भी कम है। यह वह युवा शक्ति है जिसके आधार पर हम 2020 में विकसित राष्ट्र और 2045 तक विश्व की महाशक्ति बनने का स्वप्न देख रहे हैं, जो आज नशे की कंटीली राहों पर भटक रही है। साध्वी ने कहा कि समाज की प्रत्येक समस्या मन के स्तर पर जन्म लेती है और इसका समाधान भी मन के स्तर पर ही होना चाहिए। जब तक मानव मन को नियंत्रित करने की पद्धति नहीं प्रदान की जाती, तब तक समाज में भयानक कुरीतियां व व्याधियां जन्म लेती रहेंगी। इस मन को काबू में करने हेतु ब्रह्मज्ञान की नितांत आवश्यकता है, जिससे विवेक शक्ति जागृत होती है। फिर ही व्यक्ति मन में उठती दुर्भावनाओं व वासनाओं पर नियंत्रण रख सकता है। उपचार प्रक्रिया से गुजरने के बाद उनका शरीर नशामुक्त हो जाता है, पर नशे की लत दिमाग से नहीं निकल पाती। इन पद्धतियों के बारे में जितनी भी जानकारी उपलब्ध हुई हैं, वे अमोघ नहीं कही जा सकतीं। उनके विषय में व्यवस्थित व उचित खोज अभी शेष है। समाज में फैल रही नशे की समस्या पर रोक लगाने के लिए और जनमानस का सही मार्गदर्शन करने के लिए संस्थान के संस्थापक व संचालक आशुतोष महाराज ने बोध नामक नशा उन्मूलन कार्यक्रम की स्थापना की, जिसके अंतर्गत ब्रह्मज्ञान की अमोघ पद्धति के द्वारा हजारों की संख्या में लोग नशा मुक्त हो चुके हैं। कथा का समापन प्रभु की पावन आरती से हुआ और सभी को प्रसाद वितरित किया गया।
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ये विचार शनिवार को साध्वी कालिंदी भारती ने साप्ताहिक ज्ञान यज्ञ में कथा के दौरान कहे। दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान द्वारा सेक्टर-12 स्थित कटारिया लैंड में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा साप्ताहिक ज्ञान यज्ञ का शनिवार को छठा दिन रहा। कथावाचक साध्वी कालिंदी भारती ने बताया कि आर्थिक मंदी, बेरोजगारी, निरंतर तनाव व दबाव और पल-पल बढ़ती प्रतिस्पर्धा ने आज युवा पीढ़ी को नशे के भयावह साम्राज्य का पथिक बना दिया है।
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उन्होंने कहा कि युवा स्वतंत्र देश का वासी होते हुए भी वह नशे की गिरफ्त में आकर पराधीनता का जीवन व्यतीत कर रहा है। जिस युवा के सहारे कोई देश स्वयं के लिए उज्ज्वल भविष्य की किरणें देखता है, आज वही युवा अपने देश के भविष्य पर प्रश्नचिह्न बनकर खड़ा हो गया है। असामाजिक तत्व तो पहले ही देश पर घात लगाकर बैठे हैं क्योंकि सारी दुनिया में से सबसे ज्यादा युवा भारत में ही हैं। नशीले पदार्थ घरों में सेंध लगाकर उनके हंसते-खेलते जीवन को लूट रहे हैं। जिससे पारिवारिक और नैतिक मूल्य स्वार्थपरायणता की चिता पर जलकर राख हो रहे हैं। देश के लगभग 73 मिलियन लोग नशे के आदी हो चुके हैं, जिनमें से 24 प्रतिशत की उम्र तो 18 साल से भी कम है। यह वह युवा शक्ति है जिसके आधार पर हम 2020 में विकसित राष्ट्र और 2045 तक विश्व की महाशक्ति बनने का स्वप्न देख रहे हैं, जो आज नशे की कंटीली राहों पर भटक रही है। साध्वी ने कहा कि समाज की प्रत्येक समस्या मन के स्तर पर जन्म लेती है और इसका समाधान भी मन के स्तर पर ही होना चाहिए। जब तक मानव मन को नियंत्रित करने की पद्धति नहीं प्रदान की जाती, तब तक समाज में भयानक कुरीतियां व व्याधियां जन्म लेती रहेंगी। इस मन को काबू में करने हेतु ब्रह्मज्ञान की नितांत आवश्यकता है, जिससे विवेक शक्ति जागृत होती है। फिर ही व्यक्ति मन में उठती दुर्भावनाओं व वासनाओं पर नियंत्रण रख सकता है। उपचार प्रक्रिया से गुजरने के बाद उनका शरीर नशामुक्त हो जाता है, पर नशे की लत दिमाग से नहीं निकल पाती। इन पद्धतियों के बारे में जितनी भी जानकारी उपलब्ध हुई हैं, वे अमोघ नहीं कही जा सकतीं। उनके विषय में व्यवस्थित व उचित खोज अभी शेष है। समाज में फैल रही नशे की समस्या पर रोक लगाने के लिए और जनमानस का सही मार्गदर्शन करने के लिए संस्थान के संस्थापक व संचालक आशुतोष महाराज ने बोध नामक नशा उन्मूलन कार्यक्रम की स्थापना की, जिसके अंतर्गत ब्रह्मज्ञान की अमोघ पद्धति के द्वारा हजारों की संख्या में लोग नशा मुक्त हो चुके हैं। कथा का समापन प्रभु की पावन आरती से हुआ और सभी को प्रसाद वितरित किया गया।

कथा करते साध्वी कालिन्दी भारती। संवाद
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