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Panipat News: उद्योगपतियों ने टाली एक दिन की सांकेतिक हड़ताल, सुनवाई नहीं होने पर दिल्ली जाने की चेतावनी
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-नियमों का पालन करने के बाद भी क्लोजर नोटिस मिलने से उद्योगपतियों में रोष
-पानीपत डायर्स एसोसिएशन की जनरल बॉडी की बैठक शहर के एक होटल में हुई
एक सप्ताह में मांगें पूरी न होने पर बड़े आंदोलन की चेतावनी
माई सिटी रिपोर्टर
पानीपत। उद्यमियों ने प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की मनमानी और अनावश्यक कार्रवाई के खिलाफ एक दिन की सांकेतिक हड़ताल को फिलहाल टाल दिया है। पानीपत डायर्स एसोसिएशन के बैनर तले शुक्रवार को जीटी रोड स्थित एक होटल में आयोजित बैठक शहर के तमाम औद्योगिक इकाइयों के संचालकों ने प्रशासन और सरकार को एक सप्ताह का समय दिया है। इसमें समस्या का समाधान न होने पर दिल्ली जाने की चेतावनी दी है।
वार्षिक बैठक में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की कार्यप्रणाली पर रोष जताया गया और आगामी हड़ताल की तैयारी पर गहन मंथन हुआ। विभिन्न औद्योगिक इकाइयों के प्रतिनिधियों कहा कि बोर्ड के नियमों का पालन करने के बाद भी अधिकारियों का रवैया उद्योगों के प्रति बिल्कुल भी सहयोगात्मक नहीं है।
पानीपत डायर्स एसोसिएशन के पूर्व प्रधान भीम राणा ने कहा कि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा निर्धारित सभी शर्तों और नियमों को उनकी इकाई ने पूरी तरह से पूरा कर लिया है। इसके बावजूद विभाग के अधिकारी उनकी फाइलों को जानबूझकर लटकाए हुए हैं और बिना किसी ठोस कारण के क्लोजर (बंद करने) का नोटिस थमा रहे हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि तमाम नियमों का पालन करने के बावजूद उद्योगों को इस तरह प्रताड़ित किया जाएगा, तो उद्यमी अपना कारोबार कैसे चला पाएंगे।
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एसोसिएशन के प्रधान नितिन अरोड़ा ने कहा कि अधिकारियों के समक्ष बार-बार दस्तावेज और अनुपालन रिपोर्ट प्रस्तुत करने के बावजूद उनकी कोई सुनवाई नहीं हो रही है। उन्होंने दोटूक शब्दों में चेतावनी दी कि यदि स्थानीय स्तर पर उनकी समस्याओं का समाधान नहीं निकाला गया, तो वे राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली तक जाएंगे और केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के उच्च अधिकारियों से मिलकर अपनी पीड़ा रखेंगे।
बैठक में उपस्थित सभी उद्योगपतियों ने सर्वसम्मति से निर्णय लिया कि फिलहाल वे हड़ताल पर जाने का कदम टाल रहे हैं। प्रशासन को मामले को सुधारने का मौका दिया है। यदि आगामी एक सप्ताह के भीतर उनकी मांगों और समस्याओं पर विचार नहीं किया गया तो वे एक बड़े आंदोलन का रास्ता अपनाने को मजबूर होंगे। उद्योगपतियों ने जिला प्रशासन से जोरदार मांग की है कि प्रदूषण विभाग के अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए जाएं कि जो उद्योग कायदे-कानूनों के दायरे में चल रहे हैं, उन्हें बेवजह परेशान न किया जाए।
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-पानीपत डायर्स एसोसिएशन की जनरल बॉडी की बैठक शहर के एक होटल में हुई
एक सप्ताह में मांगें पूरी न होने पर बड़े आंदोलन की चेतावनी
माई सिटी रिपोर्टर
पानीपत। उद्यमियों ने प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की मनमानी और अनावश्यक कार्रवाई के खिलाफ एक दिन की सांकेतिक हड़ताल को फिलहाल टाल दिया है। पानीपत डायर्स एसोसिएशन के बैनर तले शुक्रवार को जीटी रोड स्थित एक होटल में आयोजित बैठक शहर के तमाम औद्योगिक इकाइयों के संचालकों ने प्रशासन और सरकार को एक सप्ताह का समय दिया है। इसमें समस्या का समाधान न होने पर दिल्ली जाने की चेतावनी दी है।
वार्षिक बैठक में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की कार्यप्रणाली पर रोष जताया गया और आगामी हड़ताल की तैयारी पर गहन मंथन हुआ। विभिन्न औद्योगिक इकाइयों के प्रतिनिधियों कहा कि बोर्ड के नियमों का पालन करने के बाद भी अधिकारियों का रवैया उद्योगों के प्रति बिल्कुल भी सहयोगात्मक नहीं है।
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पानीपत डायर्स एसोसिएशन के पूर्व प्रधान भीम राणा ने कहा कि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा निर्धारित सभी शर्तों और नियमों को उनकी इकाई ने पूरी तरह से पूरा कर लिया है। इसके बावजूद विभाग के अधिकारी उनकी फाइलों को जानबूझकर लटकाए हुए हैं और बिना किसी ठोस कारण के क्लोजर (बंद करने) का नोटिस थमा रहे हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि तमाम नियमों का पालन करने के बावजूद उद्योगों को इस तरह प्रताड़ित किया जाएगा, तो उद्यमी अपना कारोबार कैसे चला पाएंगे।
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एसोसिएशन के प्रधान नितिन अरोड़ा ने कहा कि अधिकारियों के समक्ष बार-बार दस्तावेज और अनुपालन रिपोर्ट प्रस्तुत करने के बावजूद उनकी कोई सुनवाई नहीं हो रही है। उन्होंने दोटूक शब्दों में चेतावनी दी कि यदि स्थानीय स्तर पर उनकी समस्याओं का समाधान नहीं निकाला गया, तो वे राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली तक जाएंगे और केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के उच्च अधिकारियों से मिलकर अपनी पीड़ा रखेंगे।
बैठक में उपस्थित सभी उद्योगपतियों ने सर्वसम्मति से निर्णय लिया कि फिलहाल वे हड़ताल पर जाने का कदम टाल रहे हैं। प्रशासन को मामले को सुधारने का मौका दिया है। यदि आगामी एक सप्ताह के भीतर उनकी मांगों और समस्याओं पर विचार नहीं किया गया तो वे एक बड़े आंदोलन का रास्ता अपनाने को मजबूर होंगे। उद्योगपतियों ने जिला प्रशासन से जोरदार मांग की है कि प्रदूषण विभाग के अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए जाएं कि जो उद्योग कायदे-कानूनों के दायरे में चल रहे हैं, उन्हें बेवजह परेशान न किया जाए।