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Panipat News: कोई अपना नजर नहीं आता...से जताया दर्द

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 28 Apr 2025 03:49 AM IST
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I can't see anyone of my own... expressed the pain of those killed in Pahalgam
पानीपत। अंकन साहित्यिक मंच की मासिक काव्य गोष्ठी का आयोजन आर्य रविवार को पीजी कॉलेज के प्रांगण में किया गया। इस अवसर पर कवियों ने कविताओं से पहलगाम में हुए हमले का दर्द व्यक्त किया। इस अवसर पर डॉ. कमर रईस ने मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की। कार्यक्रम की अध्यक्षता सुभाष भाटिया ने की जबकि मंच संचालन कमलेश कुमार पालीवाल ने किया।
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सबसे पहले पहलगाम आतंकवादी हमले में दिवंगत आत्माओं की शांति के लिए दो मिनट मौन रखा। डॉ. ओमबीर जांगड़ा ने सरस्वती वंदना ‘मैया गाऊं तेरी वंदना, मां सरस्वती रख ध्यान मेरा, स्वर्ग की देवी तू संसार में, मिटाती है अज्ञान अंधेरा’ की प्रस्तुति दी। इसके बाद डॉ. कमर रईस बछरायूंनी (सोनीपत) ने कहा कि ‘कोई अपना नजर नहीं आता, कैसी बदली हवा जमाने की’। इसके बाद डॉ. एपी जैन ने अपनी कविता में कहा कि ‘जियो और जीने दो’ को जितना बिसराओगे, मानवता को उतना ही बिलखता पाओगे। धर्मेंद्र अरोड़ा मुसाफिर ने कहा कि ‘केसर की क्यारी हुई, ऐसी लहूलुहान, लदी रही जो भीड़ से, आज भयी सुनसान’। सुभाष भाटिया ने कहा कि ‘हर हिंदू जानता है कि जिहादी बहुत सताता है, मारने से पहले, इतिहास सदा रहा है गवाह कि हिंदू नहीं सुधरेगा, सिधारने से पहले’। संदीप शर्मा बांवरा (रोहतक) ने कहा कि ‘अपणे आप बट्या सै हिंदू, ना और कोए बाटण आला, जिस डाली पै बैठा हिंदू, आप्पए काट्टण आला’।
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डॉ. ओमबीर जांगड़ा (चरखी दादरी) ने कहा कि मुद्दतों साथ चलते रहे, वक्त के सांचे में ढलते रहे। हम अपने उसूल ना बदल सके, वो अक्सर चेहरे बदलते रहे।। नरेश गंभीर ने कहा कि ‘संघर्ष में तुम अकेले हो मित्र, काफिला तो सफलता के बाद आएगा। कमलेश कुमार पालीवाल ‘कमल’ ने कहा कि ‘सारा इंतजार का मजा जाता रहा, वह कमबख्त वक्त पर आता रहा।
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वैसे तो खुशी मिलती रही मुझे, पर गमों से भी ''''''''कमल'''''''' नाता रहा।। -- डॉ. चांद कौर मान ने कहा कि आज पाकिस्तान वाले बैठे हैं सब घात में, पल-पल खोज रहे मौका आए हाथ में।
जो हैं अकल के अंधे उस देश में, बंदे उन्हें समझाना है लेके हथियार।। सभ्रवाल ने कहा कि वो हमारे घर में घुसकर हमें मारते हैं, क्योंकि कुछ सांप हम अपनी आस्तीन में पालते हैं। निर्दोषों का कत्ले आम देखकर खूब रोई है मेरी आंखें, बड़ी मुश्किल से अब हम ख़ुद को संभालते हैं।।

चंद्रशेखर आजाद ने कहा कि यह माना कि वह मेरी नहीं है और ऐसा भी नहीं है की प्यार नहीं है। अरे उसे कैसे मैं दिल से निकालूं, वह मालिक है इस दिल की, किराएदार नहीं है। संवाद
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