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कैसे बिछे शतरंज की बिसात जब प्रदेश में नहीं एक भी उस्ताद

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 20 Jul 2021 02:03 AM IST
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How to lay the chessboard when there is not a single master in the state
पानीपत। मधुरमनन। - फोटो : Panipat
पानीपत। खेल और खिलाड़ियों की धरती हरियाणा में शतरंज के खिलाड़ियों को तवज्जो नहीं। इसका अंदाज इसी से लगाया जा सकता है कि शतरंज के लिए प्रदेश में कोई सरकारी कोच तक नहीं हैं। वर्ष 2014 में शुरू हुई हरियाणा चेस फेडरेशन ने जब चेस टूर्नामेंट की शुरुआत की तो खिलाड़ियों की कुछ उम्मीद बंधी थी लेकिन उनका आरोप है कि बाद में सरकार से इस खेल को कोई बढ़ावा नहीं दिया।
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हरियाणा चेस एसोसिएशन के महासचिव नरेश शर्मा ने बताया कि हरियाणा में शतरंज के खेल को जिंदा रखने का प्रयास कर रहे हैं। जिला एवं राज्य स्तर पर चैंपियनशिप आयोजित खिलाड़ियों को मौका दिया जा रहा है। नेशनल के लिए चयनित होने वाले खिलाड़ियों की प्रवेश फीस भी एसोसिएशन ही वहन करती और उन्हें 200 रुपये प्रति दिन के हिसाब से भुगतान भी किया जाता है।
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पानीपत चेस एसोसिशन के सचिव गौरव छाबड़ा ने बताया कि हमने शतरंज को बढ़ावा देने के लिए एक बार ऑस्ट्रेलिया के चेस मास्टर को भी पानीपत में बुलाया था। उनके साथ खिलाड़ियों का सेमिनार किया गया था। मेरा सपना था कि शतरंज के खेल में आगे जाऊं, लेकिन बढ़ावा नहीं मिलने से वह पूरा नहीं हो सका। अब कोशिश है कि अपने जैसे शतरंज के खिलाड़ियों की मदद कर सकूं।
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हिमांशु शर्मा हरियाणा के अकेले चेस ग्रैंड मास्टर
वर्ष 2017 में सोनीपत में चलने वाली पहली सरदार प्रकाश सिंह मेमोरियल प्रतियोगिता ऐतिहासिक थी। इसमें रोहतक निवासी हिमांशु शर्मा ने शानदार खेल का प्रदर्शन करते हुए हरियाणा के पहले ग्रैंड मास्टर का गौरव प्राप्त किया था। हिमांशु के ग्रैंड मास्टर बनने के बाद पांच लाख रुपये इनाम की घोषणा की गई थी, जो चार साल बाद भी नहीं मिल सकी है। सचिव नरेश शर्मा ने बताया कि इस मामले में मुख्यमंत्री से गुहार लगाई गई है।
हरियाणा की झोली में नहीं है एक भी नेशनल गोल्ड मेडल
शतरंज के खेल में हरियाणा की झोली में एक भी नेशनल गोल्ड मेडल नहीं है। हरियाणा हमेशा नेशनल चैंपियनशिप में साउथ के खिलाड़ियों के सामने नहीं टिक पाया है। इस बार ऑनलाइन हो रही नेशनल चैंपियनशिप के लिए हरियाणा से भी पांच से छह खिलाड़ी टॉप-20 खिलाड़ियों की श्रेणी में है, जिसमें से गुरुग्राम से आदित्य गुरुग्राम और बाकी खिलाड़ी फरीदाबाद से हैं। इन दो जिलों को छोड़ कहीं से शतरंज के खिलाड़ी भाग ही नहीं ले रहे।

हरियाणा में 40 से 50 चेस ट्रेनर निशुल्क सिखा रहे शतरंज
ऑल इंडिया चेस फेडरेशन की ओर से पूरे भारत में दो हजार ट्रेनर को ट्रेनिंग देने के बाद चयनित किया गया था। इनमें से हरियाणा के 40 से 50 ट्रेनर को चयनित किया गया था, जो अब हरियाणा के अलग-अलग जिले में खिलाड़ियों निशुल्क ट्रेनिंग दे रहे हैं।
बोले खिलाड़ी:
शतरंज में प्यादे से राजा तक की अपनी-अपनी भूमिका है। इसने मुझे आगे बढ़ने में मदद की और बोर्ड से बहुत कुछ सीखा है। - मानिया वधवा।
शतरंज भारत का खेल है, जो हमें खेलने के साथ-साथ पढ़ाई में भी मदद करता है। इससे हमारे फैसला लेने की तीव्रता बढ़ जाती है। - संभव।
तीन साल की उम्र में शतरंज खेलना शुरू किया था। मैंने इसे न केवल दिमाग बल्कि अपने दिल से भी महसूस किया है। -मधुरमनन वर्मा।
मैं पिछले तीन साल से चेस प्रतियोगिता में भाग ले रहा हूं। दो साल से मेरा सिल्वर मेडल आ रहा था। पिछले साल कोई प्रतियोगिता नहीं हुई थी। गौरव मल्होत्रा।
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