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उम्मीद : जेडएलडी की मिलेगी सौगात

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 31 Aug 2021 01:44 AM IST
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Hope: ZLD will get the gift
पानीपत। अब शहर को जीरो लिक्विड डिस्चार्ज प्लांट (जेडएलडी) की जल्द सौगात मिल सकती है। पानीपत के उद्यमियों का यह ड्रीम प्रोजेक्ट है, जो 22 एकड़ में एक हजार करोड़ रुपये की लागत से शहर में लगाया जाना है। शहरी विधायक प्रमोद विज ने विधानसभा में ये मुद्दा उठाया तो सीएम ने इस प्रोजेक्ट पर जल्द काम शुरू करने का आश्वासन दिया है। ऐसे में उम्मीद है कि जल्द ही शहर को इसकी सौगात मिलेगी।
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विधायक ने सरकार से मांग की है कि जल्द से जल्द इस प्रोजेक्ट को लगाया जाए ताकि पानीपत का भूजल बचाया जा सके। दरअसल पानीपत की इंडस्ट्री हर रोज करीब 8 करोड़ लीटर पानी का दोहन करती है। ये पानी एक बार भूमि से निकलने के बाद दोबारा इस्तेमाल किया जा सके, इसलिए जेडएलडी प्रोजेक्ट जरूरी है।
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एक साल पहले सीएम ने भरी थी प्रोजेक्ट के लिए हामी
दो साल तक सोचने के बाद सरकार ने एक साल पहले इसके लिए हामी भर दी है। इससे पहले इस प्रोजेक्ट के लिए केंद्र सरकार ने 500 करोड़ और राज्य सरकार ने 250 करोड़ रुपये देने की घोषणा की थी। बाकी 250 करोड़ उद्यमियों को देने को कहा था, लेकिन उद्यमियों ने इतने पैसे देने में असमर्थता जताई। सरकार भी अपने बयानों पर अड़ी रही। सीएम ने एक साल उद्यमियों की इस मांग को मानते हुए 500 करोड़ रुपये देने की हामी भर दी थी, लेकिन कोरोना के कारण ये प्रोजेक्ट अटक गया था।
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तत्कालीन उपायुक्त ने किए थे प्रयास
शहर के उद्योगों से निकल रहे रंगीन पानी को अगर दोबारा से उपयोग में लाना है तो जीरो लिक्विड डिस्चार्ज (जेडएलडी) प्लांट लगाना ही होगा। इस प्रोजेक्ट के लिए प्लान भी बना। तत्कालीन डीसी चंद्रशेखर खरे ने कई बार प्रयास भी किए लेकिन प्रोजेक्ट फाइल से बाहर नहीं निकल सका। जेडएलडी सिरे नहीं चढ़ पाने की वजह है बजट का अभाव था। उद्यमियों से भी 25 प्रतिशत लेने की योजना बनाई गई थी।
उद्यमियों ने साफ कर दिया था, सुविधा देना सरकार का काम
सेक्टर-29-2 में अलग से डाइंग यूनिट आने के बाद जीरो लिक्विड डिस्चार्ज लगाने पर विचार उठने लगे। शहरी स्थानीय निकाय विभाग ने 2015 में करीब एक हजार करोड़ का प्रस्ताव बनाकर भेजा। इसके अंतर्गत 50 प्रतिशत पैसा केंद्र और 25 प्रतिशत प्रदेश सरकार को देना था। बाकी 25 प्रतिशत उद्योगों से लिया जाना था। अधिकारियों ने उद्यमियों के सामने प्रस्ताव को रखा तो वे पीछे हटने लगे। उद्यमियों ने साफ कह दिया था कि वे इतनी रकम नहीं जुटा सकते है।
22 एकड़ में बनना है जेडएलडी
जेडएलडी के ड्रॉप होने का दूसरा बड़ा कारण सेक्टर के आसपास जमीन न मिल पाना था। इस प्रोजेक्ट के लिए 20 से 22 एकड़ जमीन की जरूरत है। सेक्टर-29 के आसपास इतनी जमीन उपलब्ध भी नहीं है। दूसरा सरकार भूमि अधिग्रहीत करने की भी स्थिति में नहीं थी। 2015 का प्रोजेक्ट धीरे-धीरे ठंड पड़ता चला गया। अब प्रोजेक्ट का नाम जिक्र दोबारा आया है।
यह है जेडएलडी प्रोजेक्ट : शहर में 20 हजार के करीब छोटे-बड़े उद्योग हैं। इनमें एक हजार डाइंग यूनिट हैं। ये यूनिट हर रोज करीब आठ करोड़ लीटर पानी प्रयोग करती हैं। डाइंग यूनिटों से निकलने वाले पानी में केमिकल भारी मात्रा में होता है। इस पानी के लगातार प्रयोग में लाने से जमीन की उर्वरा शक्ति कमजोर होने के साथ हानिकारक तत्वों की मात्रा बढ़ती जाती है। जेडएलडी में पानी को पूरी तरह से ट्रीट किया जाता है। इसको फाइनल स्टेज में दोबारा उसी तरह से प्रयोग करने लायक बना जाता है। यदि यह प्रोजेक्ट परवान चढ़ता है तो आने वाले समय में बड़ी मात्रा में पानी की बचत हो सकेगी। साथ ही पानी को प्रदूषित होने से भी बचाया जा सकेगा।
सूरत में लगा है प्लांट
केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने ढाई साल पहले सूरत में करंज टेक्सटाइल पार्क का उद्घाटन किया था। तीन सौ करोड़ के इस टेक्सटाइल पार्क में जीरो लिक्विड डिस्चार्ज प्लांट भी लगाया गया है। जिस तरह पानीपत में सीईटीपी लगा है, ठीक उसी तरह सूरत में भी लगे हैं। सीईटीपी से निकलने वाले पानी का कोई इस्तेमाल नहीं हो पाता। अगर जेडएलडी से सीईटीपी का पानी निकाला जाए तो उसे दोबारा प्रयोग कर सकते हैं। सूरत में 92 फीसदी पानी का दोबारा उपयोग किया जा रहा है।
अगर जेएलडी प्लांट मिल जाए तो बचेगा पानी
विधायक प्रमोद विज ने विधानसभा में दोबारा जेएलडी का मुद्दा उठाया है। सरकार की ओर से भी आश्वासन मिला है। सरकार ने सवा साल पहले प्रोजेक्ट के लिए हामी भर दी थी। केंद्र सरकार ने इस प्रोजेक्ट के लिए 500 करोड़ रुपये दिए थे। अगर शहर को ये प्लांट मिल जाए तो करोड़ों लीटर पानी हर रोज बचेगा

-भीम राणा, प्रधान डायर्स एसोसिएशन।
हम प्लांट लाने का पूरा प्रयास कर रहे हैं
जेडएलडी प्लांट आज की स्थिति को देखते हुए पानीपत के लिए बहुत जरूरी है। हर रोज आठ करोड़ लीटर पानी का दोहन किया जा रहा है। विधानसभा में भी ये मुद्दा उठाया गया है। उम्मीद है इस संबंध में सीएम जल्द बड़ा कदम उठाएंगे।
विधायक प्रमोद विज, पानीपत शहरी
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