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Panipat News: तीन साल से घर छोड़ एकेडमी में रहकर कुश्ती के दांव-पेच सीख रहा गुरमीत
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जिला स्तरीय प्रतियोगिता में दो रजत पदक जीते, कोच के मार्गदर्शन में देश के लिए खेलने का लक्ष्य
संवाद न्यूज एजेंसी
पानीपत। शाहपुर स्थित कृष्ण कुंडू इंटरनेशनल स्पोर्ट्स एकेडमी के पहलवान गुरमीत कुश्ती में अपनी पहचान बना रहे हैं। मूलरूप से कैथल जिले के पाई गांव के रहने वाले गुरमीत जिला स्तरीय कुश्ती प्रतियोगिता में दो रजत पदक जीत चुके हैं। स्कूली प्रतियोगिताओं में भी वह अपनी प्रतिभा दिखा चुके हैं।
गुरमीत पिछले तीन वर्षों से गांव छोड़कर एकेडमी में रह रहे हैं और कुश्ती की तैयारी कर रहे हैं। उनके पिता प्रदीप डुल किसान हैं और मां मीनू गृहिणी हैं। माता-पिता बेटे के समर्पण को देखते हुए उसे पूरा सहयोग दे रहे हैं। उनका सपना है कि बेटा कुश्ती में बड़ा खिलाड़ी बनकर देश का नाम रोशन करे।
गुरमीत ने बताया कि बड़े खिलाड़ियों को कुश्ती करते देखकर उन्होंने इस खेल में करियर बनाने का फैसला किया। वह बेहतर तैयारी के लिए सुबह-शाम कोच के मार्गदर्शन में अभ्यास करते हैं। एकेडमी में कोच कृष्ण कुंडू और प्रदीप उन्हें कुश्ती के गुर सिखा रहे हैं।
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कोच प्रदीप ने बताया कि गुरमीत पिछले तीन वर्षों से एकेडमी में रहकर अपनी प्रतिभा निखार रहे हैं। कुश्ती के प्रति उसका जुनून और मेहनत उसे आगे बढ़ने में मदद करेगी। अभी उसकी शुरुआत है। निरंतर अभ्यास और लगन से वह भविष्य में अच्छी पहचान बना सकता है।
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संवाद न्यूज एजेंसी
पानीपत। शाहपुर स्थित कृष्ण कुंडू इंटरनेशनल स्पोर्ट्स एकेडमी के पहलवान गुरमीत कुश्ती में अपनी पहचान बना रहे हैं। मूलरूप से कैथल जिले के पाई गांव के रहने वाले गुरमीत जिला स्तरीय कुश्ती प्रतियोगिता में दो रजत पदक जीत चुके हैं। स्कूली प्रतियोगिताओं में भी वह अपनी प्रतिभा दिखा चुके हैं।
गुरमीत पिछले तीन वर्षों से गांव छोड़कर एकेडमी में रह रहे हैं और कुश्ती की तैयारी कर रहे हैं। उनके पिता प्रदीप डुल किसान हैं और मां मीनू गृहिणी हैं। माता-पिता बेटे के समर्पण को देखते हुए उसे पूरा सहयोग दे रहे हैं। उनका सपना है कि बेटा कुश्ती में बड़ा खिलाड़ी बनकर देश का नाम रोशन करे।
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गुरमीत ने बताया कि बड़े खिलाड़ियों को कुश्ती करते देखकर उन्होंने इस खेल में करियर बनाने का फैसला किया। वह बेहतर तैयारी के लिए सुबह-शाम कोच के मार्गदर्शन में अभ्यास करते हैं। एकेडमी में कोच कृष्ण कुंडू और प्रदीप उन्हें कुश्ती के गुर सिखा रहे हैं।
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कोच प्रदीप ने बताया कि गुरमीत पिछले तीन वर्षों से एकेडमी में रहकर अपनी प्रतिभा निखार रहे हैं। कुश्ती के प्रति उसका जुनून और मेहनत उसे आगे बढ़ने में मदद करेगी। अभी उसकी शुरुआत है। निरंतर अभ्यास और लगन से वह भविष्य में अच्छी पहचान बना सकता है।
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