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खाली सिलिंडर के लिए रेडक्रॉस में रिफंडेबल सिक्योरिटी 12 हजार जमा करवाएं और 350 रुपये में घर बैठे ऑक्सीजन से पूरा भरा सिलिंडर पाए
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जिला रेडक्रॉस ने अब उन लोगों को ऑक्सीजन सिलिंडर उपलब्ध करवाने के लिए प्लान बनाया है, जिनके पास खाली सिलिंडर नहीं हैं। इसके लिए आपको खाली सिलिंडर की एवज में 12 हजार रुपये की सिक्योरिटी राशि जमा करवानी होगी, जोकि रिफंडेबल होगी। जब आप खाली सिलिंडर वापस रेडक्रॉस में जमा कराएंगे तो सिक्योरिटी राशि लौटा दी जाएगी। वहीं, ऑक्सीजन का भरा सिलिंडर लेने के लिए आपको 350 रुपये का चार्ज भी देना होगा। इसमें ऑक्सीजन से भरा सिलिंडर आपके घर तक डिलिवर होगा। अगर आपको फ्री में ऑक्सीजन चाहिए तो इसके लिए आपको खाली सिलिंडर देकर संस्थाओं के माध्यम से रिफिल करवाना होगा, लेकिन इसमें केवल 1.600 किलोग्राम ऑक्सीजन ही मिलेगी।
हालांकि ये रेडक्रॉस की अच्छी शुरुआत है, लेकिन गरीब और जरूरतमंद लोगों को इसमें दिक्कत आ सकती है। क्योंकि एक कोविड मरीज को 24 घंटे तक ऑक्सीजन लगाए रखने के लिए कम से कम दो सिलिंडरों की आवश्यकता है। अगर उसके पास ऑक्सीजन का खाली सिलिंडर नहीं है और दो सिलिंडरों की जरूरत है तो उसे 24 हजार की सिक्योरिटी राशि देनी होगी। इसके लिए अब सामाजिक संस्थाएं आगे आईं हैं। उनका कहना है कि वे बिना सिक्योरिटी के सभी को ऑक्सीजन सिलिंडर मुहैया करवा सकती हैं, लेकिन इसमें प्रशासन को उनका सहयोग करना होगा। प्रशासन को संस्थाओं की जिम्मेदारी पर सिलिंडर देने होंगे। संस्थाएं उन्हें आगे अपने भरोसे पर कोविड मरीजों को देेंगी। अगर संस्था खाली सिलिंडर जमा नहीं करवा पाती है तो इसके लिए संस्था सिलिंडर का शुल्क तक भुगतने के लिए तैयार रहेंगी।
नहीं लगेंगे सिलिंडरों के स्टॉक
अब सिलिंडरों में कम गैस आने की वजह से लोग इनका स्टॉक लगा रहे हैं। एक सिलिंडर केवल एक या दो घंटे के लिए ही ऑक्सीजन पर्याप्त है, इसलिए 24 घंटे तक ऑक्सीजन के लिए लोगों ने कई-कई सिलिंडर ले रखें हैं। जब लोगों को ये पता रहेगा कि उन्हें अगले 24 घंटे में पूरा भरा सिलिंडर मिलेगा तो वे खाली सिलिंडरों का क्या करेंगे। ये खाली सिलिंडर आगे सर्कुलेट होंगे, जिससे सभी जरूरतमंदों को ऑक्सीजन मिल पाएगी।
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संयुक्त व्यापार मंडल समिति ने जताया विरोध
होम आइसोलेटेड कोविड मरीजों को ऑक्सीजन सिलिंडर देने की जिम्मेदारी संयुक्त व्यापार मंडल समिति को भी मिली है। अब 12 हजार की सिक्योरिटी और 250 रुपये में आक्सीजन और 100 रुपये ट्रांसपोर्टेशन पर समिति ने आपत्ति जताई है। समिति पदाधिकारियों ने इस सिस्टम को फेलियर बताते हुए तंज कसा है। पदाधिकारियों का कहना है कि पहले फ्री सिलिंडर भरवाए जा रहे थे, लेकिन इनमें ऑक्सीजन कम थी। अब पैसे लेकर सिलिंडर भरवाना कहां तक उचित है।
शुल्क देकर पूरी ऑक्सीजन मिलना अच्छी पहल
सहयोग एक परिवार संस्था प्रतिनिधि गौरव लीखा ने बताया कि एक आदमी को खाली सिलिंडर रिफिल करवाने के लिए ऑटो-रिक्शा से आना पड़ता है। इसके लिए सौ से पांच सौ रुपये तक खर्च करने पड़ते हैं। इसके अलावा 24 घंटे में एक सिलिंडर मिलता है। इसमें भी काफी कम गैस आती है। वहीं, अगर 250 रुपये में ऑक्सीजन का भरा सिलिंडर और 100 रुपये ट्रांसपोर्ट खर्च देने के बाद घर बैठे ऑक्सीजन उपलब्ध हो सके तो ज्यादा बेहतर है। इसके लिए संस्था पदाधिकारी शुक्रवार को ऑक्सीजन वितरण के नोडल अधिकारी सुशील कुमार से भी बात करेंगे।
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हालांकि ये रेडक्रॉस की अच्छी शुरुआत है, लेकिन गरीब और जरूरतमंद लोगों को इसमें दिक्कत आ सकती है। क्योंकि एक कोविड मरीज को 24 घंटे तक ऑक्सीजन लगाए रखने के लिए कम से कम दो सिलिंडरों की आवश्यकता है। अगर उसके पास ऑक्सीजन का खाली सिलिंडर नहीं है और दो सिलिंडरों की जरूरत है तो उसे 24 हजार की सिक्योरिटी राशि देनी होगी। इसके लिए अब सामाजिक संस्थाएं आगे आईं हैं। उनका कहना है कि वे बिना सिक्योरिटी के सभी को ऑक्सीजन सिलिंडर मुहैया करवा सकती हैं, लेकिन इसमें प्रशासन को उनका सहयोग करना होगा। प्रशासन को संस्थाओं की जिम्मेदारी पर सिलिंडर देने होंगे। संस्थाएं उन्हें आगे अपने भरोसे पर कोविड मरीजों को देेंगी। अगर संस्था खाली सिलिंडर जमा नहीं करवा पाती है तो इसके लिए संस्था सिलिंडर का शुल्क तक भुगतने के लिए तैयार रहेंगी।
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नहीं लगेंगे सिलिंडरों के स्टॉक
अब सिलिंडरों में कम गैस आने की वजह से लोग इनका स्टॉक लगा रहे हैं। एक सिलिंडर केवल एक या दो घंटे के लिए ही ऑक्सीजन पर्याप्त है, इसलिए 24 घंटे तक ऑक्सीजन के लिए लोगों ने कई-कई सिलिंडर ले रखें हैं। जब लोगों को ये पता रहेगा कि उन्हें अगले 24 घंटे में पूरा भरा सिलिंडर मिलेगा तो वे खाली सिलिंडरों का क्या करेंगे। ये खाली सिलिंडर आगे सर्कुलेट होंगे, जिससे सभी जरूरतमंदों को ऑक्सीजन मिल पाएगी।
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संयुक्त व्यापार मंडल समिति ने जताया विरोध
होम आइसोलेटेड कोविड मरीजों को ऑक्सीजन सिलिंडर देने की जिम्मेदारी संयुक्त व्यापार मंडल समिति को भी मिली है। अब 12 हजार की सिक्योरिटी और 250 रुपये में आक्सीजन और 100 रुपये ट्रांसपोर्टेशन पर समिति ने आपत्ति जताई है। समिति पदाधिकारियों ने इस सिस्टम को फेलियर बताते हुए तंज कसा है। पदाधिकारियों का कहना है कि पहले फ्री सिलिंडर भरवाए जा रहे थे, लेकिन इनमें ऑक्सीजन कम थी। अब पैसे लेकर सिलिंडर भरवाना कहां तक उचित है।
शुल्क देकर पूरी ऑक्सीजन मिलना अच्छी पहल
सहयोग एक परिवार संस्था प्रतिनिधि गौरव लीखा ने बताया कि एक आदमी को खाली सिलिंडर रिफिल करवाने के लिए ऑटो-रिक्शा से आना पड़ता है। इसके लिए सौ से पांच सौ रुपये तक खर्च करने पड़ते हैं। इसके अलावा 24 घंटे में एक सिलिंडर मिलता है। इसमें भी काफी कम गैस आती है। वहीं, अगर 250 रुपये में ऑक्सीजन का भरा सिलिंडर और 100 रुपये ट्रांसपोर्ट खर्च देने के बाद घर बैठे ऑक्सीजन उपलब्ध हो सके तो ज्यादा बेहतर है। इसके लिए संस्था पदाधिकारी शुक्रवार को ऑक्सीजन वितरण के नोडल अधिकारी सुशील कुमार से भी बात करेंगे।