फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Panipat News ›   Following his fathers death

Panipat News: पिता के निधन के बाद बैंक और कंपनी ने बीमा देने की बजाय बेटे को दी जेल भेजने की धमकी, आयोग ने सेवा में मानी खामी

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 20 Oct 2026 08:05 PM IST
विज्ञापन
Following his fathers death
-एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक और एचडीएफसी लाइफ को आयोग ने दिया झटका
विज्ञापन

-आयोग ने मानसिक उत्पीड़न पर 11 हजार रुपये मुआवजा देने का दिया निर्देश
माई सिटी रिपोर्टर
पानीपत। पिता के निधन के बाद कार लोन चुकाने के लिए अनुचित दबाव बनाने, फर्जी दस्तावेज का सहारा लेने और बेटे को जेल भिजवाने व घर-गाड़ी छीनने की धमकी देने वाले बैंक और बीमा कंपनी की मनमानी पर उपभोक्ता आयोग ने सख्त रुख अपनाया है। जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक और एचडीएफसी लाइफ इंश्योरेंस की सेवा में भारी खामी पाते हुए कड़ा आदेश सुनाया है।

उपभोक्ता आयोग के अध्यक्ष डॉ. आरके डोगरा और सदस्यों की बेंच ने निर्देश दिया है कि मृतक के लोन की बकाया राशि उनके बीमा क्लेम से काटी जाए और बाकी बची हुई पूरी रकम नॉमिनी (बेटे) को लौटाई जाए। इसके साथ ही आयोग ने शिकायतकर्ता को हुए मानसिक उत्पीड़न के मुआवजे के रूप में 11 हजार रुपये देने का भी आदेश दिया है।
विज्ञापन


बीमा होने के बावजूद बैंक ने किया परेशान

जींद के गांगोली गांव निवासी सोमदत्त ने जिला उपभोक्ता आयोग में शिकायत दर्ज कराई थी। उन्होंने बताया कि उनके पिता शिव कुमार ने 29 जुलाई 2022 को एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक की पानीपत शाखा से सेलेरियो कार के लिए 6.33 लाख रुपये का लोन लिया था। इसमें उनको सह-आवेदक बनाया था और लोन का बीमा एचडीएफसी लाइफ से कराया गया था। पिता नियमित रूप से 13,297 रुपये की मासिक किस्त भर रहे थे, लेकिन 22 अक्तूबर 2023 को उनका निधन हो गया। उन्होंने बैंक में डेथ सर्टिफिकेट जमा कराकर बीमा पॉलिसी से लोन सेटल करने की बात कही तो प्रबंधक ने फर्जी दस्तावेज बताए। उनसे पैसे मांगे और भुगतान न करने पर उन्हें जेल भिजवा देने की धमकी दी। उन्होंने घर और गाड़ी छीन लेने की धमकी दी।
विज्ञापन
विज्ञापन


आयोग ने कहा- नॉमिनी का हक खारिज नहीं कर सकते

बैंक व बीमा कंपनी ने तर्क दिया कि पॉलिसी रिकॉर्ड में बीमित व्यक्ति के रूप में बेटे का नाम दर्ज था और मृतक केवल नॉमिनी थे। ऐसे में क्लेम नहीं दिया जा सकता। आयोग ने इस तर्क को सिरे से खारिज कर दिया और स्पष्ट कहा कि जब कार लोन मुख्य व्यक्ति शिव कुमार के नाम पर स्वीकृत था तो बीमा का लाभ भी उनके नॉमिनी को मिलना तय है। उपभोक्ता आयोग ने बैंक और बीमा कंपनी को 45 दिनों के भीतर इस आदेश को लागू करने के निर्देश दिए हैं। आयोग ने चेतावनी दी है कि तय समय में आदेश का पालन न करने पर 12 प्रतिशत वार्षिक ब्याज दर या सख्त कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed