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Panipat News: धान में नमी, सरकारी खरीद नहीं होने से किसान परेशान
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पानीपत। जिला प्रशासन के तमाम दावों के बाद भी मंडियों में धान की सरकारी खरीद नहीं की गई। पहले दो दिन में एजेंसी अपनी तैयारी नहीं कर पाई और तीसरे दिन रविवार की छुट्टी के चलते खरीद नहीं हो सकी। कुछ किसान मंडी में धान लेकर पहुंचे तो एजेंसी संचालक ने धान में नमी बताकर खरीदने से मना कर दिया। ऐसे में सीजन की शुरुआत में ही किसान मंडियों में रुकने को मजबूर हो गए हैं। मंडियों में करीब 1500 क्विंटल धान पड़ा है।
जिले की छह मंडियों में हैफेड और कान्फेड को धान की मोटी किस्म की सरकारी खरीद करनी है। पहले एक अक्टूबर को धान की खरीद शुरू की जानी थी, लेकिन किसानों के लगातार मांग उठाने के चलते धान की शुक्रवार को खरीद शुरू की। अधिकारियों ने पहले दिन धान की खरीद की तैयारियों में लगा दी। शनिवार को मंडियों में धान पहुंचा। एजेंसियों ने नमी अधिक होने की बात कहकर खरीद से मना कर दिया। समालखा समेत कई मंडियों में किसानों को धान सुखाने के लिए फैलाने पड़े। रविवार को छुट्टी के चलते धान की खरीद नहीं की गई।
बॉक्स
नमी और बारिश ने किया परेशान
जुआ गांव निवासी किसान यशपाल ने बताया कि वह समालखा अनाज मंडी में शनिवार को करीब 40 क्विंटल धान लेकर आया था। वह इसको बेचकर अगली कटाई करने की सोच रहा था। यहां मंडी में धान में नमी बता दी गई। उसको धान को फैलाना पड़ा और वह दूसरी धार की कटाई भी नहीं कर पाया। सीजन के समय किसान के पास मंडी में कई-कई दिन रुकने का समय नहीं होता। वह आते ही अपनी फसल बेचकर खेत में काम करने की तैयारी के साथ आता है।
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गढ़ी भल्लौर निवासी किसान इंद्र सिंह ने बताया कि धान की फसल की पकाई के समय बारिश आ गई। इससे बालियां काफी झड़ गईं। पिछले साल प्रति एकड़ 25 से 27 क्विंटल धान का उत्पादन हुआ था। यह इस बार 20 से 22 क्विंटल है। किसान को प्रति एकड़ 10 से 15 हजार रुपये तक का नुकसान हो रहा है। अब फिर कई दिन से आसमान में बादल छाए हुए हैं। बूंदाबांदी या बारिश होने पर धान का नुकसान होगा।
मंडियों में व्यापक तैयारी का दावा
प्रशासन ने ई-खरीद मोबाइल एप सुचारु किया है। इसके आधार पर किसान मंडी में आने के लिए अनुमानित तिथि का पता लगा सकते हैं। जिससे उनको मंडी में परेशानी नहीं होगी। ई-खरीद मोबाइल एप में क्यूआर कोड आएगा। किसान उसे स्कैन कर तिथि ले सकता है। पहले किसान को मंडी में आकर क्यूआर कोड स्कैन करना होता था। मार्केट कमेटी सचिव मंडियों में गोवंश के रोकथाम को लेकर काम करने के आदेश दिए थे। यहां अब तक इसके कोई पुख्ता प्रबंध नहीं किए गए हैं। इसके साथ उत्तर प्रदेश समेत दूसरे प्रदेशों के धान पर रोक लगाई गई। पानीपत के समालखा, सनौली व बापौली क्षेत्र के काफी किसानों की यमुना पार जमीन है। उनको यहां धान लाना मजबूरी बन सकता है।
वर्जन
मंडियों में धान की सरकारी खरीद शुरू कर दी गई है। किसानों से धान को सुखाकर लाने की अपील है। मंडी में नमी 17 प्रतिशत से अधिक नहीं होनी चाहिए। इससे अधिक नमी पाए जाने पर कटौती की जाएगी।
डॉ. वीरेंद्र कुमार दहिया, उपायुक्त।
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जिले की छह मंडियों में हैफेड और कान्फेड को धान की मोटी किस्म की सरकारी खरीद करनी है। पहले एक अक्टूबर को धान की खरीद शुरू की जानी थी, लेकिन किसानों के लगातार मांग उठाने के चलते धान की शुक्रवार को खरीद शुरू की। अधिकारियों ने पहले दिन धान की खरीद की तैयारियों में लगा दी। शनिवार को मंडियों में धान पहुंचा। एजेंसियों ने नमी अधिक होने की बात कहकर खरीद से मना कर दिया। समालखा समेत कई मंडियों में किसानों को धान सुखाने के लिए फैलाने पड़े। रविवार को छुट्टी के चलते धान की खरीद नहीं की गई।
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नमी और बारिश ने किया परेशान
जुआ गांव निवासी किसान यशपाल ने बताया कि वह समालखा अनाज मंडी में शनिवार को करीब 40 क्विंटल धान लेकर आया था। वह इसको बेचकर अगली कटाई करने की सोच रहा था। यहां मंडी में धान में नमी बता दी गई। उसको धान को फैलाना पड़ा और वह दूसरी धार की कटाई भी नहीं कर पाया। सीजन के समय किसान के पास मंडी में कई-कई दिन रुकने का समय नहीं होता। वह आते ही अपनी फसल बेचकर खेत में काम करने की तैयारी के साथ आता है।
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गढ़ी भल्लौर निवासी किसान इंद्र सिंह ने बताया कि धान की फसल की पकाई के समय बारिश आ गई। इससे बालियां काफी झड़ गईं। पिछले साल प्रति एकड़ 25 से 27 क्विंटल धान का उत्पादन हुआ था। यह इस बार 20 से 22 क्विंटल है। किसान को प्रति एकड़ 10 से 15 हजार रुपये तक का नुकसान हो रहा है। अब फिर कई दिन से आसमान में बादल छाए हुए हैं। बूंदाबांदी या बारिश होने पर धान का नुकसान होगा।
मंडियों में व्यापक तैयारी का दावा
प्रशासन ने ई-खरीद मोबाइल एप सुचारु किया है। इसके आधार पर किसान मंडी में आने के लिए अनुमानित तिथि का पता लगा सकते हैं। जिससे उनको मंडी में परेशानी नहीं होगी। ई-खरीद मोबाइल एप में क्यूआर कोड आएगा। किसान उसे स्कैन कर तिथि ले सकता है। पहले किसान को मंडी में आकर क्यूआर कोड स्कैन करना होता था। मार्केट कमेटी सचिव मंडियों में गोवंश के रोकथाम को लेकर काम करने के आदेश दिए थे। यहां अब तक इसके कोई पुख्ता प्रबंध नहीं किए गए हैं। इसके साथ उत्तर प्रदेश समेत दूसरे प्रदेशों के धान पर रोक लगाई गई। पानीपत के समालखा, सनौली व बापौली क्षेत्र के काफी किसानों की यमुना पार जमीन है। उनको यहां धान लाना मजबूरी बन सकता है।
वर्जन
मंडियों में धान की सरकारी खरीद शुरू कर दी गई है। किसानों से धान को सुखाकर लाने की अपील है। मंडी में नमी 17 प्रतिशत से अधिक नहीं होनी चाहिए। इससे अधिक नमी पाए जाने पर कटौती की जाएगी।
डॉ. वीरेंद्र कुमार दहिया, उपायुक्त।