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एक्सपोर्टर के लिए आठ करोड़ की लिमिट
अमर उजाला, पानीपत
Updated Fri, 15 Nov 2013 12:06 AM IST
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पानीपत के मतलौडा में आढ़ती एसोसिएशन ने सर्वसम्मति से मंडी में धान खरीद करने वाले एक्सपोर्टरों के लिए आठ करोड़ की लिमिट तय की है।
यह फैसला कच्चा और पक्का आढ़ती (एक्सपोर्टरों की खरीद करने वाले आढ़ती) के भुगतान को सुरक्षित करने के लिए किया। आढ़ती एसोसिएशन के प्रधान विनय गुप्ता ने बताया कि मंडी में करीब 15 से 20 एक्सपोर्टरों की खरीद चल रही है।
एक एक्सपोर्टर आठ करोड़ रुपये की धान खरीदने के बाद आगे की खरीद तभी कर सकेगा जब एक्सपोर्टर आढ़तियों की पिछली आठ करोड़ का भुगतान कर देगा।
बैैठक में आढ़ती एसोसिएशन ने यह निर्णय इसलिए लिया कि मंडी के एक पक्के आढ़ती ने पिछले साल एक एक्सपोर्टर की करीब सात करोड़ की धान को मंडी से उधार में खरीद कर भेजा था। इसके बाद आज तक भी उस एक्सपोर्टर ने इस पक्के आढ़ती को पेमेंट नहीं भेजी।
इससे मंडी के आढ़तियों की सात करोड़ पेमेंट नहीं होने से आढ़तियों की आर्थिक स्थिति पर बुरा असर पड़ा है। इसी के मद्देनजर आढ़ती एसोसिएशन ने यह फैसला लिया है।
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एक्सपोर्टर की लिमिट आफत
आढ़ती एसोसिएशन द्वारा एक्सपोर्टरों के लिए बनाई आठ करोड़ की लिमिट किसानों और आढ़तियों के लिए आफत बन गई है। कई एक्सपोर्टर ने अब तक आठ से 12 करोड़ तक की धान खरीद चुके हैं, लेकिन आढ़तियों की पेमेंट काफी कम की गई है। इससे आढ़तियों ने पिछली पेमेंट आने तक आगे की खरीद करने पर कुछ एक्सपोर्टरों पर पाबंदी लगाई है।
इसलिए मंडी में धान के खरीदार भी कम होने के कारण आए रोज धान की बोली प्रक्रिया नियमित रूप से नहीं हो पाती। इसके परिणामस्वरूप एक तो धान के रेट में एक हजार की गिरावट आई है और दूसरे दस-दस दिन तक बोली नही आने से किसान और आढ़ती परेशान हैं। किसान रामसिंह, रमेश कुमार और पवन कुमार ने बताया कि पिछले दस दिन से बोली नही आने से उनकी धान मंडी में दस दिन से पड़ी है। मंडी में 1121 धान 3500 रुपये और बासमती धान 5200 के आसपास खरीदे जा रहे हैं।
आढ़ती एसोसिएशन के आठ करोड़ रुपये से ज्यादा उधार में धान न खरीदने के फैसले के कारण मंडी में धान के खरीददार भी कम हो गए हैं और धान के रेट भी एक हजार रुपये तक गिर गए हैं। इससे बोली प्रक्रिया नियमित रूप से चलाने में परेशानी हो रही है।
दीपक सहवाग, सचिव मार्केट कमेटी
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यह फैसला कच्चा और पक्का आढ़ती (एक्सपोर्टरों की खरीद करने वाले आढ़ती) के भुगतान को सुरक्षित करने के लिए किया। आढ़ती एसोसिएशन के प्रधान विनय गुप्ता ने बताया कि मंडी में करीब 15 से 20 एक्सपोर्टरों की खरीद चल रही है।
एक एक्सपोर्टर आठ करोड़ रुपये की धान खरीदने के बाद आगे की खरीद तभी कर सकेगा जब एक्सपोर्टर आढ़तियों की पिछली आठ करोड़ का भुगतान कर देगा।
बैैठक में आढ़ती एसोसिएशन ने यह निर्णय इसलिए लिया कि मंडी के एक पक्के आढ़ती ने पिछले साल एक एक्सपोर्टर की करीब सात करोड़ की धान को मंडी से उधार में खरीद कर भेजा था। इसके बाद आज तक भी उस एक्सपोर्टर ने इस पक्के आढ़ती को पेमेंट नहीं भेजी।
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इससे मंडी के आढ़तियों की सात करोड़ पेमेंट नहीं होने से आढ़तियों की आर्थिक स्थिति पर बुरा असर पड़ा है। इसी के मद्देनजर आढ़ती एसोसिएशन ने यह फैसला लिया है।
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एक्सपोर्टर की लिमिट आफत
आढ़ती एसोसिएशन द्वारा एक्सपोर्टरों के लिए बनाई आठ करोड़ की लिमिट किसानों और आढ़तियों के लिए आफत बन गई है। कई एक्सपोर्टर ने अब तक आठ से 12 करोड़ तक की धान खरीद चुके हैं, लेकिन आढ़तियों की पेमेंट काफी कम की गई है। इससे आढ़तियों ने पिछली पेमेंट आने तक आगे की खरीद करने पर कुछ एक्सपोर्टरों पर पाबंदी लगाई है।
इसलिए मंडी में धान के खरीदार भी कम होने के कारण आए रोज धान की बोली प्रक्रिया नियमित रूप से नहीं हो पाती। इसके परिणामस्वरूप एक तो धान के रेट में एक हजार की गिरावट आई है और दूसरे दस-दस दिन तक बोली नही आने से किसान और आढ़ती परेशान हैं। किसान रामसिंह, रमेश कुमार और पवन कुमार ने बताया कि पिछले दस दिन से बोली नही आने से उनकी धान मंडी में दस दिन से पड़ी है। मंडी में 1121 धान 3500 रुपये और बासमती धान 5200 के आसपास खरीदे जा रहे हैं।
आढ़ती एसोसिएशन के आठ करोड़ रुपये से ज्यादा उधार में धान न खरीदने के फैसले के कारण मंडी में धान के खरीददार भी कम हो गए हैं और धान के रेट भी एक हजार रुपये तक गिर गए हैं। इससे बोली प्रक्रिया नियमित रूप से चलाने में परेशानी हो रही है।
दीपक सहवाग, सचिव मार्केट कमेटी