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तीन वर्षों के बाद भी नहीं बदले बिजली के मीटर
अमर उजाला, पानीपत
Updated Tue, 31 Dec 2013 11:26 PM IST
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पानीपत के बिजली निगम घरों में लगे पुराने काले रंग केे मीटरों को बदलने की
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योजना तीन साल बाद भी पूरी नहीं हो पाई है। वर्ष 2011 की शुरूआत में तो
मीटरों को बदलने की प्रक्रिया को बड़े जोर शोर से शुरू किया गया था। लेकिन
जैसे-जैसे समय बीता, योजना भी ठंडे बस्ते में चली गई।
उत्तर हरियाणा बिजली वितरण निगम ने उपभोक्ताओं की सुविधा के लिए वर्ष 2011 में घरों में लगे काले मीटरों को बदलने की योजना बनाई थी। काले मीटरों के स्थान पर नए डिजिटल मीटर लगाए जाने थे। तीन वर्ष बीत जाने के बाद भी आज भी अनेक घरों में नए मीटर नहीं लग पाए हैं।
निगम ने पुराने काले मीटरों के स्थान पर नए और डिजिटल मीटरों को मुफ्त में ही बदले जाने की योजना बनाई थी। विभाग ने शुरूआत में मीटरों को बदलने का ठेका किसी निजी कंपनी को दिया था। ठेकेदार के कारिंदों पर उपभोक्ताओं से मीटरों को बदलने की एवज में पैसे ऐंठने की शिकायतें मिलना शुरू हो गई।
कई उपभोक्ताओं से तो मीटरों के पूरे पैसे भी वसूले जाने लगे। उपभोक्ताओं की तरफ से बार-बार शिकायत मिलने के बाद निगम ने ठेकेदारों का काम बंद करा दिया और खुद ही काम को पूरा कराने का बीड़ा उठाया। अब योजना शुरू होने के तीन साल बाद का पूरा नहीं हो पाया है।
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पुराने काले मीटरों को घर-घर जाकर बदलने की योजना थी। इससें उपभोक्ताओें को कुछ नहीं देना था, लेकिन काम पूरा नहीं हो सका। अब मीटरों में कई तरह की परेशानी आ रही है। ये मीटर कई बार जंप लगा जाते हैं। जंप लगते की उपभोक्ता का बिल कई गुणा तक आता है।
इसके अलावा पुराने मीटर धीरे भी चलते हैं। यह भी परेशानी का कारण बनता है। ग्रामीण क्षेत्रों में करीब ढाई लाख बिजली उपभोक्ता हैं। विभागीय आंकड़ों के अनुसार अब भी भारी संख्या में मीटराें के बदले जाने का इंतजार है। मीटर बदलने के नाम पर जब भी उपभोक्ताओं ने निगम अधिकारियों से बात की तो हर बार मीटर नहीं होने का ही बहाना सुनने को मिला।
क्षेत्र के गांव सिवाह निवासी रामबीर, बलविंद्र, हरिकिशन, अंकुश और राजेश ने बताया कि हमारे घरों में तो पुराने काले मीटर लगे हैं ही अगर गांव की बात की जाए तो करीब 35 प्रतिशत कनेक्शनों पर काले मीटर मिलेंगे। यह स्थिति जिलाभर मेें देखने को मिल जाती है।
वर्जन
निगम ने ज्यादातर काले मीटरों को बदल दिया है। फिर भी कहीं पर मीटर किसी कारण से बदल नहीं पाए हैं तो संबंधित उपभोक्ता अपनी जिम्मेदारी समझते हुए कार्यालय मेें सूचना दे सकता है।
एमएस दहिया, एसई, बिजली निगम, पानीपत सर्कल
उत्तर हरियाणा बिजली वितरण निगम ने उपभोक्ताओं की सुविधा के लिए वर्ष 2011 में घरों में लगे काले मीटरों को बदलने की योजना बनाई थी। काले मीटरों के स्थान पर नए डिजिटल मीटर लगाए जाने थे। तीन वर्ष बीत जाने के बाद भी आज भी अनेक घरों में नए मीटर नहीं लग पाए हैं।
निगम ने पुराने काले मीटरों के स्थान पर नए और डिजिटल मीटरों को मुफ्त में ही बदले जाने की योजना बनाई थी। विभाग ने शुरूआत में मीटरों को बदलने का ठेका किसी निजी कंपनी को दिया था। ठेकेदार के कारिंदों पर उपभोक्ताओं से मीटरों को बदलने की एवज में पैसे ऐंठने की शिकायतें मिलना शुरू हो गई।
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कई उपभोक्ताओं से तो मीटरों के पूरे पैसे भी वसूले जाने लगे। उपभोक्ताओं की तरफ से बार-बार शिकायत मिलने के बाद निगम ने ठेकेदारों का काम बंद करा दिया और खुद ही काम को पूरा कराने का बीड़ा उठाया। अब योजना शुरू होने के तीन साल बाद का पूरा नहीं हो पाया है।
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पुराने काले मीटरों को घर-घर जाकर बदलने की योजना थी। इससें उपभोक्ताओें को कुछ नहीं देना था, लेकिन काम पूरा नहीं हो सका। अब मीटरों में कई तरह की परेशानी आ रही है। ये मीटर कई बार जंप लगा जाते हैं। जंप लगते की उपभोक्ता का बिल कई गुणा तक आता है।
इसके अलावा पुराने मीटर धीरे भी चलते हैं। यह भी परेशानी का कारण बनता है। ग्रामीण क्षेत्रों में करीब ढाई लाख बिजली उपभोक्ता हैं। विभागीय आंकड़ों के अनुसार अब भी भारी संख्या में मीटराें के बदले जाने का इंतजार है। मीटर बदलने के नाम पर जब भी उपभोक्ताओं ने निगम अधिकारियों से बात की तो हर बार मीटर नहीं होने का ही बहाना सुनने को मिला।
क्षेत्र के गांव सिवाह निवासी रामबीर, बलविंद्र, हरिकिशन, अंकुश और राजेश ने बताया कि हमारे घरों में तो पुराने काले मीटर लगे हैं ही अगर गांव की बात की जाए तो करीब 35 प्रतिशत कनेक्शनों पर काले मीटर मिलेंगे। यह स्थिति जिलाभर मेें देखने को मिल जाती है।
वर्जन
निगम ने ज्यादातर काले मीटरों को बदल दिया है। फिर भी कहीं पर मीटर किसी कारण से बदल नहीं पाए हैं तो संबंधित उपभोक्ता अपनी जिम्मेदारी समझते हुए कार्यालय मेें सूचना दे सकता है।
एमएस दहिया, एसई, बिजली निगम, पानीपत सर्कल