{"_id":"831db742779d6cfb4e9d75ee987bde10","slug":"election-of-mayor-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"ड्रामा खत्म : शहर की सरकार संभालेंगे सुरेश वर्मा ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
ड्रामा खत्म : शहर की सरकार संभालेंगे सुरेश वर्मा
ब्ूयरो/अमर उजाला, पानीपत
Updated Tue, 23 Jun 2015 12:33 AM IST
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पिछले करीब तीन महीने से खाली पड़ी मेयर की कुर्सी को उसका हकदार मिल गया है। सोमवार को लघु सचिवालय में चले हाई वोल्टेज ड्रामे के बाद निगम का मेयर चुन लिया गया। मेयर की कुर्सी के लिए हुए चुनाव में वार्ड सात के पार्षद सुरेश वर्मा ने पार्टी प्रत्याशी दुष्यंत भट्ट को पांच वोट से हराकर मेयर पद का चुनाव जीत लिया है।
इसमें शहर के मौजूदा 23 पार्षदों में से 14 पार्षदों ने सुरेश वर्मा के पक्ष में और नौ पार्षदों से दुष्यंत भट्ट को पक्ष वोटिंग की है जबकि चुनाव से पहले 15 पार्षद पार्टी फैसले को ही समर्थन देने की बात कह रहे थे। सुरेश वर्मा की जीत और मेयर पद के लिए चेहरा पार्षद दुष्यंत भट्ट की हार पार्टी और बीजेपी की हार है। वहीं, पार्टी ने भी सुरेश वर्मा को अपना मेयर मानने से इनकार कर दिया है और पार्टी के साथ भितरघात करने वाले पार्षदों के खिलाफ कार्रवाई करने की बात कही है।
मेयर पद के चुनाव के लिए पिछले तीन माह से पार्षदों के बीच छिड़ी राजनैतिक जंग सोमवार को लघु सचिवालय में हुए मेयर पद चुनाव के साथ ही समाप्त हो गई। शहर के मौजूदा 23 पार्षदों में से 14 पार्षदों ने सुरेश वर्मा के पक्ष में वोटिंग की और नौ पार्षदों ने पार्टी प्रत्याशी दुष्यंत भट्ट के पक्ष वोट डाले। हालांकि सुरेश वर्मा चुनाव से पहले पार्टी फैसले का समर्थन करने की बात कह रहे थे। लेकिन पार्टी की ओर से दुष्यंत भट्ट को चुने जाने पर उन्होंने पार्टी फैसले को चुनौती देकर मेयर का चुनाव लड़ा।
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इसमें विरोधी खेमे के कांग्रेसी पार्षदों सहित पार्टी के कई पार्षदों ने भी उनके पक्ष में वोटिंग की। इससे उन्होंने दुष्यंत भट्ट को नौ के मुकाबले 14 वोट लेकर पांच वोट से हरा दिया। सुरेश वर्मा के जीतने की खबर सुनते ही उसके समर्थन पहुंचे लोगों की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। उन्होंने जमकर आतिशबाजी की और मेयर सुरेश वर्मा का स्वागत कर बधाई दी।
वर्मा के समर्थकों ने किया लघु सचिवालय में प्रदर्शन
मेयर चुनाव को लेकर लघु सचिवालय में सुबह से ही हलचल शुरू हो गई थी। सुबह 10 बजे से ही पार्षदों का आना शुरू हो गया था। बीजेपी ने पार्टी के चेहरे के रूप में वार्ड 24 के पार्षद दुष्यंत भट्ट का नाम मेयर पद के लिए तय किया था। भाजपा के कार्यकर्ता भी इसी मुगालते में रह गए कि सीएम ने मेयर का नाम तय किया है को पार्टी का ही मेयर बनेगा। पार्टी की प्लानिंग थी कि कांग्रेस के पार्षदों को भी इस फैसले पर कोई ऐतराज नहीं होगा और वे भी दुष्यंत भट्ट को समर्थन देंगे। लेकिन कांग्रेस से भाजपा में आए पार्षद सुरेश वर्मा शुरू से ही दुष्यंत भट्ट के खिलाफ थे। सोमवार को वर्मा के समर्थकों ने लघु सचिवालय में पूरी ईमानदारी से चुनाव होने के लिए प्रदर्शन किया। उन्होंने सुरेश वर्मा के समर्थन में नारे भी लगाए। दोपहर 12 बजे करीब चुनाव के लिए वोटिंग शुरू हुई। करीब 10 मिनट बाद वोटिंग का रिजल्ट आया और सुरेश वर्मा को विजयी घोषित कर दिया।
हाईकमान को दिया गलत मेसेज : भूपेंद्र सिंह
पार्टी फैसले का समर्थन करने की बात कह रहे पार्षदों ने हाईकमान तक गलत संदेश पहुंचाया और पार्टी प्रत्याशी के विरोध में वोटिंग की है। इसका नतीजा पार्टी प्रत्याशी की हार रहा। पूर्व मेयर भूपेंद्र सिंह ने भी पार्टी हाईकमान को पहले ही चेता दिया था कि अगर मेयर पद के लिए वोटिंग होती हैं तो सुरेश वर्मा के पक्ष में ज्यादा वोट पड़ सकते हैं। लेकिन पार्टी ने समय रहते कोई फैसला नहीं लिया।
दो विधायकों की मौजूदगी में वोटिंग
सोमवार को सुबह करीब साढे़ छह बजे सीएम से मीटिंग करने के बाद पार्षद और शहरी विधायक रोहिता रेवड़ी और ग्रामीण विधायक महिपाल ढांडा सीधे लघु सचिवालय पहुंचे। पार्टी के जिलाध्यक्ष गजेंद्र सलूजा भी मौजूद थे। यहां कांग्रेस के सभी पार्षद पहले से ही मौजूद थे और एक-एक कर पार्टी के पार्षद भी चुनाव स्थल पर पहुंचे। वार्ड नौ की पार्षद और विधायक रोहिता रेवड़ी को छोड़कर अन्य सभी 23 पार्षदों ने वोटिंग की।
शहर की राजनीति में पार्षदों से हारे सीएम
मेयर पद को लेकर पार्टी पार्षदों में किसी एक नाम पर सहमति न बनने पर सीएम ने स्वयं इस मामले में हस्तक्षेप कर पार्षदों को अपने निवास स्थान चंडीगढ़ बुलाया था। सीएम के बुलावे पर 15 पार्षद को बुलाया था। इसमें शनिवार शाम को छह पार्षद और रविवार को चार पार्षदों सहित कुल 10 पार्षद चंडीगढ़ पहुंचे थे। जहां सीएम और पार्टी नेताओं ने रविवार रात करीब एक बजे पार्षदों के साथ रायशुमारी करने के बाद मेयर पद के लिए दुष्यंत भट्ट के नाम पर मोहर लगाई थी। सीएम की बात को भी न मानते हुए पार्षदों ने सीएम के खिलाफ जाकर भट्ट के खिलाफ वोटिंग की।
हार के बाद मायूस होकर निकले भाजपा पार्षद
चुनाव में हार का मुंह देखने के बाद भाजपा पार्षद एक-एक करके दूसरे गेटों से लघु सचिवालय से निकल गए। इसमें पूर्व मेयर भूपेंद्र सिंह, अशोक कटारिया, अशोक नारंग के अलावा अन्य पार्षद थे।
तीन माह से खाली थी मेयर की कुर्सी
मेयर भूपेंद्र सिंह के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाए जाने के बाद से मेयर की कुर्सी खाली थी। इसके लिए पिछले तीन माह से पार्षदों के बीच जंग छिड़ी थी। मेयर पद को लेकर पार्षदों की किसी एक नाम पर सहमति नहीं बनी। इसके चलते 18 मई को मेयर का चुनाव भी स्थगित हुआ। इसके बाद भी लगातार पार्टी हाईकमान और पार्षदों के बीच कई दौर की वार्ता होने के बाद भी कोई परिणाम नहीं निकला।
पार्टी का मेयर नहीं, कैसे होगा विकास
शहर में पार्टी का मेयर न बनने का असर अब शहर के विकास पर भी पड़ेगा। शहर के विकास के लिए केंद्र और राज्य सरकार से मिलने वाली ग्रांट अब सरकार के फैसले पर निर्भर करेगी। इससे पहले रह चुके मेयर सरदार भूपेंद्र सिंह के दो साल भी पॉवर की तलाश में गुजरे हैं। अब सत्ता पार्टी के विरोधी खेमे से बने मेयर को कितनी पॉवर मिलेगी यह एक गंभीर मामला है।
वर्मा बीजेपी के मेयर नहीं : राजीव जैन
भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष राजीव जैन ने दुष्यंत भट्ट की हार के बाद कहा कि नगर निगम में कभी भी बीजेपी का पूर्ण बहुमत नहीं था। लोकतंत्र में लोगों की ओर से प्रतिनिधियों को चुनने का फैसला मान्य होता है। जब राजीव जैन से पूछा कि सुरेश वर्मा तो बीजेपी के पार्षद हैं तो क्या बीजेपी इन्हें मेयर मानती है। इस पर उन्होंने कहा कि वर्मा बीजेपी के मेयर नहीं हैं और न ही पार्टी उन्हें अपना मेयर मानती है। उन्होंने कहा कि जिन पार्षदों ने पार्टी के खिलाफ जाकर वोटिंग की है। उन पार्षदों पर पार्टी से रायशुमारी के बाद कार्रवाई की जाएगी।
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इसमें शहर के मौजूदा 23 पार्षदों में से 14 पार्षदों ने सुरेश वर्मा के पक्ष में और नौ पार्षदों से दुष्यंत भट्ट को पक्ष वोटिंग की है जबकि चुनाव से पहले 15 पार्षद पार्टी फैसले को ही समर्थन देने की बात कह रहे थे। सुरेश वर्मा की जीत और मेयर पद के लिए चेहरा पार्षद दुष्यंत भट्ट की हार पार्टी और बीजेपी की हार है। वहीं, पार्टी ने भी सुरेश वर्मा को अपना मेयर मानने से इनकार कर दिया है और पार्टी के साथ भितरघात करने वाले पार्षदों के खिलाफ कार्रवाई करने की बात कही है।
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मेयर पद के चुनाव के लिए पिछले तीन माह से पार्षदों के बीच छिड़ी राजनैतिक जंग सोमवार को लघु सचिवालय में हुए मेयर पद चुनाव के साथ ही समाप्त हो गई। शहर के मौजूदा 23 पार्षदों में से 14 पार्षदों ने सुरेश वर्मा के पक्ष में वोटिंग की और नौ पार्षदों ने पार्टी प्रत्याशी दुष्यंत भट्ट के पक्ष वोट डाले। हालांकि सुरेश वर्मा चुनाव से पहले पार्टी फैसले का समर्थन करने की बात कह रहे थे। लेकिन पार्टी की ओर से दुष्यंत भट्ट को चुने जाने पर उन्होंने पार्टी फैसले को चुनौती देकर मेयर का चुनाव लड़ा।
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इसमें विरोधी खेमे के कांग्रेसी पार्षदों सहित पार्टी के कई पार्षदों ने भी उनके पक्ष में वोटिंग की। इससे उन्होंने दुष्यंत भट्ट को नौ के मुकाबले 14 वोट लेकर पांच वोट से हरा दिया। सुरेश वर्मा के जीतने की खबर सुनते ही उसके समर्थन पहुंचे लोगों की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। उन्होंने जमकर आतिशबाजी की और मेयर सुरेश वर्मा का स्वागत कर बधाई दी।
वर्मा के समर्थकों ने किया लघु सचिवालय में प्रदर्शन
मेयर चुनाव को लेकर लघु सचिवालय में सुबह से ही हलचल शुरू हो गई थी। सुबह 10 बजे से ही पार्षदों का आना शुरू हो गया था। बीजेपी ने पार्टी के चेहरे के रूप में वार्ड 24 के पार्षद दुष्यंत भट्ट का नाम मेयर पद के लिए तय किया था। भाजपा के कार्यकर्ता भी इसी मुगालते में रह गए कि सीएम ने मेयर का नाम तय किया है को पार्टी का ही मेयर बनेगा। पार्टी की प्लानिंग थी कि कांग्रेस के पार्षदों को भी इस फैसले पर कोई ऐतराज नहीं होगा और वे भी दुष्यंत भट्ट को समर्थन देंगे। लेकिन कांग्रेस से भाजपा में आए पार्षद सुरेश वर्मा शुरू से ही दुष्यंत भट्ट के खिलाफ थे। सोमवार को वर्मा के समर्थकों ने लघु सचिवालय में पूरी ईमानदारी से चुनाव होने के लिए प्रदर्शन किया। उन्होंने सुरेश वर्मा के समर्थन में नारे भी लगाए। दोपहर 12 बजे करीब चुनाव के लिए वोटिंग शुरू हुई। करीब 10 मिनट बाद वोटिंग का रिजल्ट आया और सुरेश वर्मा को विजयी घोषित कर दिया।
हाईकमान को दिया गलत मेसेज : भूपेंद्र सिंह
पार्टी फैसले का समर्थन करने की बात कह रहे पार्षदों ने हाईकमान तक गलत संदेश पहुंचाया और पार्टी प्रत्याशी के विरोध में वोटिंग की है। इसका नतीजा पार्टी प्रत्याशी की हार रहा। पूर्व मेयर भूपेंद्र सिंह ने भी पार्टी हाईकमान को पहले ही चेता दिया था कि अगर मेयर पद के लिए वोटिंग होती हैं तो सुरेश वर्मा के पक्ष में ज्यादा वोट पड़ सकते हैं। लेकिन पार्टी ने समय रहते कोई फैसला नहीं लिया।
दो विधायकों की मौजूदगी में वोटिंग
सोमवार को सुबह करीब साढे़ छह बजे सीएम से मीटिंग करने के बाद पार्षद और शहरी विधायक रोहिता रेवड़ी और ग्रामीण विधायक महिपाल ढांडा सीधे लघु सचिवालय पहुंचे। पार्टी के जिलाध्यक्ष गजेंद्र सलूजा भी मौजूद थे। यहां कांग्रेस के सभी पार्षद पहले से ही मौजूद थे और एक-एक कर पार्टी के पार्षद भी चुनाव स्थल पर पहुंचे। वार्ड नौ की पार्षद और विधायक रोहिता रेवड़ी को छोड़कर अन्य सभी 23 पार्षदों ने वोटिंग की।
शहर की राजनीति में पार्षदों से हारे सीएम
मेयर पद को लेकर पार्टी पार्षदों में किसी एक नाम पर सहमति न बनने पर सीएम ने स्वयं इस मामले में हस्तक्षेप कर पार्षदों को अपने निवास स्थान चंडीगढ़ बुलाया था। सीएम के बुलावे पर 15 पार्षद को बुलाया था। इसमें शनिवार शाम को छह पार्षद और रविवार को चार पार्षदों सहित कुल 10 पार्षद चंडीगढ़ पहुंचे थे। जहां सीएम और पार्टी नेताओं ने रविवार रात करीब एक बजे पार्षदों के साथ रायशुमारी करने के बाद मेयर पद के लिए दुष्यंत भट्ट के नाम पर मोहर लगाई थी। सीएम की बात को भी न मानते हुए पार्षदों ने सीएम के खिलाफ जाकर भट्ट के खिलाफ वोटिंग की।
हार के बाद मायूस होकर निकले भाजपा पार्षद
चुनाव में हार का मुंह देखने के बाद भाजपा पार्षद एक-एक करके दूसरे गेटों से लघु सचिवालय से निकल गए। इसमें पूर्व मेयर भूपेंद्र सिंह, अशोक कटारिया, अशोक नारंग के अलावा अन्य पार्षद थे।
तीन माह से खाली थी मेयर की कुर्सी
मेयर भूपेंद्र सिंह के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाए जाने के बाद से मेयर की कुर्सी खाली थी। इसके लिए पिछले तीन माह से पार्षदों के बीच जंग छिड़ी थी। मेयर पद को लेकर पार्षदों की किसी एक नाम पर सहमति नहीं बनी। इसके चलते 18 मई को मेयर का चुनाव भी स्थगित हुआ। इसके बाद भी लगातार पार्टी हाईकमान और पार्षदों के बीच कई दौर की वार्ता होने के बाद भी कोई परिणाम नहीं निकला।
पार्टी का मेयर नहीं, कैसे होगा विकास
शहर में पार्टी का मेयर न बनने का असर अब शहर के विकास पर भी पड़ेगा। शहर के विकास के लिए केंद्र और राज्य सरकार से मिलने वाली ग्रांट अब सरकार के फैसले पर निर्भर करेगी। इससे पहले रह चुके मेयर सरदार भूपेंद्र सिंह के दो साल भी पॉवर की तलाश में गुजरे हैं। अब सत्ता पार्टी के विरोधी खेमे से बने मेयर को कितनी पॉवर मिलेगी यह एक गंभीर मामला है।
वर्मा बीजेपी के मेयर नहीं : राजीव जैन
भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष राजीव जैन ने दुष्यंत भट्ट की हार के बाद कहा कि नगर निगम में कभी भी बीजेपी का पूर्ण बहुमत नहीं था। लोकतंत्र में लोगों की ओर से प्रतिनिधियों को चुनने का फैसला मान्य होता है। जब राजीव जैन से पूछा कि सुरेश वर्मा तो बीजेपी के पार्षद हैं तो क्या बीजेपी इन्हें मेयर मानती है। इस पर उन्होंने कहा कि वर्मा बीजेपी के मेयर नहीं हैं और न ही पार्टी उन्हें अपना मेयर मानती है। उन्होंने कहा कि जिन पार्षदों ने पार्टी के खिलाफ जाकर वोटिंग की है। उन पार्षदों पर पार्टी से रायशुमारी के बाद कार्रवाई की जाएगी।