{"_id":"69a5de870b342eb43709af05","slug":"dharamnagari-was-painted-in-the-colors-of-holi-women-performed-puja-in-the-morning-panipat-news-c-45-1-kur1009-151021-2026-03-03","type":"story","status":"publish","title_hn":"Panipat News: होली के रंग में रंगी धर्मनगरी, सुबह के समय महिलाओं ने की पूजा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Panipat News: होली के रंग में रंगी धर्मनगरी, सुबह के समय महिलाओं ने की पूजा
विज्ञापन
कुरुक्षेत्र। क्षेत्र में रंगोत्सव को धूमधाम से मनाने को लेकर चहल-पहल सोमवार सुबह ही शुरू हो गई। शहर की गली, मोहल्ले, पार्क सहित विभिन्न सार्वजनिक स्थानों पर बच्चे एकजुट हुए और रंग-गुलाल लगाकर खूब मस्ती की।
यही स्थिति स्कूल, कॉलेज, विश्वविद्यालय और अन्य शिक्षण संस्थानों के आसपास भी रही। कई जगहों पर शिक्षण परिसर में ही विद्यार्थियों ने होली मनाई। उनके साथ शिक्षक, गैर शिक्षक भी शामिल रहे। सुरक्षा व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए पुलिस कर्मी मुस्तैद दिखे। प्रभारियों के नेतृत्व में सुरक्षा कर्मियों ने जगह-जगह नाके लगाकर असामाजिक एवं शरारती तत्वों पर नजर रखी।
ग्रामीण तबके से संबंध रखने वाली महिलाओं ने शहरी मोहल्लों में होलिका दहन से पहले पूजा-अर्चना की। गांवों में पराली-लकड़ी को एकत्रित करके दहन के लिए तैयारी की गई। इस दौरान गृहिणियों ने बच्चों के साथ होलिका पूजन में हिस्सा लिया। उन्होंने भावी पीढ़ी को पुरातन संस्कारों से जोड़कर बुराई पर अच्छाई की विजय का संदेश दिया। शहर के महादेव मोहल्ला, दर्रा खेड़ा, झांसा रोड बस्ती, गोशाला क्षेत्र सहित सेक्टरों के आसपास भी पूजन किया गया।
विज्ञापन
थानेसर, पिहोवा, शाहाबाद, लाडवा में विधिविधान के साथ धोक-पूजा चलती रही। देर सायं को विभिन्न स्थानों पर हाेलिका दहन की प्रक्रिया शुरू हुई। पिपली खंड के मथाना, सिरसमा, किशनपुरा, बीड़ मथाना, दौलतपुर, कड़ामी सहित विभिन्न गांवों में दोपहर बाद से ही होलिका पूजन को लेकर तैयारियां शुरू हो गई थी। इसके बाद महिलाओं के पहुंचने और हल्दी एवं अन्य सामग्री के साथ धोक मारने का सिलसिला चलता रहा।
शाम तक बड़ी संख्या में गृहिणियों के साथ बच्चे भी जुटने लगे। गांव के बड़े-बुजुर्गाें तथा युवाओं ने भी होलिका दहन के प्रति रुचि दिखाई। मथाना के जसविंदर लीलू ने बताया कि यह पर्व गांव में आस्थापूर्वक मनाया गया। डाॅ राजेंद्र काका को पिछले कुछ वर्षों से दहन की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
सभी समाज के लोग पूजन करने तथा होलिका दहन के लिए पहुंचते हैं। यह मौका सामाजिक एकता और भाईचारे काे भी बढ़ावा देता है।
विज्ञापन
यही स्थिति स्कूल, कॉलेज, विश्वविद्यालय और अन्य शिक्षण संस्थानों के आसपास भी रही। कई जगहों पर शिक्षण परिसर में ही विद्यार्थियों ने होली मनाई। उनके साथ शिक्षक, गैर शिक्षक भी शामिल रहे। सुरक्षा व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए पुलिस कर्मी मुस्तैद दिखे। प्रभारियों के नेतृत्व में सुरक्षा कर्मियों ने जगह-जगह नाके लगाकर असामाजिक एवं शरारती तत्वों पर नजर रखी।
विज्ञापन
ग्रामीण तबके से संबंध रखने वाली महिलाओं ने शहरी मोहल्लों में होलिका दहन से पहले पूजा-अर्चना की। गांवों में पराली-लकड़ी को एकत्रित करके दहन के लिए तैयारी की गई। इस दौरान गृहिणियों ने बच्चों के साथ होलिका पूजन में हिस्सा लिया। उन्होंने भावी पीढ़ी को पुरातन संस्कारों से जोड़कर बुराई पर अच्छाई की विजय का संदेश दिया। शहर के महादेव मोहल्ला, दर्रा खेड़ा, झांसा रोड बस्ती, गोशाला क्षेत्र सहित सेक्टरों के आसपास भी पूजन किया गया।
विज्ञापन
थानेसर, पिहोवा, शाहाबाद, लाडवा में विधिविधान के साथ धोक-पूजा चलती रही। देर सायं को विभिन्न स्थानों पर हाेलिका दहन की प्रक्रिया शुरू हुई। पिपली खंड के मथाना, सिरसमा, किशनपुरा, बीड़ मथाना, दौलतपुर, कड़ामी सहित विभिन्न गांवों में दोपहर बाद से ही होलिका पूजन को लेकर तैयारियां शुरू हो गई थी। इसके बाद महिलाओं के पहुंचने और हल्दी एवं अन्य सामग्री के साथ धोक मारने का सिलसिला चलता रहा।
शाम तक बड़ी संख्या में गृहिणियों के साथ बच्चे भी जुटने लगे। गांव के बड़े-बुजुर्गाें तथा युवाओं ने भी होलिका दहन के प्रति रुचि दिखाई। मथाना के जसविंदर लीलू ने बताया कि यह पर्व गांव में आस्थापूर्वक मनाया गया। डाॅ राजेंद्र काका को पिछले कुछ वर्षों से दहन की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
सभी समाज के लोग पूजन करने तथा होलिका दहन के लिए पहुंचते हैं। यह मौका सामाजिक एकता और भाईचारे काे भी बढ़ावा देता है।