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नोटबंदी के एक माह बाद भी लोगों की हालात में नहीं हुआ कोई सुधार
ब्यूरो/अमर उजाला/ पानीपत
Updated Sat, 10 Dec 2016 12:24 AM IST
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पानीपत
- फोटो : bureau
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नोटबंदी के एक माह बाद भी आम लोगों की हालातों में कोई सुधार नहीं आ रहा है। अब तीन दिन तक बैंक बंद रहने के कारण लोगों को अधिक परेशानियों का सामना करना पड़ेगा।
थर्मल पॉवर स्टेशन में स्थित स्टेट बैंक ऑफ पटियाला बैंक के अधिकारियों पर थर्मल कर्मियों ने भेदभाव का आरोप लगाया है।
थर्मलकर्मी अवतार सिंह, वीर सिंह, अतुल कुमार, देवेश, अब्बुल हसन, जोगेंद्र सिंह व कमलदीप ने बताया कि बैंक में अधिकारी व ठेकेदार चेक भर दे जाते हैं। बाद में बिना लाइन में लगे पैसे ले जाते हैं
जबकि अन्य लोग घंटों भर तक लाइन में लगने के बाद भी खाली हाथ वापस जा रहे हैं। अब अधिकतर कर्मचारियों के पास घर चलाने के लिए भी पैसे नहीं हैं। थर्मल कर्मचारियों ने सरकार से मांग की है
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कि इस समय लोगों को पैसे की किल्लत का सामना करना पड रहा है। ऐसेे में बैंकों की छुट्टियां नहीं होनी चाहिए। शुक्रवार को थर्मल कर्मचारियों ने बैंक में किसी अन्य बाहरी आदमी को अंदर नहीं जाने दिया।
वहीं सोदापुर में सुबह करीब आधे घंटे में बैंक का कैश खत्म हो गया। लोग चार घंटों से लाइनों में खड़े रहे। लेकिन बैंक खुलने के आधे घंटे में कैश खत्म हो गया। जिस कारण लोगों को अपने घरों की मायूस होकर लौटना पड़ा।
इस बारे में स्टेट बैंक ऑफ पटियाला थर्मल के मैनेजर सुनील कुमार सिंह ने बताया कि भेदभाव के आरोप गलत है। जितना पैसा आता उतने का ही भुगतान कर दिया जाता है।
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थर्मल पॉवर स्टेशन में स्थित स्टेट बैंक ऑफ पटियाला बैंक के अधिकारियों पर थर्मल कर्मियों ने भेदभाव का आरोप लगाया है।
थर्मलकर्मी अवतार सिंह, वीर सिंह, अतुल कुमार, देवेश, अब्बुल हसन, जोगेंद्र सिंह व कमलदीप ने बताया कि बैंक में अधिकारी व ठेकेदार चेक भर दे जाते हैं। बाद में बिना लाइन में लगे पैसे ले जाते हैं
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जबकि अन्य लोग घंटों भर तक लाइन में लगने के बाद भी खाली हाथ वापस जा रहे हैं। अब अधिकतर कर्मचारियों के पास घर चलाने के लिए भी पैसे नहीं हैं। थर्मल कर्मचारियों ने सरकार से मांग की है
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कि इस समय लोगों को पैसे की किल्लत का सामना करना पड रहा है। ऐसेे में बैंकों की छुट्टियां नहीं होनी चाहिए। शुक्रवार को थर्मल कर्मचारियों ने बैंक में किसी अन्य बाहरी आदमी को अंदर नहीं जाने दिया।
वहीं सोदापुर में सुबह करीब आधे घंटे में बैंक का कैश खत्म हो गया। लोग चार घंटों से लाइनों में खड़े रहे। लेकिन बैंक खुलने के आधे घंटे में कैश खत्म हो गया। जिस कारण लोगों को अपने घरों की मायूस होकर लौटना पड़ा।
इस बारे में स्टेट बैंक ऑफ पटियाला थर्मल के मैनेजर सुनील कुमार सिंह ने बताया कि भेदभाव के आरोप गलत है। जितना पैसा आता उतने का ही भुगतान कर दिया जाता है।