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Panipat News: उझा गांव की बहू रेशमा ने राष्ट्रीय स्तर पर किया नाम रोशन

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 12 Jul 2024 07:13 AM IST
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Daughter-in-law Reshma of Ujha village made her name famous at the national level
पानीपत। उझा गांव की बहू रेशमा कश्यप ने पावर लिफ्टिंग में राष्ट्रीय स्तर पर एक बार फिर नाम चमकाया है। रेशमा ने इस बार ऑल इंडिया इंटर रेलवे पावर लिफ्टिंग चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीता है। उन्होंने इस चैंपियनशिप में 542.5 किलोग्राम वजन उठाया है। चैंपियनशिप पांच से नौ जुलाई को महालक्ष्मी स्पोर्ट्स कांप्लेक्स मुंबई में आयोजित की गई थी। जिसमें रेशमा ने 69 किग्रा. भार वर्ग में भाग लिया था। उनके इस प्रदर्शन पर ससुराल के साथ मायका में भी खुशी का माहौल बना हुआ है।
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रेशमा कश्यप ने बताया कि वह दक्षिण-पूर्व केंद्रीय रेलवे की रायपुर डिविजन में छत्तीसगढ़ के दुर्ग रेलवे स्टेशन पर बतौर टीसी तैनात हैं। उन्होंने मार्च 2023 में रेलवे में ज्वाइन किया है और यह उनका दूसरा पदक है। उन्होंने बताया कि मुंबई के महालक्ष्मी स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स में पांच से नौ जुलाई को 20वीं पुरुष और 14वीं ऑल इंडिया इंटर रेलवे पावरलिफ्टिंग चैंपियनशिप का आयोजन किया गया था। उन्होंने इसमें 69 किलोग्राम भार वर्ग में भाग लिया था। उन्होंने अपने वर्ग में 542.5 किलोग्राम वजन उठाकर स्वर्ण पदक जीता है। उन्होंने बताया कि इससे पहले उत्तराखंड में आयोजित ऑल इंडिया रेलवे पावर लिफ्टिंग चैंपियनशिप में 2520 किलोग्राम वजन उठाकर कांस्य पदक जीता था। उन्होंने बताया कि वह हर रोज चार घंटे अभ्यास करती हैं। राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता को गंभीरता से लेती हैं। इस बार स्वर्ण पदक की उम्मीद थी।
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शादी के सात दिन बाद ही शुरू कर दिया अभ्यास
रेशमा कश्यप ने बताया कि वह मूल रूप से सोनीपत के गन्नौर की रहने वाली हैं। उसने सरकारी स्कूल में अपनी पढ़ाई की है। इसके साथ वेट लिफ्टिंग का अभ्यास शुरू कर दिया था। उसने बाद में इसको छोड़कर पावर लिफ्टिंग का अभ्यास शुरू कर दिया था। उसकी पिछले साल जनवरी में उझा निवासी मुकेश के साथ शादी हुई। मुकेश एक निजी अस्पताल में फार्मासिस्ट हैं। उनको ससुराल में पावर लिफ्टिंग में आगे बढ़ने का पूरा सहयोग मिला। उन्होंने शादी के सात दिन बाद ही अभ्यास शुरू कर दिया था। वह सुबह घर का पूरा काम कर गन्नौर अभ्यास करने जाती थीं। वह राष्ट्रीय स्तर पर सात और राज्य स्तर पर आठ स्वर्ण पदक जीत चुकी हैं। मुकेश ने बताया कि रेशमा अपने अभ्यास को गंभीरता के साथ लेती हैं। वह ड्यूटी के साथ हर रोज तीन से चार घंटे अभ्यास करती हैं।
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