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खिलाड़ियों ने एक साल तक मेहनत कर खाली बंजर मैदान को बना दिया स्टेडियम, अब कर रहे खेल और फौज की तैयारी
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समालखा ब्लॉक के गांव जौरासी और गढ़ी केवल के बीच में बनाया गया स्टेडियम खाली बंजर मैदान में तब्दील हो गया। इस स्टेडियम की खस्ता हालात पर गांव की पंचायत ने भी कुछ नहीं किया। जिसकी स्थिति सुधारने का जिम्मा दोनों गांवों के युवा खिलाड़ियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने उठाया। युवाओं ने एक साल दिन-रात मेहनत करते हुए पूरे मैदान में खूबसूरत तरीके से घास व मैदान के चारों ओर लहराते हुए छोटे छोटे पौधे लगाए। स्टेडियम के मैदान को समतल कराकर खेलने और प्रैक्टिस करने लायक बनाया। युवाओं और खिलाड़ियों ने एक समिति बनाकर पैसे इकट्ठे किए और बंजर मैदान को खूबसूरत स्टेडियम के रूप में बदल दिया।
स्टेडियम में रोज मेहनत करने आने वाले खिलाड़ियों ने पिछले एक साल के दौरान खेल मैदान के अंदर अपने खर्चे से लगभग 30 पौधे लगाए हैं। जो अभी अच्छी दशा में हैं। दूसरी ओर खिलाड़ियों ने वीरवार से पर्यावरण को बचाने की एक नई मुहिम शुरू की है। मुहिम के तहत हर युवा अपने जन्मदिन के अवसर पर एक पौधा अवश्य लगाएगा। जब तक पौधा बड़ा नहीं हो जाता, उसको पानी और खाद देने की जिम्मेदारी भी उसी खिलाड़ी या युवा की रहेगी। गांव के प्रो. दिनेश गाहल्याण, मनोज, पवन, संदीप, दीपक फौजी, तकदीर, विकास, प्रवीण सहित अन्य ग्रामीण युवाओं को प्रोत्साहित करते रहते हैं।
हर महीने 500 रुपये का योगदान करते हैं युवा और खिलाड़ी
एडवोकेट जसबीर सिंह, पहलवान नरेंद्र व बालू ने बताया कि एक साल पहले यह केवल एक बंजर मैदान था। यह खेल का मैदान तो लगता ही नहीं था। अब पिछले एक वर्ष के अंदर जौरासी व गढ़ी केवल के युवाओं ने इस मैदान को एक उच्च स्तर का खेल मैदान बनाने का बीड़ा उठाया है। दोनों गांवों के कुछ ऐसे युवा सामने आए जो नौकरी पेशा हैं। इन युवाओं ने एक समिति बनाई और हर सदस्य खेल मैदान की देखरेख के लिए प्रतिमाह 500 रुपये की राशि जमा करवाता है।
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अब गांव में ही क्रिकेट व वॉलीबाल का अभ्यास कर रहे खिलाड़ी
इस स्टेडियम में खिलाड़ियों ने शानदार क्रिकेट का मैदान तैयार कर लिया है। पूरे मैदान में खूबसूरत घास व चारों ओर छोटे छोटे पौधे लहरा रहे हैं। यहां वॉलीबाल का शानदार कोर्ट है, जिसमें रात को खेलने के लिए दोनों तरफ लाइट का प्रबंध भी है। यही नहीं इन युवाओं ने खुद पैसे इकट्ठे करके घास काटने की इलेक्ट्रॉनिक मशीन और क्रिकेट की पिच को समतल करने के लिए रोलर की व्यवस्था भी की है। हालांकि अभी भी कुछ छोटी-छोटी समस्याएं इन युवाओं के सामने हैं।
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स्टेडियम में रोज मेहनत करने आने वाले खिलाड़ियों ने पिछले एक साल के दौरान खेल मैदान के अंदर अपने खर्चे से लगभग 30 पौधे लगाए हैं। जो अभी अच्छी दशा में हैं। दूसरी ओर खिलाड़ियों ने वीरवार से पर्यावरण को बचाने की एक नई मुहिम शुरू की है। मुहिम के तहत हर युवा अपने जन्मदिन के अवसर पर एक पौधा अवश्य लगाएगा। जब तक पौधा बड़ा नहीं हो जाता, उसको पानी और खाद देने की जिम्मेदारी भी उसी खिलाड़ी या युवा की रहेगी। गांव के प्रो. दिनेश गाहल्याण, मनोज, पवन, संदीप, दीपक फौजी, तकदीर, विकास, प्रवीण सहित अन्य ग्रामीण युवाओं को प्रोत्साहित करते रहते हैं।
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हर महीने 500 रुपये का योगदान करते हैं युवा और खिलाड़ी
एडवोकेट जसबीर सिंह, पहलवान नरेंद्र व बालू ने बताया कि एक साल पहले यह केवल एक बंजर मैदान था। यह खेल का मैदान तो लगता ही नहीं था। अब पिछले एक वर्ष के अंदर जौरासी व गढ़ी केवल के युवाओं ने इस मैदान को एक उच्च स्तर का खेल मैदान बनाने का बीड़ा उठाया है। दोनों गांवों के कुछ ऐसे युवा सामने आए जो नौकरी पेशा हैं। इन युवाओं ने एक समिति बनाई और हर सदस्य खेल मैदान की देखरेख के लिए प्रतिमाह 500 रुपये की राशि जमा करवाता है।
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अब गांव में ही क्रिकेट व वॉलीबाल का अभ्यास कर रहे खिलाड़ी
इस स्टेडियम में खिलाड़ियों ने शानदार क्रिकेट का मैदान तैयार कर लिया है। पूरे मैदान में खूबसूरत घास व चारों ओर छोटे छोटे पौधे लहरा रहे हैं। यहां वॉलीबाल का शानदार कोर्ट है, जिसमें रात को खेलने के लिए दोनों तरफ लाइट का प्रबंध भी है। यही नहीं इन युवाओं ने खुद पैसे इकट्ठे करके घास काटने की इलेक्ट्रॉनिक मशीन और क्रिकेट की पिच को समतल करने के लिए रोलर की व्यवस्था भी की है। हालांकि अभी भी कुछ छोटी-छोटी समस्याएं इन युवाओं के सामने हैं।