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सरकारी स्कूलों की बिल्डिंग खंडहर, अधिकारियों के दावे फाइलों तक सिमटे
अमर उजाला ब्यूरो, पानीपत।
Updated Tue, 18 Apr 2017 11:45 PM IST
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पानीपत
- फोटो : पानीपत
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जगमहेंद्र सरोहा
पानीपत। सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों के बैठने के लिए न तो डुअल डेस्क हैं और न ही टाट-पट्टी। ऐसे में विद्यार्थियों को जमीन पर बैठकर पढ़ाई करनी पड़ रही है। इसके बाद भी विद्यार्थियों को टीचरों की कमी खलती है। बच्चों को सुरक्षित छत उपलब्ध नहीं है। अधिकारी सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों के लिए सुविधा देने दावे करते हैं, लेकिन ये दावे कागजों तक सीमित हैं। बता दें कि चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण सचिव मोहित अग्रवाल ने जिले के गांव भंडारी स्थित राजकीय सीसे स्कूल का निरीक्षण किया था। उन्हें यहां पर बच्चे कंडम भवन में पढ़ते मिले थे।
अमर उजाला माई सिटी टीम ने मंगलवार को शहर समेत जिले के कई सरकारी स्कूलों का दौरा कर व्यवस्थाओं व सुविधाओं को देखा। शहर अंदर सरकारी स्कूलों की स्थिति ही सबसे ज्यादा चिंताजनक मिली।
ये दो सरकारी स्कूल बताते हैं जिले की तस्वीर
मामला नंबर एक
राजकीय स्कूलों के मॉडल कहलाने वाले राजकीय मॉडल संस्कृति स्कूल का दौरा किया। यहां पर बच्चों के लिए कमरे तो थे, लेकिन वे जमीन पर बैठकर पढ़ रहे थे। स्कूल में दाखिला पूरे होने के बाद बच्चों की संख्या बढ़ते ही कमरे भी कम पड़ सकते हैं। ऐसे में बच्चों को बाहर पेड़ के नीचे बैठकर पढ़ने को मजबूर होना पड़ता है। स्कूल के एक तरफ कई कमरे सालों से निर्माणाधीन हैं। इनके निर्माण की तरफ अधिकारियों का कोई ध्यान नहीं है।
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मामला नंबर-2
राजकीय कन्या सीसे स्कूल पॉश एरिया मॉडल टाउन बीचोंबीच स्थित है। आसपास की दर्जनों कॉलोनियों के अलावा कई गांवों की लड़कियां भी यहां पढ़ने आती हैं। स्कूल की स्थिति चिंताजनक है। स्कूल में बच्चे जमीन पर बैठकर पढ़ने को मजबूर हैं। यहां पर भी कई कमरे सालों से निर्माणाधीन हैं।
स्कूलों में टीचर तक नहीं
सरकारी स्कूलों में पर्याप्त टीचर नहीं हैं। सबसे ज्यादा चिंताजनक स्थिति प्राथमिक स्कूलों की है। अधिकारियों के अनुसार जिले में 421 सरकारी स्कूल हैं। इनमें 244 प्राइमरी स्कूल हैं। विभाग के अनुसार जिले में 65481 विद्यार्थी हैं। इनमें प्राइमरी में 30,852, मिडिल में 19,925, हाईस्कूल में 11,534 और सीसे स्कूल में 3170 विद्यार्थी हैं। विभाग के अनुसार प्राइमरी स्कूलों में 30,852 बच्चों पर 1500 टीचर होने चाहिए, लेकिन जिले में 900 रेग्युलर और 350 गेस्ट टीचर हैं।
यूनियन बोली, लगातार कर रहे हैं मांग
हरियाणा प्राथमिक शिक्षक संघ के जिला संस्थापक सुरेंद्र राठी ने बताया कि स्कूलों में टीचरों की कमी है। कई जगह विद्यार्थियों को भी बेहतर सुविधा नहीं मिल रही। यूनियन समय-समय पर इस मांग को उठा चुकी है। इसके बाद भी इन पर ध्यान नहीं दिया जा रहा।
सरकारी स्कूलों में सुविधा बेहतर करने का लगातार प्रयास किया जा रहा है। कंडम स्कूलों के भवनों के एस्टीमेट निदेशालय भेजे गए हैं। स्कूलों से टाट-पट्टी या डुअल डेस्क की कोई मांग नहीं आई है। इस तरह की कोई मांग आती है तो निदेशालय से मंजूर कराया जाएगा। विद्यार्थियों को स्कूलों में किसी तरह की परेशानी नहीं आने दी जाएगी।
उदय प्रताप सिंह, डीईओ, पानीपत।
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पानीपत। सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों के बैठने के लिए न तो डुअल डेस्क हैं और न ही टाट-पट्टी। ऐसे में विद्यार्थियों को जमीन पर बैठकर पढ़ाई करनी पड़ रही है। इसके बाद भी विद्यार्थियों को टीचरों की कमी खलती है। बच्चों को सुरक्षित छत उपलब्ध नहीं है। अधिकारी सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों के लिए सुविधा देने दावे करते हैं, लेकिन ये दावे कागजों तक सीमित हैं। बता दें कि चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण सचिव मोहित अग्रवाल ने जिले के गांव भंडारी स्थित राजकीय सीसे स्कूल का निरीक्षण किया था। उन्हें यहां पर बच्चे कंडम भवन में पढ़ते मिले थे।
अमर उजाला माई सिटी टीम ने मंगलवार को शहर समेत जिले के कई सरकारी स्कूलों का दौरा कर व्यवस्थाओं व सुविधाओं को देखा। शहर अंदर सरकारी स्कूलों की स्थिति ही सबसे ज्यादा चिंताजनक मिली।
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ये दो सरकारी स्कूल बताते हैं जिले की तस्वीर
मामला नंबर एक
राजकीय स्कूलों के मॉडल कहलाने वाले राजकीय मॉडल संस्कृति स्कूल का दौरा किया। यहां पर बच्चों के लिए कमरे तो थे, लेकिन वे जमीन पर बैठकर पढ़ रहे थे। स्कूल में दाखिला पूरे होने के बाद बच्चों की संख्या बढ़ते ही कमरे भी कम पड़ सकते हैं। ऐसे में बच्चों को बाहर पेड़ के नीचे बैठकर पढ़ने को मजबूर होना पड़ता है। स्कूल के एक तरफ कई कमरे सालों से निर्माणाधीन हैं। इनके निर्माण की तरफ अधिकारियों का कोई ध्यान नहीं है।
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मामला नंबर-2
राजकीय कन्या सीसे स्कूल पॉश एरिया मॉडल टाउन बीचोंबीच स्थित है। आसपास की दर्जनों कॉलोनियों के अलावा कई गांवों की लड़कियां भी यहां पढ़ने आती हैं। स्कूल की स्थिति चिंताजनक है। स्कूल में बच्चे जमीन पर बैठकर पढ़ने को मजबूर हैं। यहां पर भी कई कमरे सालों से निर्माणाधीन हैं।
स्कूलों में टीचर तक नहीं
सरकारी स्कूलों में पर्याप्त टीचर नहीं हैं। सबसे ज्यादा चिंताजनक स्थिति प्राथमिक स्कूलों की है। अधिकारियों के अनुसार जिले में 421 सरकारी स्कूल हैं। इनमें 244 प्राइमरी स्कूल हैं। विभाग के अनुसार जिले में 65481 विद्यार्थी हैं। इनमें प्राइमरी में 30,852, मिडिल में 19,925, हाईस्कूल में 11,534 और सीसे स्कूल में 3170 विद्यार्थी हैं। विभाग के अनुसार प्राइमरी स्कूलों में 30,852 बच्चों पर 1500 टीचर होने चाहिए, लेकिन जिले में 900 रेग्युलर और 350 गेस्ट टीचर हैं।
यूनियन बोली, लगातार कर रहे हैं मांग
हरियाणा प्राथमिक शिक्षक संघ के जिला संस्थापक सुरेंद्र राठी ने बताया कि स्कूलों में टीचरों की कमी है। कई जगह विद्यार्थियों को भी बेहतर सुविधा नहीं मिल रही। यूनियन समय-समय पर इस मांग को उठा चुकी है। इसके बाद भी इन पर ध्यान नहीं दिया जा रहा।
सरकारी स्कूलों में सुविधा बेहतर करने का लगातार प्रयास किया जा रहा है। कंडम स्कूलों के भवनों के एस्टीमेट निदेशालय भेजे गए हैं। स्कूलों से टाट-पट्टी या डुअल डेस्क की कोई मांग नहीं आई है। इस तरह की कोई मांग आती है तो निदेशालय से मंजूर कराया जाएगा। विद्यार्थियों को स्कूलों में किसी तरह की परेशानी नहीं आने दी जाएगी।
उदय प्रताप सिंह, डीईओ, पानीपत।