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सरकार ने निजी स्कूलों का नहीं दिया

Mon, 18 Feb 2019 12:46 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Mon, 18 Feb 2019 12:46 AM IST
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सरकार ने निजी स्कूलों का नहीं दिया
सरकार ने निजी स्कूलों का नहीं दिया 8 करोड़ बकाया, निजी स्कूलों का 134ए के तहत दाखिला देने से इंकार
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पानीपत। जिले के निजी स्कूलों में कई वर्षों से नियम 134ए के तहत पढ़ रहे गरीब बच्चों की फीस का सरकार की ओर करीब 8 रुपये बकाया है लेकिन सरकार ने उक्त राशि का अभी तक निजी स्कूलों को भुगतान नहीं किया है। हरियाणा प्राइवेट स्कूल संघ ने सरकार से नियम 134ए के तहत पढ़ रहे जरूरतमंद बच्चों की फीस का भुगतान करने की मांग को उठाया है। संघ ने चेतावनी दी है कि अगर सरकार ने अपने वादे के अनुरूप निजी स्कूलों को उक्त नियम के तहत दाखिल बच्चों की फीस का भुगतान नहीं किया तो आगामी शैक्षणिक सत्र में वे इस नियम के तहत बच्चों को दाखिला नहीं देंगे। संघ के प्रदेशाध्यक्ष सत्यवान कुंडू व जिलाध्यक्ष बिजेंद्र मान ने कहा कि संघ ने स्कूल स्तर पर दाखिल किए गए गरीब बच्चों की फीस का भुगतान करने की मांग को भी प्रमुखता के साथ उठाया है। उन्होंने कहा कि सरकार के आदेशों के अनुरूप प्राइवेट स्कूल संचालक नियम 134ए के तहत पिछले कई वर्षों से जरुरतमंद बच्चों को अपने स्कूल में पढ़ा रहे हैं। सरकार व प्राइवेट स्कूल संघ के बीच कई दौर की बातचीत में इन बच्चों की फीस दिए जाने की मांग भी समय समय पर उठाई जाती रही है लेकिन सरकार बच्चों को दाखिला कराने के बाद प्राइवेट स्कूलों की उक्त मांग पर चुप्पी साध लेती है। अब सरकार यह बहाना बना रही है कि निजी स्कूल संचालक नियम 134ए के तहत दाखिल बच्चों की फीस की डिमांड ही नहीं कर रहे। उन्होंने बताया कि हर वर्ष शिक्षा विभाग के पास निजी स्कूल संचालक बकायदा प्रोफार्मा भरकर यह जानकारी देते रहे हैं कि जरूरतमंद बच्चों के दाखिले की कितनी सीटें भरी गई और कितनी सीटें खाली है। ऐसे में सरकार का बहाना तर्कसंगत नहीं है। उन्होंने बताया कि शैक्षणिक सत्र 2018-19 के दौरान जिले के 180 स्कूलों में नियम 134ए के तहत 2067 विद्यार्थियों को दाखिला दिया गया था जबकि खाली सीट 6376 रही। जबकि इन स्कूलों में विद्यार्थियों की कुल संख्या 105421 रही। उन्होंने कहा कि अगर सरकार की नियत ठीक है तो विभाग में मौजूद रिकॉर्ड को देखते हुए प्राइवेट स्कूलों को तुरंत पैसा जारी करे अन्यथा नए शैक्षणिक सत्र में प्राइवेट स्कूल संचालक किसी भी बच्चे को नियम 134ए के तहत दाखिला नहीं देंगे। वहीं अपने स्तर पर जरूरतमंद बच्चों को जरूर पढ़ाएंगे।
9वीं से 12वीं तक के विद्यार्थियों का कोई पैसा निर्धारित नहीं
संघ के जिलाध्यक्ष बिजेंद्र मान ने बताया कि सरकार ने अभी तक 9वीं से 12वीं कक्षा तक के ऐसे बच्चों के लिए कोई पैसा निर्धारित नहीं किया है। हालांकि प्राइमरी के लिए 300 रुपये और मिडिल के लिए 500 रुपये निर्धारित हैं। यह पैसा भी कई वर्षों से जारी नहीं किया गया। ऐसे में प्राइवेट स्कूलों का करोड़ों रुपये बकाया है।
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सरकार वायदे के अनुरूप जारी करे बकाया राशि
संघ के जिलाध्यक्ष बिजेंद्र मान ने कहा कि प्राइवेट स्कूल सरकार का हर कदम पर सहयोग करते आ रहे हैं और बेरोजगारी के इस दौर में लाखों युवाओं को भी रोजगार मुहैया कराते हुए बच्चों को अच्छी शिक्षा दे रहे हैं। इससे प्रदेश का नाम रोशन हो रहा है इसलिए सरकार को भी अपने किए गए वायदे के अनुरूप प्राइवेट स्कूलों में पढ़ रहे गरीब बच्चों की फीस जारी की जानी चाहिए। उन्होंने बताया कि पानीपत जिले का प्राइवेट स्कूलों का सरकार की ओर करीब 8 करोड़ रुपये बकाया है लेकिन सरकार इसे गंभीरता से नहीं ले रही।
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स्कूलों की मान्यता के कठोर नियमों में सरलीकरण करे सरकार
प्राइवेट स्कूल संघ ने स्कूलों को मान्यता प्रदान करने के लिए बनाए कठोर नियमों को सरल करने व वर्ष 2007 से पहले के सभी अस्थाई व एग्जिस्टिंग स्कूलों को स्थाई मान्यता देने की मांग को भी प्रमुखता के साथ उठाया। प्राइवेट स्कूल संघ ने मांग की कि नियमों में सरलीकरण करते हुए ऐसे स्कूलों को जल्द से जल्द मान्यता दी जाए तथा शिक्षा विभाग के पास जमा सूचना के आधार पर नियम 134ए के तहत दाखिल एवं स्कूल स्तर पर दाखिल किए गए जरूरतमंद बच्चों की फीस का जल्द भुगतान किया जाए।
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