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आरटीपीसीआर टेस्ट की पकड़ में नहीं आ रहा कोरोना, सिटी स्कैन में फेफड़ों में मिल रहा संक्रमण

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 14 May 2021 12:16 AM IST
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Corona not getting hold of RTPCR test, infection in lungs in city scan
संदीप भौरिया
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पानीपत। कोरोना की दूसरी लहर में वायरस स्वरूप बदलकर हमला कर रहा है। अब यह वायरस कई बार आरटीपीसीआर (रिवर्स ट्रांसक्रिप्शन पॉलीमर्स चेन रिएक्शन) टेस्ट से भी पकड़ में नहीं आ रहा है। हर रोज ऐसा लगभग 15-20 प्रतिशत केस में हो रहा है। आरटीपीसीआर टेस्ट में रिपोर्ट नेगेटिव मिलती है और मरीज आश्वस्त हो जाता है कि वो संक्रमित नहीं है। इसके बाद मरीज के पेट और छाती में निरंतर दर्द रहता है। डॉक्टरों की सलाह पर जब मरीज सिटी स्कैन कराते हैं तो उनके फेफड़े में संक्रमण मिलता है। सिविल अस्पताल में हर रोज औसतन 30 लोगों के सिटी स्कैन होते हैं, इनमें से औसतन 90 प्रतिशत लोग कोरोना संक्रमित मिल रहे हैं। 15 प्रतिशत तक ऐसे मरीज हैं जो आरटीपीसीआर टेस्ट में नेगेटिव आए थे, सिटी स्कैन कराने पर उनके फेफड़े 70 प्रतिशत तक डैमेज हो चुके थे और वे कोरोना संक्रमित मिले। शहर में खुले निजी केंद्रों में यह टेस्ट लगभग 4500 रुपये का है तो सिविल अस्पताल में 1610 से 2000 रुपये तक का है।
टेस्ट से संक्रमण पकड़ में आ जाता है : नरवाल
सिटी स्कैन सेंटर के मैनेजर अनिल नरवाल ने बताया कि आरटीपीसीआर और रैपिड एंटीजन किट से लिए स्वाब सैंपल की रिपोर्ट नेगेटिव आने पर डॉक्टर सिटी स्कैन की सलाह देते हैं। आशंकित मरीज को पहले एचआर सिटी चेस्ट टेस्ट कराने को बोला जाता है। टेस्ट का लाभ यह कि फेफड़ों में होने वाले संक्रमण को पकड़ लेता है। उसी से पॉजिटिव और नेगेटिव तय हो जाता है।
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दाम आधे से भी कम
सिविल अस्पताल के डॉक्टर ने ओपीडी स्लिप पर एचआर सिटी चेस्ट टेस्ट लिखा है तो सरकार द्वारा निर्धारित 1610 रुपये मरीज से लेते हैं। मरीज किसी निजी अस्पताल का पर्चा लेकर आया है तो उससे 2000 रुपये लिए जाते हैं। अधिकतम दो घंटे में मरीज को रिपोर्ट दे देते हैं। निजी लैब में इस टेस्ट के रेट चार से पांच हजार के बीच हैं।
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रिपोर्ट नेगेटिव आने पर लापरवाही न बरतें : डॉ. पंकज
डॉ. प्रेम अस्पताल के चेयरमैन और आईएमए के पूर्व प्रधान डॉ. पंकज मुटनेजा ने बताया कि आरटीपीसीआर में आप पॉजिटिव आ गए तो आगे का इलाज करा सकते हैं। अगर आपकी नेगेटिव है तो आप ये नहीं मान सकते कि कोरोना नहीं है। आजकल ज्यादातर केसों में गलती भी हो रही है कि आरटीपीसीआर टेस्ट में नेगेटिव आने के बाद लोग लापरवाह हो जाते हैं। लोगों से अपील है कि रिपोर्ट नेगेटिव आने पर भी सतर्क रहें।

इन मरीजों से अधिक खतरा
जिन मरीजों की बॉडी से टेस्ट में वायरस पकड़ में नहीं आता और उनकी रिपोर्ट नेगेटिव मिलती है, वे ऐहतियात नहीं बरतते और कोविड गाइडलाइन का पालन नहीं कर लापरवाही बरतते हैं। परिवार के लोग भी उनकी नेगेटिव रिपोर्ट देखकर उनके पास रहते हैं। सिटी स्कैन में उनकी रिपोर्ट पॉजिटिव मिलती है। ऐसे में उनके परिवार व आसपास के लोग भी संक्रमित हो जाते हैं।
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