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Panipat News: सामुदायिक केंद्र का निर्माण, मालिकों ने रुकवाया
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पानीपत।नगर निगम ने वार्ड नंबर 16 के विकास नगर की गली नंबर छह में करीब 100 वर्ग गज की जमीन के मालिकाना हक की बिना तस्दीक कराए बिना ही निगम ने यहां 34.67 लाख रुपये का टेंडर लगाकर एक सामुदायिक केंद्र का निर्माण कार्य शुरू करवा दिया। जब इस जमीन के असल मालिकों को इसकी भनक लगी तो उन्होंने मौके पर पहुंच काम को रुकवा दिया। अब काम बंद पड़ा है।
उल्लेखनीय है कि इस जमीन पर पहले सरकारी ट्यूबवेल लगवाया गया था। जमीन मालिकों का कहना है कि उन्होंने ये जमीन सिर्फ ट्यूबवेल लगवाने के लिए दी थी। किसी अन्य निर्माण के लिए नहीं। अब पिछले कई साल से ये ट्यूबवेल भी बंद पड़ा है। पीछे से जमीन को खाली और सरकारी सोचकर निगम ने यहां टेंडर लगाकर सामुदायिक केंद्र का निर्माण कार्य भी शुरू करवा दिया।
जमीन मालिकों ने कहा कि इसकी भनक लगते ही वे मौके पर पहुंचे और अपने कागजात निगम अधिकारियों को दिखाते हुए कहा कि इस जमीन के वे मालिक हैं। इस पर उनकी मर्जी के बगैर निगम अधिकारी कोई निर्माण कैसे कर सकते हैं। जमीन मालिकों ने अपने दस्तोवज दिखाते हुए कहा कि अगर उनके बुजुर्गाें ने या जमीन के किसी अन्य मालिक ने ये जमीन किसी को बेची हो या निगम को दी हो तो निगम अधिकारी उसके कागजात भी पेश कर सकते हैं । चूंकि निगम के पास इस जमीन की मलकियत का कोई सबूत नहीं मिला तो अधिकारियों को निर्माणाधीन काम को बीच में ही छोड़कर वापस आना पड़ा।
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जमीन मालिकाना हक रखने वालों में से नांगल खेड़ी गांव निवासी पप्पू मलिक ने बताया कि ये जमीन उनकी है। इसके 15 से भी ज्यादा लोग मालिक हैं। उनके बड़े बुजुर्गों ने इसे सिर्फ पीने के पानी के ट्यूबवेल के लिए दिया था। अब ट्यूबवेल ठप पड़ा है तो निगम ने यहां निर्माण कार्य शुरू करवा दिया है। जिसे मालिकाना हक रखने वाले सभी लोगों ने पहुंच रुकवाया है। निगम अधिकारियों को भी स्पष्ट कहा गया है कि अगर निगम के पास इस जमीन का कोई मालिकाना हक का दस्तावेज है तो वे इसे पेश कर सकते हैं।
वर्जन:
मामला संज्ञान में नहीं है। जमीन के सभी दस्तावेज तलब किए जाएंगे। इसके बाद जो भी नियमानुसार कार्रवाई बनेगी अमल में लाई जाएगी। राहुल पूनिया, एक्सईएन, नगर निगम।
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उल्लेखनीय है कि इस जमीन पर पहले सरकारी ट्यूबवेल लगवाया गया था। जमीन मालिकों का कहना है कि उन्होंने ये जमीन सिर्फ ट्यूबवेल लगवाने के लिए दी थी। किसी अन्य निर्माण के लिए नहीं। अब पिछले कई साल से ये ट्यूबवेल भी बंद पड़ा है। पीछे से जमीन को खाली और सरकारी सोचकर निगम ने यहां टेंडर लगाकर सामुदायिक केंद्र का निर्माण कार्य भी शुरू करवा दिया।
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जमीन मालिकों ने कहा कि इसकी भनक लगते ही वे मौके पर पहुंचे और अपने कागजात निगम अधिकारियों को दिखाते हुए कहा कि इस जमीन के वे मालिक हैं। इस पर उनकी मर्जी के बगैर निगम अधिकारी कोई निर्माण कैसे कर सकते हैं। जमीन मालिकों ने अपने दस्तोवज दिखाते हुए कहा कि अगर उनके बुजुर्गाें ने या जमीन के किसी अन्य मालिक ने ये जमीन किसी को बेची हो या निगम को दी हो तो निगम अधिकारी उसके कागजात भी पेश कर सकते हैं । चूंकि निगम के पास इस जमीन की मलकियत का कोई सबूत नहीं मिला तो अधिकारियों को निर्माणाधीन काम को बीच में ही छोड़कर वापस आना पड़ा।
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जमीन मालिकाना हक रखने वालों में से नांगल खेड़ी गांव निवासी पप्पू मलिक ने बताया कि ये जमीन उनकी है। इसके 15 से भी ज्यादा लोग मालिक हैं। उनके बड़े बुजुर्गों ने इसे सिर्फ पीने के पानी के ट्यूबवेल के लिए दिया था। अब ट्यूबवेल ठप पड़ा है तो निगम ने यहां निर्माण कार्य शुरू करवा दिया है। जिसे मालिकाना हक रखने वाले सभी लोगों ने पहुंच रुकवाया है। निगम अधिकारियों को भी स्पष्ट कहा गया है कि अगर निगम के पास इस जमीन का कोई मालिकाना हक का दस्तावेज है तो वे इसे पेश कर सकते हैं।
वर्जन:
मामला संज्ञान में नहीं है। जमीन के सभी दस्तावेज तलब किए जाएंगे। इसके बाद जो भी नियमानुसार कार्रवाई बनेगी अमल में लाई जाएगी। राहुल पूनिया, एक्सईएन, नगर निगम।