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परमात्मा से जुड़ाव ही सच्ची भक्ति का आधार: माता सुदीक्षा

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 13 Jan 2025 02:19 AM IST
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Connection with God is the basis of true devotion: Mata Sudiksha
समालखा। समालखा स्थित संत निरंकारी आध्यात्मिक स्थल में रविवार को भक्ति पर्व समागम पर कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यहां हरियाणा, दिल्ली, एनसीआर, उत्तराखंड व उत्तर प्रदेश से हजारों की संख्या में अनुयायी पहुंचे। इस दौरान माता सुदीक्षा ने कहा कि परमात्मा से जुड़ाव ही सच्ची भक्ति का आधार है।
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माता सुदीक्षा महाराज व निरंकारी राजपिता रमित ने कहा कि भक्ति वह अवस्था है, जो जीवन को दिव्यता और आनंद से भर देती है। यह न इच्छाओं का सौदा है, न स्वार्थ का माध्यम। सच्ची भक्ति का अर्थ है परमात्मा से गहरा जुड़ाव और निस्वार्थ प्रेम है। सतगुरु माता ने भक्ति की महिमा का उल्लेख करते हुए कहा कि ब्रह्मज्ञान भक्ति का आधार है। यह जीवन को उत्सव बना देता है। भक्ति का वास्तविक स्वरूप दिखावे से परे और स्वार्थ व लालच से मुक्त होना चाहिए। जैसे दूध में नींबू डालने से वह फट जाता है, वैसे ही भक्ति में लालच और स्वार्थ हो तो वह अपनी पवित्रता खो देती है।
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सतगुरु माता ने उदाहरण देते हुए कहा कि भगवान हनुमान, मीराबाई और बुद्ध भगवान का भक्ति स्वरूप भले ही अलग था, लेकिन उनका मर्म एक ही था-परमात्मा से अटूट जुड़ाव। भक्ति सेवा, सुमिरन, सत्संग और गान जैसे अनेक रूपों में हो सकती है, लेकिन उसमें निःस्वार्थ प्रेम और समर्पण का भाव होना चाहिए। गृहस्थ जीवन में भी भक्ति संभव है, यदि हर कार्य में परमात्मा का आभास हो।
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सतगुरु माता ने माता सविंदर और राजमाता के जीवन को भक्ति और समर्पण का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि इन विभूतियों का जीवन भक्ति और सेवा का श्रेष्ठ उदाहरण है। निरंकारी मिशन का मूल सिद्धांत यही है कि भक्ति परमात्मा के तत्व को जानकर ही सार्थक रूप ले सकती है। निसंदेह सतगुरु माता के अमूल्य प्रवचनों ने श्रद्धालुओं के जीवन में ब्रह्मज्ञान द्वारा भक्ति का वास्तविक महत्व समझने और उसे अपनाने की प्रेरणा दी। इस अवसर पर परम संत संतोख सिंह के अतिरिक्त अन्य संतों के तप, त्याग और ब्रह्मज्ञान के प्रचार-प्रसार में उनके अमूल्य योगदान को स्मरण किया गया और उनके जीवन से प्रेरणा ली गईं। समागम के दौरान अनेक वक्ताओं, कवियों और गीतकारों ने विभिन्न विद्याओं के माध्यम से गुरु महिमा और भक्ति का भावपूर्ण वर्णन किया। संतों की प्रेरणादायक शिक्षाओं ने श्रद्धालुओं के जीवन को आध्यात्मिक दृष्टिकोण से समृद्ध किया।
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