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हड़ताल : अटके काम, भटकते रहे लोग
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पानीपत। बाबुओं की हड़ताल के कारण सरकारी कार्यालयाें में सोमवार को छठे दिन भी काम नहीं हुए। लोग फाइलें और अपने कार्याें को लेकर भटकते रहे। जिला सचिवालय के लगभग सभी कार्यालयों में पूरे दिन कर्मचारी नहीं मिले। इक्का-दुक्का कर्मचारी भी फाइल पकड़ने को तैयार नहीं दिखा। इधर रजिस्टरी, लाइसेंस और मोटर व्हीकल रजिस्ट्रेशन न होने के कारण सरकार को हर रोज करीब तीन करोड़ की चपत लग रही है। संगठन ने 12 जुलाई को वीर जवानों के लिए धरनास्थल पर लिपिकीय वर्ग रक्तदान शिविर लगाने का फैसला किया है।
क्लेरिकल एसोसिएशन वेलफेयर सोसायटी हरियाणा के बैनर तले क्लर्कों ने जिला सचिवालय के बाहर एलिवेटेड हाईवे के नीचे सोमवार को लगातार छठे दिन धरना दिया। इसमें करीब पांच सौ कर्मचारी शामिल हुए। बारिश के दौरान कर्मचारी जोश के साथ धरने पर बैठे। जिला प्रधान सतबीर शर्मा ने कहा कि लिपिकीय वर्ग लगातार कार्य समीक्षा के आधार पर वेतनमान 35400 निर्धारित करने की मांग कर रहा है। सरकार ने अब तक उनकी सुनवाई नहीं की। इस मौके पर महासचिव अरविंद शर्मा, संदीप, दीपक मनोज, रिंकू, प्रवीण, पंकज, सोहन लाल, राहुल व रोमित मौजूद रहे।
क्लर्कों की मांगों की हुई अनदेखी
क्लर्क रणजीत जागलान ने बताया कि लिपिक वर्ग की मांगें जायज हैं। प्रदेशभर के कर्मचारियों ने 18 जून को मुख्यमंत्री आवास का घेराव किया था। तब चार जुलाई तक मुख्यमंत्री के साथ बैठक कराने का आश्वासन मिला था। इसके बाद उनकी कोई सुनवाई नहीं की। संगठन ने अनदेखी के चलते पांच जुलाई को बेमियादी हड़ताल पर जाने की चेतावनी दी थी।
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अपग्रेड नहीं किया वेतनमान -
क्लर्क कपिल ने बताया कि अध्यापक, फार्मासिस्ट, एमपीएचडब्ल्यू, जीएनएम, नर्सिग स्टाफ, जूनियर इंजीनियर व अन्य पदों के कार्यों की समीक्षा के उपरांत या दूसरे कारणों से उनके वेतनमान में सम्मानजनक बढ़ोतरी हुई है। पहले लिपिक पद का वेतनमान भी इनके बराबर ही था। सातवें वेतन आयोग तक लिपिक पद का वेतनमान अन्य पदों की तुलना में अपग्रेड नहीं किया गया।
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क्लेरिकल एसोसिएशन वेलफेयर सोसायटी हरियाणा के बैनर तले क्लर्कों ने जिला सचिवालय के बाहर एलिवेटेड हाईवे के नीचे सोमवार को लगातार छठे दिन धरना दिया। इसमें करीब पांच सौ कर्मचारी शामिल हुए। बारिश के दौरान कर्मचारी जोश के साथ धरने पर बैठे। जिला प्रधान सतबीर शर्मा ने कहा कि लिपिकीय वर्ग लगातार कार्य समीक्षा के आधार पर वेतनमान 35400 निर्धारित करने की मांग कर रहा है। सरकार ने अब तक उनकी सुनवाई नहीं की। इस मौके पर महासचिव अरविंद शर्मा, संदीप, दीपक मनोज, रिंकू, प्रवीण, पंकज, सोहन लाल, राहुल व रोमित मौजूद रहे।
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क्लर्कों की मांगों की हुई अनदेखी
क्लर्क रणजीत जागलान ने बताया कि लिपिक वर्ग की मांगें जायज हैं। प्रदेशभर के कर्मचारियों ने 18 जून को मुख्यमंत्री आवास का घेराव किया था। तब चार जुलाई तक मुख्यमंत्री के साथ बैठक कराने का आश्वासन मिला था। इसके बाद उनकी कोई सुनवाई नहीं की। संगठन ने अनदेखी के चलते पांच जुलाई को बेमियादी हड़ताल पर जाने की चेतावनी दी थी।
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अपग्रेड नहीं किया वेतनमान -
क्लर्क कपिल ने बताया कि अध्यापक, फार्मासिस्ट, एमपीएचडब्ल्यू, जीएनएम, नर्सिग स्टाफ, जूनियर इंजीनियर व अन्य पदों के कार्यों की समीक्षा के उपरांत या दूसरे कारणों से उनके वेतनमान में सम्मानजनक बढ़ोतरी हुई है। पहले लिपिक पद का वेतनमान भी इनके बराबर ही था। सातवें वेतन आयोग तक लिपिक पद का वेतनमान अन्य पदों की तुलना में अपग्रेड नहीं किया गया।