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पोस्टमार्टम के दौरान गई लाइट, डॉक्टर को स्ट्रेचर पर खिड़की के सहारे अंधेरे में करना पड़ा पोस्टमार्टम, चार घंटे नहीं आई लाइट, परि
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42 करोड़ रुपये में बनकर तैयार हुई सिविल अस्पताल की अत्याधुनिक बिल्डिंग संसाधनों के अभाव में सिसक रही है। शवगृह में लाइट तक की उचित व्यवस्था नहीं है। लाइट जाने पर घंटों पोस्टमार्टम रुके रहते हैं। रविवार को पोस्टमार्टम हाउस में पोस्टमार्टम के लिए तीन शवों को रखवाया गया था। बुजुर्ग के पोस्टमार्टम के दौरान बीच में ही लाइट चली गई। डॉक्टर को स्ट्रेचर पर शव रखकर खिड़की के उजाले के सहारे पोस्टमार्टम करना पड़ा। इस दौरान डॉक्टर को मोबाइल टॉर्च का भी सहारा लेना पड़ा। इसके बाद डॉक्टर ने अंधेरे में पोस्टमार्टम करने से इंकार कर दिया। मृतकों के परिजनों ने इस पर जमकर हंगामा किया। परिजनों ने नेताओं और स्वास्थ्य विभाग के आला अधिकारियों से भी पोस्टमार्टम की गुजारिश की, लेकिन डॉक्टर ने अंधेरे में पोस्टमार्टम करने से इंकार कर दिया। चार घंटे तक शवगृह में बिजली नहीं रही। विवाद बढ़ने व डॉक्टर के दो टूक जवाब देने के बाद स्वास्थ्य अधिकारियों को आनन-फानन में नई बैटरी मंगवानी पड़ी। डॉक्टर का कहना था कि वो चार बार आला अधिकारियों से इंवर्टर बैटरी की मांग कर चुके हैं। इसके अलावा हॉट लाइन से भी शवगृह को कनेक्ट नहीं किया गया है। इसको लेकर पोस्टमार्टम की प्रक्रिया लगातार बाधित हो रही है।
इसराना के पास 83 साल के दीपा निवासी गांव शामड़ी की सड़क हादसे में मौत हो गई थी। शव को पोस्टमार्टम के लिए सिविल अस्पताल में लाया गया। 11 बजे फॉरेंसिक एक्सपर्ट डॉ. नारायण डबास ने पोस्टमार्टम शुरू किया। इसी दौरान लाइट चली गई। इंवर्टर से लाइट जलाई गई, लेकिन बैटरी खराब हो गई। डॉक्टरों ने शव को स्ट्रेचर पर रखकर खिड़की के उजाले के सहारे पोस्टमार्टम किया। इस दौरान डॉक्टर और कर्मचारी को काफी परेशानी हुई। अंधेरे में जांच करने में भी परेशानी हुई। इसके बाद डॉक्टर ने अस्पताल के एमएस डॉ. आलोक जैन को बैटरी खराब होने की सूचना दी, लेकिन सामने से कोई संतुष्टि भरा जवाब नहीं मिला। डॉ. नारायण डबास शवगृह से बाहर निकल आए। देहरा गांव में खेत में संदिग्ध परिस्थितियों में मरे 23 वर्षीय देवेंद्र के परिजनों ने डॉक्टर को पोस्टमार्टम करने को कहा, लेकिन लाइट न होने के कारण डॉक्टर ने पोस्टमार्टम करने से इंकार कर दिया। परिजनों ने लाइट का 2 बजे तक इंतजार किया, लेकिन इस पर परिजन भड़क गए। परिजनों ने नेताओं को फोन किए। नेताओं ने स्वास्थ्य अधिकारियों और डॉक्टर को फोन किया, लेकिन डॉ. नारायण डबास से इसके बाद भी पोस्टमार्टम करने से इंकार कर दिया। सवा 2 बजे आला अधिकारियों को नई बैटरी उपलब्ध करानी पड़ी। इसके बाद पोस्टमार्टम किए गए।
फीडर की चल रही थी मरम्मत
शवगृह में अधिकारियों ने लाइट की कोई उचित व्यवस्था नहीं की। शवगृह के इंवर्टर की बैटरी लगभग दो माह से खराब है। इसको लेकर चार बार डिमांड दी जा चुकी थी। शवगृह की लाइट बस स्टैंड फीडर से कनेक्ट की गई है। रविवार को फीडर की पांच घंटे तक मरम्मत चली। इसी कारण शवगृह की लाइट नहीं थी। पिछले दो माह से डॉक्टरों को पोस्टमार्टम करने में परेशानी हो रही है।
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पूरे अस्पताल को जनरेटर से कनेक्ट किया, लेकिन शवगृह को छोड़ा
अस्पताल प्रशासन ने अस्पताल के सभी वार्ड को जनरेटर और हॉट लाइन से कनेक्ट कर रखा है। डॉ. नारायण डबास पिछले काफी वक्त से शवगृह को जनरेटर और हॉट लाइन से कनेक्ट करने की मांग कर रहे हैं, लेकिन उनकी सुनवाई नहीं की। शवगृह के इनवर्टर की बैटरी तक नहीं बदली गई। जिस कारण परेशानी हो रही है।
पुलिस को खुद बैटरी लाकर कराना पड़ा था पोस्टमार्टम
दिसंबर माह में एक सिपाही की थर्मल के पास सड़क हादसे में मौत हो गई थी। शवगृह में लाइट की व्यवस्था नहीं थी। पुलिस कर्मचारियों को खुद थाने से बैटरी लाकर शव का पोस्टमार्टम कराना पड़ा था।
बैटरी लगवा दी गई है, अब परेशानी नहीं होगी : डॉ. जैन
शवगृह में लाइट के कारण परेशानी हुई है। अब शवगृह में दो नई बैटरी लगवा दी गई है। जल्द इससे हॉट लाइन से जोड़ने की प्रक्रिया भी शुरू करेंगे।
-डॉ. आलोक जैन, एमएस सिविल अस्पताल।
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इसराना के पास 83 साल के दीपा निवासी गांव शामड़ी की सड़क हादसे में मौत हो गई थी। शव को पोस्टमार्टम के लिए सिविल अस्पताल में लाया गया। 11 बजे फॉरेंसिक एक्सपर्ट डॉ. नारायण डबास ने पोस्टमार्टम शुरू किया। इसी दौरान लाइट चली गई। इंवर्टर से लाइट जलाई गई, लेकिन बैटरी खराब हो गई। डॉक्टरों ने शव को स्ट्रेचर पर रखकर खिड़की के उजाले के सहारे पोस्टमार्टम किया। इस दौरान डॉक्टर और कर्मचारी को काफी परेशानी हुई। अंधेरे में जांच करने में भी परेशानी हुई। इसके बाद डॉक्टर ने अस्पताल के एमएस डॉ. आलोक जैन को बैटरी खराब होने की सूचना दी, लेकिन सामने से कोई संतुष्टि भरा जवाब नहीं मिला। डॉ. नारायण डबास शवगृह से बाहर निकल आए। देहरा गांव में खेत में संदिग्ध परिस्थितियों में मरे 23 वर्षीय देवेंद्र के परिजनों ने डॉक्टर को पोस्टमार्टम करने को कहा, लेकिन लाइट न होने के कारण डॉक्टर ने पोस्टमार्टम करने से इंकार कर दिया। परिजनों ने लाइट का 2 बजे तक इंतजार किया, लेकिन इस पर परिजन भड़क गए। परिजनों ने नेताओं को फोन किए। नेताओं ने स्वास्थ्य अधिकारियों और डॉक्टर को फोन किया, लेकिन डॉ. नारायण डबास से इसके बाद भी पोस्टमार्टम करने से इंकार कर दिया। सवा 2 बजे आला अधिकारियों को नई बैटरी उपलब्ध करानी पड़ी। इसके बाद पोस्टमार्टम किए गए।
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फीडर की चल रही थी मरम्मत
शवगृह में अधिकारियों ने लाइट की कोई उचित व्यवस्था नहीं की। शवगृह के इंवर्टर की बैटरी लगभग दो माह से खराब है। इसको लेकर चार बार डिमांड दी जा चुकी थी। शवगृह की लाइट बस स्टैंड फीडर से कनेक्ट की गई है। रविवार को फीडर की पांच घंटे तक मरम्मत चली। इसी कारण शवगृह की लाइट नहीं थी। पिछले दो माह से डॉक्टरों को पोस्टमार्टम करने में परेशानी हो रही है।
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पूरे अस्पताल को जनरेटर से कनेक्ट किया, लेकिन शवगृह को छोड़ा
अस्पताल प्रशासन ने अस्पताल के सभी वार्ड को जनरेटर और हॉट लाइन से कनेक्ट कर रखा है। डॉ. नारायण डबास पिछले काफी वक्त से शवगृह को जनरेटर और हॉट लाइन से कनेक्ट करने की मांग कर रहे हैं, लेकिन उनकी सुनवाई नहीं की। शवगृह के इनवर्टर की बैटरी तक नहीं बदली गई। जिस कारण परेशानी हो रही है।
पुलिस को खुद बैटरी लाकर कराना पड़ा था पोस्टमार्टम
दिसंबर माह में एक सिपाही की थर्मल के पास सड़क हादसे में मौत हो गई थी। शवगृह में लाइट की व्यवस्था नहीं थी। पुलिस कर्मचारियों को खुद थाने से बैटरी लाकर शव का पोस्टमार्टम कराना पड़ा था।
बैटरी लगवा दी गई है, अब परेशानी नहीं होगी : डॉ. जैन
शवगृह में लाइट के कारण परेशानी हुई है। अब शवगृह में दो नई बैटरी लगवा दी गई है। जल्द इससे हॉट लाइन से जोड़ने की प्रक्रिया भी शुरू करेंगे।
-डॉ. आलोक जैन, एमएस सिविल अस्पताल।