{"_id":"6657c8b537bbea8987080516","slug":"cases-referred-from-sncu-ward-reduced-by-25-percent-in-a-month-panipat-news-c-244-1-pnp1003-118871-2024-05-30","type":"story","status":"publish","title_hn":"Panipat News: एक माह में 25 प्रतिशत कम हुए एसएनसीयू वार्ड से रेफर करने के केस","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Panipat News: एक माह में 25 प्रतिशत कम हुए एसएनसीयू वार्ड से रेफर करने के केस
विज्ञापन
पानीपत। जिला नागरिक अस्पताल के जीवनदायिनी एसएनसीयू वार्ड से एक माह में रेफरल 60 प्रतिशत तक कम हो गया है। जनवरी से मार्च तक रेफरल लगभग 35 प्रतिशत था। अब यह घटकर लगभग 10 प्रतिशत पर आ गया है। पिछले एक माह में यहां दाखिल हुए सभी नवजात भी स्वस्थ हुए हैं। एक मई से अब तक यहां 87 बच्चे दाखिल हुए है। इनमें से नौ रेफर व तीन लामा लेकर गए हैं। 64 बच्चे स्वस्थ हुए हैं। 10 बच्चों का अब भी यहां इलाज चल रहा है। मार्च 2023 से मार्च 2024 तक यहां 22 नवजातों की मौत हो गई थी। सिविल सर्जन ने कम हुए रेफरल की रिपोर्ट भी सार्वजनिक करते हुए डॉक्टरों के काम की सराहना की है। एसएनसीयू वार्ड में वेंटिलेटर भी इंस्टॉल कर दिए गए हैं। चार सी पैप यहां इंस्टॉल हैं। डॉ. भावना, डॉ. निहारिका के साथ यहां आठ नर्सिंग ऑफिसर की ड्यूटी लगाई गई है।
जानकारी के अनुसार एसएनसीयू वार्ड में 31 मार्च 2023 से 31 मार्च 2024 तक 1422 नवजातों को दाखिल कराया गया । इनमें से 900 बच्चों को स्वस्थ होने के बाद एसएनसीयू वार्ड से भेज दिया गया। 1422 में से 22 नवजातों की यहां मौत हो गई। 143 बच्चों को परिजन लामा कर दूसरे स्वास्थ्य केंद्र में ले गए। 1422 में से 351 नवजातों को यहां से रेफर किया गया है। फिलहाल एसएनसीयू वार्ड में 12 नवजात दाखिल हैं। इनकी देखभाल चार डॉक्टर व आठ स्टाफ नर्स तीन शिफ्टों में कर रहे हैं। एसएनसीयू वार्ड के गंभीर हालत को देखते हुए पांच दिन पहले समालखा अस्पताल की बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. भावना को यहां का इंचार्ज बनाया गया है।
डाॅक्टर पर लगे थे आरोप-
फरवरी व मार्च में एसएनसीयू वार्ड से 80 बच्चों को रेफर कर दिया गया था। सात बच्चों की मौत हो गई थी। एसएनसीयू वार्ड की तत्कालीन इंचार्ज पर यहां से मरीजों को निजी अस्पताल में रेफर करने के आरोप लगे थे। यहां की डॉक्टर का समालखा अस्पताल में तबादला कर दिया था। बाद में उन्होंने नौकरी से इस्तीफा दे दिया। अब यहां की इंचार्ज समालखा की डॉ. भावना को बनाया गया है।
विज्ञापन
वर्जन
एसएनसीयू वार्ड से रेफरल कम करने का प्रयास है। एक माह में रेफरल काफी हद तक कम हुआ है। डॉक्टर व स्टाफ अच्छा काम कर रहा है। डॉक्टरों को वेंटिलेटर चलाने का प्रशिक्षण दिया गया है। एसएनसीयू वार्ड में सुविधाएं बढ़ाई जा रही हैं।
डॉ. जयंत आहूजा, सिविल सर्जन पानीपत।
विज्ञापन
जानकारी के अनुसार एसएनसीयू वार्ड में 31 मार्च 2023 से 31 मार्च 2024 तक 1422 नवजातों को दाखिल कराया गया । इनमें से 900 बच्चों को स्वस्थ होने के बाद एसएनसीयू वार्ड से भेज दिया गया। 1422 में से 22 नवजातों की यहां मौत हो गई। 143 बच्चों को परिजन लामा कर दूसरे स्वास्थ्य केंद्र में ले गए। 1422 में से 351 नवजातों को यहां से रेफर किया गया है। फिलहाल एसएनसीयू वार्ड में 12 नवजात दाखिल हैं। इनकी देखभाल चार डॉक्टर व आठ स्टाफ नर्स तीन शिफ्टों में कर रहे हैं। एसएनसीयू वार्ड के गंभीर हालत को देखते हुए पांच दिन पहले समालखा अस्पताल की बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. भावना को यहां का इंचार्ज बनाया गया है।
विज्ञापन
डाॅक्टर पर लगे थे आरोप-
फरवरी व मार्च में एसएनसीयू वार्ड से 80 बच्चों को रेफर कर दिया गया था। सात बच्चों की मौत हो गई थी। एसएनसीयू वार्ड की तत्कालीन इंचार्ज पर यहां से मरीजों को निजी अस्पताल में रेफर करने के आरोप लगे थे। यहां की डॉक्टर का समालखा अस्पताल में तबादला कर दिया था। बाद में उन्होंने नौकरी से इस्तीफा दे दिया। अब यहां की इंचार्ज समालखा की डॉ. भावना को बनाया गया है।
विज्ञापन
वर्जन
एसएनसीयू वार्ड से रेफरल कम करने का प्रयास है। एक माह में रेफरल काफी हद तक कम हुआ है। डॉक्टर व स्टाफ अच्छा काम कर रहा है। डॉक्टरों को वेंटिलेटर चलाने का प्रशिक्षण दिया गया है। एसएनसीयू वार्ड में सुविधाएं बढ़ाई जा रही हैं।
डॉ. जयंत आहूजा, सिविल सर्जन पानीपत।