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Panipat News: हरे कृष्णा महामंत्र से गूंजा अंसल गेट नंबर चार क्षेत्र
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संकीर्तन में राधा-कृष्ण की पूजा करते लोग। संवाद
पानीपत। इस्कॉन (अंतरराष्ट्रीय कृष्ण भावनामृत संघ) द्वारा शुक्रवार को अंसल गेट नंबर चार के नजदीक संकीर्तन कार्यक्रम का आयोजन किया गया। आध्यात्मिक आयोजन में सैकड़ों श्रद्धालुओं ने भाग लिया। कार्यक्रम में महामंत्र का सामूहिक जाप किया गया। यह अद्भुत वातावरण श्रद्धा, समर्पण और भक्तिभाव से भरपूर था।
मुख्यातिथि कुरुक्षेत्र मंदिर के उपाध्यक्ष मोहन गौर चंद्र प्रभु रहे। कार्यक्रम में छह अप्रैल से शुरू होने वाली कथा के बारे में बताया। कथा छह से 12 अप्रैल तक कटारिया एस्टेट सेक्टर 12 में होगी। 12 अप्रैल को कृष्ण बलराम रथ यात्रा निकाली जाएगी। मोहन गौर प्रभु ने बताया कि भक्तों ने बड़े भाव से गौर-निताई विग्रहों की पूजा की। उन्होंने पुष्प अर्पित किए और आरती कर श्रद्धा भाव प्रकट किया। इस्कॉन के भक्तों द्वारा प्रसाद के पैकेट वितरित किए गए। भक्तों ने श्रीमद्भागवत गीता भी वितरित की।
इससे सभी को जीवन के गूढ़ और आध्यात्मिक संदेश प्राप्त करने का अवसर मिला। संकीर्तन न केवल व्यक्ति के मन और आत्मा को शुद्ध करता है बल्कि समाज में प्रेम, सौहार्द और शांति का संदेश भी फैलाता है। संकीर्तन का उद्देश्य केवल भगवान के नाम का गुणगान करना ही नहीं बल्कि इसे जीवन का आधार बनाकर हर परिस्थिति में खुशी और शांति पाना है। भक्तों ने संकीर्तन के महत्व को समझते हुए इसे अपने जीवन का अभिन्न हिस्सा बनाने का संकल्प लिया।
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मुख्यातिथि कुरुक्षेत्र मंदिर के उपाध्यक्ष मोहन गौर चंद्र प्रभु रहे। कार्यक्रम में छह अप्रैल से शुरू होने वाली कथा के बारे में बताया। कथा छह से 12 अप्रैल तक कटारिया एस्टेट सेक्टर 12 में होगी। 12 अप्रैल को कृष्ण बलराम रथ यात्रा निकाली जाएगी। मोहन गौर प्रभु ने बताया कि भक्तों ने बड़े भाव से गौर-निताई विग्रहों की पूजा की। उन्होंने पुष्प अर्पित किए और आरती कर श्रद्धा भाव प्रकट किया। इस्कॉन के भक्तों द्वारा प्रसाद के पैकेट वितरित किए गए। भक्तों ने श्रीमद्भागवत गीता भी वितरित की।
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इससे सभी को जीवन के गूढ़ और आध्यात्मिक संदेश प्राप्त करने का अवसर मिला। संकीर्तन न केवल व्यक्ति के मन और आत्मा को शुद्ध करता है बल्कि समाज में प्रेम, सौहार्द और शांति का संदेश भी फैलाता है। संकीर्तन का उद्देश्य केवल भगवान के नाम का गुणगान करना ही नहीं बल्कि इसे जीवन का आधार बनाकर हर परिस्थिति में खुशी और शांति पाना है। भक्तों ने संकीर्तन के महत्व को समझते हुए इसे अपने जीवन का अभिन्न हिस्सा बनाने का संकल्प लिया।

संकीर्तन में राधा-कृष्ण की पूजा करते लोग। संवाद
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