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पानीपत: पौने चार साल बाद हुई फाइनेंस कमेटी की बैठक बिना रिकॉर्ड के सिर्फ दो घंटे में निपटी
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पानीपत। पौने चार साल बाद शुक्रवार को पहली बार निगम की फाइनेंस मैनेजमेंट कमेटी की बैठक बुलाई गई जो महज दो घंटे से भी पहले सिमट गई। इसमें आयुक्त मौजूद नहीं हो सके। बैठक के बीच में मेयर भी किसी काम से बाहर चली गई। जिसके बाद कमेटी की अध्यक्षता सीनियर डिप्टी मेयर ने की। इसके बाद में चीफ अकांउट अफसर भी बैठक छोड़ गए। कमेटी पदाधिकारियों ने बताया कि चीफ अकांउट अफसर ने बिना सूचना दिए बैठक छोड़ी है। अब उनके खिलाफ सदन की बैठक में एजेंडा तैयार कर कार्रवाई की मांग की जाएगी। इस दौरान फाइनेंस कमेटी ने निगम अफसरों से 2022-23 वित्तीय वर्ष की आमदनी और खर्च का ब्योरा मांगा गया।
अफसरों ने अप्रैल 2022 से लेकर सितंबर तक खर्च हुए 14.26 करोड़ का लेखा जोखा प्रस्तुत किया। इसके अलावा इन छह माह में निगम को हुई आमदनी 15.45 करोड़ का डेटा भी दिया। कमेटी के सामने निगम अफसर केवल निगम फंड को ही बैठक में प्रस्तुत कर पाए। कमेटी ने खर्च हुए इस बजट की अफसरों से पूरी डिटेल मांगी है। इसके अलावा कमेटी ने अफसरों को अगली बैठक में केंद्र और राज्य सरकार की ओर से जारी हुए बजट और उसके खर्च का भी ब्योरा प्रस्तुत करने के भी निर्देश दिए हैं।
मोबाइल टॉवर का लाएं रिकॉर्ड, वसूलें बकाया
कमेटी ने निगम अफसरों से पिछले आठ साल में शहर में लगे मोबाइल टॉवरों और उनकी ओर से जमा राशि के साथ बकाया का भी बजट मांगा। जो अफसर प्रस्तुत नहीं कर पाए। कमेटी ने कहा कि अगली बैठक में पूरे डेटा के साथ अफसर प्रस्तुत होंगे। मोबाइल टॉवरों पर जो भी बकाया है उसे वसूला जाएगा। इसके अलावा निगम के उन सभी आय के मदों पर भी चर्चा की गई जिससे निगम की रिकवरी हो सकती है। इसमें प्रॉपर्टी टैक्स, एनडीसी, स्टॉम्प ड्यूटी आदिश शामिल रहा।
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डिटेल मांगी करेंगे कार्रवाई
कमेटी सदस्यों में सीनियर डिप्टी मेयर दुष्यंत भट्ट, डिप्टी मेयर रविंद्र फुले और रविंद्र भाटिया ने कहा कि फाइनेंस कमेटी निगम की सबसे बड़ी ताकत है, जो आयुक्त को भी आदेश जारी कर सकती है। ये बात निगम एक्ट में भी है। बैठक में अफसरों से खर्च का ब्योरा मांगा है साथ में आय बढ़ाने पर भी चर्चा हुई है। बीच में बिना सूचना दिए चीफ अकांउट। अफसर बैठक छोड़ गए। अब उनके खिलाफ एजेंडा तैयार कर सदन में प्रस्तुत कर कार्रवाई की मांग की जाएगी। इनके अलावा बैठक में पार्षद लोकेश नांगरू, पवन गोगालिया, शकुंतला गर्ग के साथ निगम के सुपरिंटेंडेंट इंजीनियर रमेश कुमार ़समेत अकाउंट अफसर भी मौजूद रहे।
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अफसरों ने अप्रैल 2022 से लेकर सितंबर तक खर्च हुए 14.26 करोड़ का लेखा जोखा प्रस्तुत किया। इसके अलावा इन छह माह में निगम को हुई आमदनी 15.45 करोड़ का डेटा भी दिया। कमेटी के सामने निगम अफसर केवल निगम फंड को ही बैठक में प्रस्तुत कर पाए। कमेटी ने खर्च हुए इस बजट की अफसरों से पूरी डिटेल मांगी है। इसके अलावा कमेटी ने अफसरों को अगली बैठक में केंद्र और राज्य सरकार की ओर से जारी हुए बजट और उसके खर्च का भी ब्योरा प्रस्तुत करने के भी निर्देश दिए हैं।
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मोबाइल टॉवर का लाएं रिकॉर्ड, वसूलें बकाया
कमेटी ने निगम अफसरों से पिछले आठ साल में शहर में लगे मोबाइल टॉवरों और उनकी ओर से जमा राशि के साथ बकाया का भी बजट मांगा। जो अफसर प्रस्तुत नहीं कर पाए। कमेटी ने कहा कि अगली बैठक में पूरे डेटा के साथ अफसर प्रस्तुत होंगे। मोबाइल टॉवरों पर जो भी बकाया है उसे वसूला जाएगा। इसके अलावा निगम के उन सभी आय के मदों पर भी चर्चा की गई जिससे निगम की रिकवरी हो सकती है। इसमें प्रॉपर्टी टैक्स, एनडीसी, स्टॉम्प ड्यूटी आदिश शामिल रहा।
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डिटेल मांगी करेंगे कार्रवाई
कमेटी सदस्यों में सीनियर डिप्टी मेयर दुष्यंत भट्ट, डिप्टी मेयर रविंद्र फुले और रविंद्र भाटिया ने कहा कि फाइनेंस कमेटी निगम की सबसे बड़ी ताकत है, जो आयुक्त को भी आदेश जारी कर सकती है। ये बात निगम एक्ट में भी है। बैठक में अफसरों से खर्च का ब्योरा मांगा है साथ में आय बढ़ाने पर भी चर्चा हुई है। बीच में बिना सूचना दिए चीफ अकांउट। अफसर बैठक छोड़ गए। अब उनके खिलाफ एजेंडा तैयार कर सदन में प्रस्तुत कर कार्रवाई की मांग की जाएगी। इनके अलावा बैठक में पार्षद लोकेश नांगरू, पवन गोगालिया, शकुंतला गर्ग के साथ निगम के सुपरिंटेंडेंट इंजीनियर रमेश कुमार ़समेत अकाउंट अफसर भी मौजूद रहे।