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गलत अंगूठा लगाकर मृतकों का दिया जिंदा
Panipat
Updated Thu, 12 Sep 2013 05:38 AM IST
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समालखा। खंड के गांव नामुंडा की पूर्व महिला सरपंच पर एक दर्जन मृत लोगों की पेंशन हड़पने के आरोप लगे हैं जिसका खुलासा आरटीआई से मिली सूचना से हुआ है।
ग्रामीण शक्ति सिंह का आरोप है कि मृत्यु होने के बाद भी गलत अंगूठे लगाकर सरपंच ने 2007-10 तक एक दर्जन लोगों की पेंशन हड़प ली। सूचना अधिकार के तहत जानकारी लेने के बाद शक्ति सिंह ने मामले की शिकायत एसडीएम, उपायुक्त और समाज कल्याण विभाग को भेजकर मामले की जांच कर दोषी के खिलाफ उचित कार्रवाई और पेंशन राशि ब्याज सहित वापिस लेने की मांग की है।
शक्ति सिंह ने बताया कि उनके पिता चंद्रभान की मौत एक जनवरी, 2010 को मौत हो गई थी, लेकिन निधन के बाद भी उनकी पेंशन बंद नहींहुई और कई माह तक आती रही। पेंशन गलत अंगूठा लगाकर ली जा रही थी जिस पर उन्होंने समाज कल्याण विभाग से आरटीआई के तहत सूचना मांगी थी। इसमें खुलासा हुआ कि उनके पिता के अतिरिक्त गांव की सात महिलाएं और चार पुरुष जो कई माह पहले मर चुके थे कि पेंशन पंचायत में आ रही थीं। झूठे अंगूठे लगाकर सभी की पेंशन गबन की जा रही थी। उन्होंने सभी के मृत्यु प्रमाणपत्र एकत्र कर उपायुक्त और एसडीएम तथा समाज कल्याण विभाग को शिकायत भेजकर कार्रवाई की मांग की है।
वर्जन
मामले को लेकर वर्तमान सरपंच रमेश छौक्कर का कहना है कि 18 के करीब ऐसे लोग थे जिनकी मृत्यु होने के बाद भी पेंशन आ रही थी। उन्होंने सितंबर, 2010 में कार्यभार संभालते हुए सभी की पेंशन को बंद करा दी थी
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रमेश छौक्कर, सरपंच नामुंडा
वर्जन
आरोप निराधार है। जांच में यदि दोषी पाए जाते हैं तो पेंशन की सारी राशि जमा कर देंगे।
श्यामलाल, पूर्व महिला सरपंच पति
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ग्रामीण शक्ति सिंह का आरोप है कि मृत्यु होने के बाद भी गलत अंगूठे लगाकर सरपंच ने 2007-10 तक एक दर्जन लोगों की पेंशन हड़प ली। सूचना अधिकार के तहत जानकारी लेने के बाद शक्ति सिंह ने मामले की शिकायत एसडीएम, उपायुक्त और समाज कल्याण विभाग को भेजकर मामले की जांच कर दोषी के खिलाफ उचित कार्रवाई और पेंशन राशि ब्याज सहित वापिस लेने की मांग की है।
शक्ति सिंह ने बताया कि उनके पिता चंद्रभान की मौत एक जनवरी, 2010 को मौत हो गई थी, लेकिन निधन के बाद भी उनकी पेंशन बंद नहींहुई और कई माह तक आती रही। पेंशन गलत अंगूठा लगाकर ली जा रही थी जिस पर उन्होंने समाज कल्याण विभाग से आरटीआई के तहत सूचना मांगी थी। इसमें खुलासा हुआ कि उनके पिता के अतिरिक्त गांव की सात महिलाएं और चार पुरुष जो कई माह पहले मर चुके थे कि पेंशन पंचायत में आ रही थीं। झूठे अंगूठे लगाकर सभी की पेंशन गबन की जा रही थी। उन्होंने सभी के मृत्यु प्रमाणपत्र एकत्र कर उपायुक्त और एसडीएम तथा समाज कल्याण विभाग को शिकायत भेजकर कार्रवाई की मांग की है।
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मामले को लेकर वर्तमान सरपंच रमेश छौक्कर का कहना है कि 18 के करीब ऐसे लोग थे जिनकी मृत्यु होने के बाद भी पेंशन आ रही थी। उन्होंने सितंबर, 2010 में कार्यभार संभालते हुए सभी की पेंशन को बंद करा दी थी
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रमेश छौक्कर, सरपंच नामुंडा
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आरोप निराधार है। जांच में यदि दोषी पाए जाते हैं तो पेंशन की सारी राशि जमा कर देंगे।
श्यामलाल, पूर्व महिला सरपंच पति