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पीएफ विभाग को मिली 5 करोड रुपये की राशि, अभी तक
Updated Wed, 30 May 2018 12:44 AM IST
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कर्मचारियों को पीएफ के दायरे में नहीं ला रहे कंपनी संचालक
पीएफ विभाग को मिली 5 करोड़ रुपये की राशि, अभी तक 8 जिले के कर्मचारियों ने 1 करोड़ रुपये पर ही जताया हक
अंकुर मुंढाल
पानीपत।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस साल आम बजट में अलग-अलग क्षेत्रीय पीएफ विभाग के लिए राशि का प्रावधान किया था। इसके पीछे सरकार की मंशा थी कि अधिक से अधिक कर्मचारियों को पीएफ के दायरे में लाया जा सके और उन्हें इसके लाभ दिए जा सके। इसी संदर्भ में केंद्र सरकार ने क्षेत्रीय पीएफ विभाग करनाल को 5 करोड़ रुपये की राशि दी थी। लेकिन अभी तक 8 जिले के कर्मचारियों ने 1 करोड़ रुपये की राशि पर ही हक जताया है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सभी पीएफ आयुक्त को आदेश दिए थे कि जो भी नया कर्मचारी अब पीएफ के दायरे में आएगा, उसका पीएफ शेयर केंद्र सरकार स्वयं तीन साल के लिए जमा करेगी। पीएफ आयुक्त को सख्त हिदायत दी गई थी कि वे फैक्टरियों और व्यावसायिक संस्थानों का दौरा कर कर्मचारियों को पीएफ के दायरे में आने के प्रति जागरूक करेंगे। लेकिन अभी तक नाम-मात्र के कर्मचारी ही है जो पीएफ के दायरे में आए हैं।
उल्लेखनीय है कि क्षेत्रीय पीएफ करनाल के अंतर्गत सोनीपत, पानीपत, करनाल, कुरुक्षेत्र, अंबाला, यमुनानगर, कैथल और पंचकूला जिले आते हैं। फैक्टरियों और व्यावसायिक संस्थानों के संचालक इसलिए नहीं लेकर आ रहे कि अगर एक बार वे अपनी इच्छा से कर्मचारियों को पीएफ को दायरे में लेकर आ गए तो पीएफ विभाग के आला अधिकारी उनसे पूछेंगे कि अब तक क्यों कर्मचारियों को पीएफ के लाभ से वंचित रखा गया था। इस कारण संचालक कतरा रहे है। वहीं दबी जुबान से एक उद्यमी ने बता कि मोदी सरकार अभी तो 3 साल के लिए कर्मचारियों का पीएफ शेयर सरकारी खाते से जमा करवा रही है। यह सरकार की चाल है कि 3 साल के बाद कर्मचारी पीएफ की मुख्य धारा में आ जाएंगे और उसके बाद संचालक को खुद पीएफ शेयर जमा करना पड़ेगा, जिसकी वजह से उन पर वित्तीय बोझ बढ़ जाएगा।
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उड़नदस्तेे छापेमारी कर जब्त करेंगे वित्तीय कागजात : नैन
पिछले डेढ़ महीने से फैक्टरियों और व्यावसायिक संस्थान के संचालकों से अनुरोध किया जा रहा है कि वे अपने यहां काम करने वाले कर्मचारियों को पीएफ के दायरे में लेने के लिए उनका पीएफ खाता खुलवा दें। नया पीएफ धारक का पीएफ शेयर तीन वर्षों तक केंद्र सरकार खुद करेंगी। इसके लिए सरकार ने राशि भी दी है। जिन फैक्टरियों और व्यवसायिक संस्थानों के संचालक अपने कर्मचारियों को पीएफ के दायरे में नहीं लेकर आ रहे हैं, अब अगले महीने से विभागीय उड़नदस्ते उन संस्थानों पर छापेमारी कर उनके वित्तीय कागजातों को जब्त करेंगे और कागजात की जांच करेंगे। दोषी पाए जाने पर कार्रवाई की जाएगी।
- अमित नैन, सहायक आयुक्त, पीएफ विभाग
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पीएफ विभाग को मिली 5 करोड़ रुपये की राशि, अभी तक 8 जिले के कर्मचारियों ने 1 करोड़ रुपये पर ही जताया हक
अंकुर मुंढाल
पानीपत।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस साल आम बजट में अलग-अलग क्षेत्रीय पीएफ विभाग के लिए राशि का प्रावधान किया था। इसके पीछे सरकार की मंशा थी कि अधिक से अधिक कर्मचारियों को पीएफ के दायरे में लाया जा सके और उन्हें इसके लाभ दिए जा सके। इसी संदर्भ में केंद्र सरकार ने क्षेत्रीय पीएफ विभाग करनाल को 5 करोड़ रुपये की राशि दी थी। लेकिन अभी तक 8 जिले के कर्मचारियों ने 1 करोड़ रुपये की राशि पर ही हक जताया है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सभी पीएफ आयुक्त को आदेश दिए थे कि जो भी नया कर्मचारी अब पीएफ के दायरे में आएगा, उसका पीएफ शेयर केंद्र सरकार स्वयं तीन साल के लिए जमा करेगी। पीएफ आयुक्त को सख्त हिदायत दी गई थी कि वे फैक्टरियों और व्यावसायिक संस्थानों का दौरा कर कर्मचारियों को पीएफ के दायरे में आने के प्रति जागरूक करेंगे। लेकिन अभी तक नाम-मात्र के कर्मचारी ही है जो पीएफ के दायरे में आए हैं।
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उल्लेखनीय है कि क्षेत्रीय पीएफ करनाल के अंतर्गत सोनीपत, पानीपत, करनाल, कुरुक्षेत्र, अंबाला, यमुनानगर, कैथल और पंचकूला जिले आते हैं। फैक्टरियों और व्यावसायिक संस्थानों के संचालक इसलिए नहीं लेकर आ रहे कि अगर एक बार वे अपनी इच्छा से कर्मचारियों को पीएफ को दायरे में लेकर आ गए तो पीएफ विभाग के आला अधिकारी उनसे पूछेंगे कि अब तक क्यों कर्मचारियों को पीएफ के लाभ से वंचित रखा गया था। इस कारण संचालक कतरा रहे है। वहीं दबी जुबान से एक उद्यमी ने बता कि मोदी सरकार अभी तो 3 साल के लिए कर्मचारियों का पीएफ शेयर सरकारी खाते से जमा करवा रही है। यह सरकार की चाल है कि 3 साल के बाद कर्मचारी पीएफ की मुख्य धारा में आ जाएंगे और उसके बाद संचालक को खुद पीएफ शेयर जमा करना पड़ेगा, जिसकी वजह से उन पर वित्तीय बोझ बढ़ जाएगा।
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उड़नदस्तेे छापेमारी कर जब्त करेंगे वित्तीय कागजात : नैन
पिछले डेढ़ महीने से फैक्टरियों और व्यावसायिक संस्थान के संचालकों से अनुरोध किया जा रहा है कि वे अपने यहां काम करने वाले कर्मचारियों को पीएफ के दायरे में लेने के लिए उनका पीएफ खाता खुलवा दें। नया पीएफ धारक का पीएफ शेयर तीन वर्षों तक केंद्र सरकार खुद करेंगी। इसके लिए सरकार ने राशि भी दी है। जिन फैक्टरियों और व्यवसायिक संस्थानों के संचालक अपने कर्मचारियों को पीएफ के दायरे में नहीं लेकर आ रहे हैं, अब अगले महीने से विभागीय उड़नदस्ते उन संस्थानों पर छापेमारी कर उनके वित्तीय कागजातों को जब्त करेंगे और कागजात की जांच करेंगे। दोषी पाए जाने पर कार्रवाई की जाएगी।
- अमित नैन, सहायक आयुक्त, पीएफ विभाग