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खेलो इंडिया गेम्स : 37 खेल श्रेणियों में 28 खिलाड़ी दिखाएंगे दम
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पानीपत। खेलो इंडिया के विभिन्न मुकाबलों में जिले के 28 खिलाड़ी दमखम दिखाएंगे। 15 से 19 वर्ष की उम्र के खिलाड़ी 37 पदकों के लिए जी जान झोंक देने के लिए तैयार हैं। इनमें ज्यादातर खिलाड़ी पहली बार खेलो इंडिया गेम्स का हिस्सा होंगे। खास बात यह है कि हरियाणा की बॉस्केटबॉल टीम के कप्तान पानीपत के साहिल होंगे। खेलो इंडिया गेम्स के लिए चयनित सूची में पानीपत से 29 खिलाड़ियों के नाम आए हैं, लेकिन एक नाम गलती से आ गया है, जो यूपी का खिलाड़ी है और पानीपत में उसका कोई रिकार्ड नहीं है।
1.नेहा, डिस्कस थ्रो
- गांव इसराना की रहने वाली नेहा जागलान नेशनल में चार पदक जीत चुकी हैं। पिछली बार नेशनल में चौथा स्थान रहा था। पिछले दो साल से लिगामेंट में चोट के कारण परेशान थीं। इससे उबरकर खेलो इंडिया गेम्स में दमखम दिखाएंगी। उन्हें उम्मीद है कि पदक लेकर आएंगी। नेशनल के आधार पर ही नेहा का खेलो इंडिया में चयन हुआ है।
2. साहिल, बॉस्केटबॉल
- साहिल अंतरराष्ट्रीय स्तर पर टीम को गोल्ड मेडल दिला चुके हैं। 2014 से ही खेलना शुरू किया था। पिछले तीन साल से कप्तान के तौर पर टीम के साथ मेडल जीत रहे हैं। 16 बार नेशनल खेल चुके हैं। नेशनल पर तीन स्वर्ण, एक कांस्य पदक जीतने के साथ ही अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी स्वर्ण पदक जीता है। खेलो इंडिया गेम्स के लिए अभ्यास तीन गुना कर दिया है।
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3. अंजू, बॉस्केटबॉल
- गांव नांगलखेड़ी की रहने वाली अंजू पिछले चार साल से बॉस्केटबॉल खेल रही हैं। हरियाणा की टीम को अपने बेहतरीन खेल से जीत दिलाती आ रही हैं। उनके पिता का सपना था कि बेटी खिलाड़ी बने, जिसके लिए अंजू ने दिन रात मेहनत की और मुकाम हासिल किया। राज्य स्तर पर 10 पदक जीतने के साथ ही नेशनल में उनका चौथा स्थान रहा था।
4. मुस्कान, बॉस्केटबॉल
- इसराना के गांव सींक की रहने वाली मुस्कान ने पांच साल पहले खेलना शुरू किया था। उन्होंने बॉस्केटबॉल के खेल को चुना और उसमें लगातार अपनी टीम के लिए शानदार प्रदर्शन करती आ रही हैं। नेशनल में कांस्य और राज्य स्तर पर सात पदक जीत चुकी हैं। रोज आठ घंटे तक अभ्यास कर रही हैं, जिससे खेलो इंडिया गेम्स में उनका प्रदर्शन सर्वश्रेष्ठ रहे।
5. मोनिका, हैंडबॉल
इसराना के गांव अहर की रहने वाली मोनिका ने 10वीं कक्षा में खेलना शुरू किया था। शुरुआत में तीन साल बिना कोच के खेलीं। मोनिका के बड़े भाई पहलवान रामपाल ने उन्हें खेलने के लिए प्रेरित किया। जिसके बाद कोच धर्मजीत और राजेश टूरण ने उनके हैंडबॉल के खेल को निखारा और उनकी तकनीक पर काम किया।
6. नितिन, कबड्डी
इसराना के गांव नौल्था की रहने वाले नितिन ने आठ साल पहले गांव के खिलाड़ियों को खेलता देख खेलना शुरू किया था। जूनियर नेशनल में तीसरा स्थान प्राप्त किया था। राज्य स्तर पर अब तक पांच पदक जीत चुके हैं। स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया सोनीपत में रहकर अपने खेल को निखार रहे हैं। खेलो इंडिया कैंप में अभ्यास कर रहे हैं।
7. विकास, कबड्डी
इसराना के गांव नौल्था के रहने वाले विकास ने चार साल पहले गांव में ही कबड्डी खेलना शुरू किया। उन्हें खेल में आगे बढ़ाने में पिता ईश्वर ने साथ दिया। जिसकी बदौलत अब तक उनका प्रदर्शन शानदार रहा। गांव में अभ्यास करते थे और अब पंचकूला में खेलो इंडिया कैंप में अभ्यास कर रहे हैं।
8. हिमांशु, कबड्डी
इसराना के गांव नौल्था निवासी खिलाड़ी हिमांशु भी अपने गांव में खिलाड़ियों को खेलता देख खेलना शुरू किया था। खेल शुरू करने के दौरान सोचा भी नहीं था कि इतना आगे तक आ सकेंगे। उनकी उम्र महज 15 साल की है, लेकिन प्रदर्शन बेहद उम्दा रहा है। कोच सोनू उन्हें अभ्यास करवा रहे हैं।
9.नितिन शर्मा, हॉकी
गांव ऊंटला के रहने वाले नितिन पानीपत से खेलो इंडिया गेम्स में अकेले हॉकी के खिलाड़ी है। गांव के ग्राउंड से हॉकी की बारीकियां सीखने की शुरुआत की थी। पहले बड़े भाई के साथ अभ्यास करते थे, अब स्टेडियम में अभ्यास कर रहे हैं। लगातार चौथी बार खेलो इंडिया में प्रदर्शन करेंगे। स्कूल नेशनल में तीन स्वर्ण पदक जीत चुके हैं।
10.अमित, खो-खो
समालखा के गांव मनाना के रहने वाले अमित ने गांव में खो-खो के खेल के क्रेज को बचपन से ही देखा। बड़ा होने के साथ ही इस खेल के प्रति रुचि बढ़ती गई और बेहतरीन खो-खो खिलाड़ी हैं। महज 19 वर्ष की उम्र में ही अपनी टीम को कई मेडल दिलवा चुके हैं। नेशनल में खेलना शुरू किया है। अभी पंचकूला कैंप में अभ्यास कर रहे हैं।
11. आशीष, खो-खो
गांव बलाना के रहने वाले आशीष ने भी गांव के खिलाड़ियों को देखकर ही खो-खो खेलना शुरू किया था। पिछले चार साल से खेल रहे हैं। राज्य स्तरीय स्पर्धाओं में दो पदक जीत चुके हैं। पिता रोहताश का सपना है कि बेटा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खेले, जिसे साकार करने के लिए आशीष जी जान से जुटे हैं।
12. गौरव शर्मा, खो-खो
गांव आट्टा के रहने वाले गौरव शर्मा ने चार साल पहले खो-खो खेलना शुरू किया था। गांव में ज्यादा खिलाड़ी नहीं होने के बाद भी उन्होंने खेल को कभी नहीं छोड़ा। इस वक्त अपने खेल को निखारने में जुटे हैं। राज्य स्तर पर तीन स्वर्ण पदक जीत चुके हैं। पहली बार खेलो इंडिया में खेलेंगे।
13. आशीष छौक्कर, वॉलीबॉल
गांव भादड़ के रहने वाले आशीष ने कोरोना महामारी के दौरान खेल की शुरुआत की। इस दौरान अभ्यास कर खेल को सुधारा और नेशनल में चार पदक जीते। गांव में ही खेलना शुरू किया। पहली बार खेलो इंडिया में भाग ले रहे हैं। उन्हें उम्मीद है कि खेलो इंडिया गेम्स में उनका प्रदर्शन अच्छा रहेगा।
14. शिवानी, वॉलीबॉल
सनौली खंड के गांव जलालपुर-प्रथम की रहने वाली वॉलीबॉल की खिलाड़ी शिवानी पिछले साल से खेल रही हैं। 18 वर्ष की उम्र में ही कई स्वर्ण पदक जीत चुकी हैं। पिता बिजेंद्र रावल ही उनके कोच हैं, जो बेटी के साथ दिन-रात मेहनत कर रहे हैं। अंडर-14 खेलो इंडिया में स्वर्ण जीतने के साथ ही चार बार नेशनल खेल चुकी हैं। पहले कबड्डी खेलती थीं।
15. कीर्ति, वॉलीबॉल
सनौली खंड के गांव जलालपुर-प्रथम की रहने वाली कीर्ति भी अंडर-14 खेलो इंडिया में स्वर्ण पदक जीत चुकी हैं। सब जूनियर में कांस्य जीत चुकी हैं। पिता मजदूरी करते हैं। एशिया कैंप अंडर-20 के लिए भुवनेश्वर में अभ्यास कर रही हैं।
16. तन्नू राठी, वॉलीबाल
उत्तर प्रदेश की रहने वाली तन्नू पानीपत में ही अभ्यास करती है। नवज्योति स्कूल में पढ़ने के दौरान खेलना शुरू किया था। कोच बिजेंद्र रावल ही अभ्यास करवाते हैं। अब तक छह बार नेशनल खेल चुकी हैं। अंडर-18 एशिया के लिए चयन हो चुका है। भुवनेश्वर कैंप में अभ्यास कर रही हैं।
17. अनू रानी, वॉलीबॉल
गांव जलालपुर प्रथम की रहने वाली अनू पिछले चार साल से वॉलीबॉल खेल रही हैं। स्कूल अंडर-14 में मेडल जीत चुकी है। पिता सतपाल का सपना है कि बेटी अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी बने। पंचकूला खेलो इंडिया कैंप में अभ्यास कर रही हैं।
18. अतुल, कुश्ती
इसराना के गांव पूठर के रहने वाले अतुल 2015 से कुश्ती खेल रहे हैं। नेशनल जूनियर में कांस्य पदक जीत चुके हैं। हरियाणा सीनियर वर्ग में स्वर्ण जीतने के साथ ही राज्य स्तरीय प्रतियोगिताओं में पांच पदक जीत चुके हैं। स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया हिसार में रहकर अभ्यास कर रहे हैं।
19. कोमल पांचाल, कुश्ती
समालखा के गांव पट्टीकल्याणा की रहने वाली कोमल पांचाल ने छह साल पहले कुश्ती खेलना शुरू की थी। महज 17 साल की उम्र में अब तक पांच अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में खेल चुकी हैं। दो बार वर्ल्ड चैंपियन भी रह चुकी हैं। नेशनल में पांच पदक जीत चुकी हैं।
20. सागर जागलान, कुश्ती
इसराना के गांव नौल्था के रहने वाले सागर जागलान कुश्ती एशियन चैंपियनशिप के विजेता रह चुके हैं। सात साल पहले 10 वर्ष की उम्र में खेलना शुरू किया था। नेशनल में सात मेडल और राज्य स्तर पर में 14 मेडल जीत चुके हैं। पहली बार खेलो इंडिया में खेलेंगे। खेलो इंडिया कैंप में ही अभ्यास कर रहे हैं।
21. रेखा, थांग ता
पानीपत की रहने वाली रेखा ने एक साल पहले ही थांग ता खेलना शुरू किया था। एक साल की मेहनत से ही उन्होंने नेशनल में छह पदक और इंटरनेशनल में एक रजत पदक प्राप्त किया है। पिता सुभाष चंद्र का सपना है कि बेटी खेल में देश का नाम रोशन करे। कोच संदीप अभ्यास करवाते हैं।
22. मुस्कान, खो-खो
गांव बलाना की रहने वाली मुस्कान ने पांच साल पहले खेलना शुरू किया था। मुस्कान को बचपन से ही खेलने का शौक था। जिसकी वजह से नौ साल की उम्र में ग्राउंड में पहुंच जाती थीं, जिसकी बदौलत अब तक राज्य एवं राष्ट्रीय स्तर पर 16 पदक प्राप्त किए हैं।
23. वंश पन्नू, तैराक
तैराक वंश पन्नू खेलो इंडिया गेम्स में तीन श्रेणियों में खेलेंगे। 50 और 100 मीटर के साथ ही ब्रेस्ट स्ट्रोक में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाएंगे। तीन साल पहले ही वंश ने तैराकी शुरू की थी। खेलो इंडिया के ट्रायल में ही वंश ने तीन कैटेगरी में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया था। वंश को तीन तरह की तैराकी आती है, लेकिन वह ब्रेस्ट स्ट्रोक में सर्वश्रेष्ठ हैं।
24. रूपाली, कराटे
मॉडल टाउन पानीपत की रहने वाली रूपाली को बचपन से ही टीवी देखकर कराटे खेलना का शौक पैदा हुआ था। उन्होंने कराटे को खेल के तौर पर अपनाया। इस बार दो खेल श्रेणियों में खेलेगी। पहली श्रेणी हाई किक और दूसरी डिफेंस तकनीक है। दोनों ही श्रेणियों में पदक जीतने का उनके पूर्ण विश्वास है।
25. सुमेधा, कराटे
गोपाल कॉलोनी की रहने वाली सुमेधा पिछले सात साल से कराटे खेल रही हैं। 15 साल की सुमेधा ने आठ साल की उम्र में ही खेलना शुरू कर दिया था। राष्ट्रीय और राज्य स्तर पर अब तक कुल 13 पदक जीत चुकी हैं। पहली बार खेलो इंडिया में खेलेंगी।
26. जतिन, कराटे
पानीपत की पूरेवाल कॉलोनी के रहने वाले जतिन ने सेल्फ डिफेंस के लिए कराटे खेलना शुरू किया था। अच्छा प्रदर्शन देख उनके कोच ने कहा कि वह इसे खेल के तौर पर अपनाएं। जिसके बाद से जतिन राज्य स्तर पर तीन और राष्ट्रीय स्तर पर एक पदक जीत चुके हैं। खेलो इंडिया कैंप में ही अभ्यास कर रहे हैं।
27. सरिता, खोखो
समालखा के गांव मनाना की रहने वाली सरिता के गांव में खो-खो के सबसे ज्यादा खिलाड़ी हैं। गांव में खो-खो को लेकर युवाओं में क्रेज है। उन्होंने भी इसी क्रेज के चलते खो-खो खेलना सीखा । पिछले चार साल से खो-खो खेल रही है। पिता किसान हैं। राज्य स्तर पर तीन पदक जीत चुकी हैं और पहली बार खेलो इंडिया में खेलेंगी।
28. राजी, कराटे
स्कूल में खेल की शुरुआत करने वाली राजी ने दोस्तों के साथ सेल्फ डिफेंस के लिए कराटे सीखना शुरू किया था। पिता कश्मीरी लाल ने बेटी का खेल में पूरा साथ दिया। कोच परविंद्र उन्हें अभ्यास कराते हैं। नेशनल खेल चुकी है। राज्य स्तर पर तीन पदक प्राप्त कर चुकी हैं।
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1.नेहा, डिस्कस थ्रो
- गांव इसराना की रहने वाली नेहा जागलान नेशनल में चार पदक जीत चुकी हैं। पिछली बार नेशनल में चौथा स्थान रहा था। पिछले दो साल से लिगामेंट में चोट के कारण परेशान थीं। इससे उबरकर खेलो इंडिया गेम्स में दमखम दिखाएंगी। उन्हें उम्मीद है कि पदक लेकर आएंगी। नेशनल के आधार पर ही नेहा का खेलो इंडिया में चयन हुआ है।
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2. साहिल, बॉस्केटबॉल
- साहिल अंतरराष्ट्रीय स्तर पर टीम को गोल्ड मेडल दिला चुके हैं। 2014 से ही खेलना शुरू किया था। पिछले तीन साल से कप्तान के तौर पर टीम के साथ मेडल जीत रहे हैं। 16 बार नेशनल खेल चुके हैं। नेशनल पर तीन स्वर्ण, एक कांस्य पदक जीतने के साथ ही अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी स्वर्ण पदक जीता है। खेलो इंडिया गेम्स के लिए अभ्यास तीन गुना कर दिया है।
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3. अंजू, बॉस्केटबॉल
- गांव नांगलखेड़ी की रहने वाली अंजू पिछले चार साल से बॉस्केटबॉल खेल रही हैं। हरियाणा की टीम को अपने बेहतरीन खेल से जीत दिलाती आ रही हैं। उनके पिता का सपना था कि बेटी खिलाड़ी बने, जिसके लिए अंजू ने दिन रात मेहनत की और मुकाम हासिल किया। राज्य स्तर पर 10 पदक जीतने के साथ ही नेशनल में उनका चौथा स्थान रहा था।
4. मुस्कान, बॉस्केटबॉल
- इसराना के गांव सींक की रहने वाली मुस्कान ने पांच साल पहले खेलना शुरू किया था। उन्होंने बॉस्केटबॉल के खेल को चुना और उसमें लगातार अपनी टीम के लिए शानदार प्रदर्शन करती आ रही हैं। नेशनल में कांस्य और राज्य स्तर पर सात पदक जीत चुकी हैं। रोज आठ घंटे तक अभ्यास कर रही हैं, जिससे खेलो इंडिया गेम्स में उनका प्रदर्शन सर्वश्रेष्ठ रहे।
5. मोनिका, हैंडबॉल
इसराना के गांव अहर की रहने वाली मोनिका ने 10वीं कक्षा में खेलना शुरू किया था। शुरुआत में तीन साल बिना कोच के खेलीं। मोनिका के बड़े भाई पहलवान रामपाल ने उन्हें खेलने के लिए प्रेरित किया। जिसके बाद कोच धर्मजीत और राजेश टूरण ने उनके हैंडबॉल के खेल को निखारा और उनकी तकनीक पर काम किया।
6. नितिन, कबड्डी
इसराना के गांव नौल्था की रहने वाले नितिन ने आठ साल पहले गांव के खिलाड़ियों को खेलता देख खेलना शुरू किया था। जूनियर नेशनल में तीसरा स्थान प्राप्त किया था। राज्य स्तर पर अब तक पांच पदक जीत चुके हैं। स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया सोनीपत में रहकर अपने खेल को निखार रहे हैं। खेलो इंडिया कैंप में अभ्यास कर रहे हैं।
7. विकास, कबड्डी
इसराना के गांव नौल्था के रहने वाले विकास ने चार साल पहले गांव में ही कबड्डी खेलना शुरू किया। उन्हें खेल में आगे बढ़ाने में पिता ईश्वर ने साथ दिया। जिसकी बदौलत अब तक उनका प्रदर्शन शानदार रहा। गांव में अभ्यास करते थे और अब पंचकूला में खेलो इंडिया कैंप में अभ्यास कर रहे हैं।
8. हिमांशु, कबड्डी
इसराना के गांव नौल्था निवासी खिलाड़ी हिमांशु भी अपने गांव में खिलाड़ियों को खेलता देख खेलना शुरू किया था। खेल शुरू करने के दौरान सोचा भी नहीं था कि इतना आगे तक आ सकेंगे। उनकी उम्र महज 15 साल की है, लेकिन प्रदर्शन बेहद उम्दा रहा है। कोच सोनू उन्हें अभ्यास करवा रहे हैं।
9.नितिन शर्मा, हॉकी
गांव ऊंटला के रहने वाले नितिन पानीपत से खेलो इंडिया गेम्स में अकेले हॉकी के खिलाड़ी है। गांव के ग्राउंड से हॉकी की बारीकियां सीखने की शुरुआत की थी। पहले बड़े भाई के साथ अभ्यास करते थे, अब स्टेडियम में अभ्यास कर रहे हैं। लगातार चौथी बार खेलो इंडिया में प्रदर्शन करेंगे। स्कूल नेशनल में तीन स्वर्ण पदक जीत चुके हैं।
10.अमित, खो-खो
समालखा के गांव मनाना के रहने वाले अमित ने गांव में खो-खो के खेल के क्रेज को बचपन से ही देखा। बड़ा होने के साथ ही इस खेल के प्रति रुचि बढ़ती गई और बेहतरीन खो-खो खिलाड़ी हैं। महज 19 वर्ष की उम्र में ही अपनी टीम को कई मेडल दिलवा चुके हैं। नेशनल में खेलना शुरू किया है। अभी पंचकूला कैंप में अभ्यास कर रहे हैं।
11. आशीष, खो-खो
गांव बलाना के रहने वाले आशीष ने भी गांव के खिलाड़ियों को देखकर ही खो-खो खेलना शुरू किया था। पिछले चार साल से खेल रहे हैं। राज्य स्तरीय स्पर्धाओं में दो पदक जीत चुके हैं। पिता रोहताश का सपना है कि बेटा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खेले, जिसे साकार करने के लिए आशीष जी जान से जुटे हैं।
12. गौरव शर्मा, खो-खो
गांव आट्टा के रहने वाले गौरव शर्मा ने चार साल पहले खो-खो खेलना शुरू किया था। गांव में ज्यादा खिलाड़ी नहीं होने के बाद भी उन्होंने खेल को कभी नहीं छोड़ा। इस वक्त अपने खेल को निखारने में जुटे हैं। राज्य स्तर पर तीन स्वर्ण पदक जीत चुके हैं। पहली बार खेलो इंडिया में खेलेंगे।
13. आशीष छौक्कर, वॉलीबॉल
गांव भादड़ के रहने वाले आशीष ने कोरोना महामारी के दौरान खेल की शुरुआत की। इस दौरान अभ्यास कर खेल को सुधारा और नेशनल में चार पदक जीते। गांव में ही खेलना शुरू किया। पहली बार खेलो इंडिया में भाग ले रहे हैं। उन्हें उम्मीद है कि खेलो इंडिया गेम्स में उनका प्रदर्शन अच्छा रहेगा।
14. शिवानी, वॉलीबॉल
सनौली खंड के गांव जलालपुर-प्रथम की रहने वाली वॉलीबॉल की खिलाड़ी शिवानी पिछले साल से खेल रही हैं। 18 वर्ष की उम्र में ही कई स्वर्ण पदक जीत चुकी हैं। पिता बिजेंद्र रावल ही उनके कोच हैं, जो बेटी के साथ दिन-रात मेहनत कर रहे हैं। अंडर-14 खेलो इंडिया में स्वर्ण जीतने के साथ ही चार बार नेशनल खेल चुकी हैं। पहले कबड्डी खेलती थीं।
15. कीर्ति, वॉलीबॉल
सनौली खंड के गांव जलालपुर-प्रथम की रहने वाली कीर्ति भी अंडर-14 खेलो इंडिया में स्वर्ण पदक जीत चुकी हैं। सब जूनियर में कांस्य जीत चुकी हैं। पिता मजदूरी करते हैं। एशिया कैंप अंडर-20 के लिए भुवनेश्वर में अभ्यास कर रही हैं।
16. तन्नू राठी, वॉलीबाल
उत्तर प्रदेश की रहने वाली तन्नू पानीपत में ही अभ्यास करती है। नवज्योति स्कूल में पढ़ने के दौरान खेलना शुरू किया था। कोच बिजेंद्र रावल ही अभ्यास करवाते हैं। अब तक छह बार नेशनल खेल चुकी हैं। अंडर-18 एशिया के लिए चयन हो चुका है। भुवनेश्वर कैंप में अभ्यास कर रही हैं।
17. अनू रानी, वॉलीबॉल
गांव जलालपुर प्रथम की रहने वाली अनू पिछले चार साल से वॉलीबॉल खेल रही हैं। स्कूल अंडर-14 में मेडल जीत चुकी है। पिता सतपाल का सपना है कि बेटी अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी बने। पंचकूला खेलो इंडिया कैंप में अभ्यास कर रही हैं।
18. अतुल, कुश्ती
इसराना के गांव पूठर के रहने वाले अतुल 2015 से कुश्ती खेल रहे हैं। नेशनल जूनियर में कांस्य पदक जीत चुके हैं। हरियाणा सीनियर वर्ग में स्वर्ण जीतने के साथ ही राज्य स्तरीय प्रतियोगिताओं में पांच पदक जीत चुके हैं। स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया हिसार में रहकर अभ्यास कर रहे हैं।
19. कोमल पांचाल, कुश्ती
समालखा के गांव पट्टीकल्याणा की रहने वाली कोमल पांचाल ने छह साल पहले कुश्ती खेलना शुरू की थी। महज 17 साल की उम्र में अब तक पांच अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में खेल चुकी हैं। दो बार वर्ल्ड चैंपियन भी रह चुकी हैं। नेशनल में पांच पदक जीत चुकी हैं।
20. सागर जागलान, कुश्ती
इसराना के गांव नौल्था के रहने वाले सागर जागलान कुश्ती एशियन चैंपियनशिप के विजेता रह चुके हैं। सात साल पहले 10 वर्ष की उम्र में खेलना शुरू किया था। नेशनल में सात मेडल और राज्य स्तर पर में 14 मेडल जीत चुके हैं। पहली बार खेलो इंडिया में खेलेंगे। खेलो इंडिया कैंप में ही अभ्यास कर रहे हैं।
21. रेखा, थांग ता
पानीपत की रहने वाली रेखा ने एक साल पहले ही थांग ता खेलना शुरू किया था। एक साल की मेहनत से ही उन्होंने नेशनल में छह पदक और इंटरनेशनल में एक रजत पदक प्राप्त किया है। पिता सुभाष चंद्र का सपना है कि बेटी खेल में देश का नाम रोशन करे। कोच संदीप अभ्यास करवाते हैं।
22. मुस्कान, खो-खो
गांव बलाना की रहने वाली मुस्कान ने पांच साल पहले खेलना शुरू किया था। मुस्कान को बचपन से ही खेलने का शौक था। जिसकी वजह से नौ साल की उम्र में ग्राउंड में पहुंच जाती थीं, जिसकी बदौलत अब तक राज्य एवं राष्ट्रीय स्तर पर 16 पदक प्राप्त किए हैं।
23. वंश पन्नू, तैराक
तैराक वंश पन्नू खेलो इंडिया गेम्स में तीन श्रेणियों में खेलेंगे। 50 और 100 मीटर के साथ ही ब्रेस्ट स्ट्रोक में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाएंगे। तीन साल पहले ही वंश ने तैराकी शुरू की थी। खेलो इंडिया के ट्रायल में ही वंश ने तीन कैटेगरी में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया था। वंश को तीन तरह की तैराकी आती है, लेकिन वह ब्रेस्ट स्ट्रोक में सर्वश्रेष्ठ हैं।
24. रूपाली, कराटे
मॉडल टाउन पानीपत की रहने वाली रूपाली को बचपन से ही टीवी देखकर कराटे खेलना का शौक पैदा हुआ था। उन्होंने कराटे को खेल के तौर पर अपनाया। इस बार दो खेल श्रेणियों में खेलेगी। पहली श्रेणी हाई किक और दूसरी डिफेंस तकनीक है। दोनों ही श्रेणियों में पदक जीतने का उनके पूर्ण विश्वास है।
25. सुमेधा, कराटे
गोपाल कॉलोनी की रहने वाली सुमेधा पिछले सात साल से कराटे खेल रही हैं। 15 साल की सुमेधा ने आठ साल की उम्र में ही खेलना शुरू कर दिया था। राष्ट्रीय और राज्य स्तर पर अब तक कुल 13 पदक जीत चुकी हैं। पहली बार खेलो इंडिया में खेलेंगी।
26. जतिन, कराटे
पानीपत की पूरेवाल कॉलोनी के रहने वाले जतिन ने सेल्फ डिफेंस के लिए कराटे खेलना शुरू किया था। अच्छा प्रदर्शन देख उनके कोच ने कहा कि वह इसे खेल के तौर पर अपनाएं। जिसके बाद से जतिन राज्य स्तर पर तीन और राष्ट्रीय स्तर पर एक पदक जीत चुके हैं। खेलो इंडिया कैंप में ही अभ्यास कर रहे हैं।
27. सरिता, खोखो
समालखा के गांव मनाना की रहने वाली सरिता के गांव में खो-खो के सबसे ज्यादा खिलाड़ी हैं। गांव में खो-खो को लेकर युवाओं में क्रेज है। उन्होंने भी इसी क्रेज के चलते खो-खो खेलना सीखा । पिछले चार साल से खो-खो खेल रही है। पिता किसान हैं। राज्य स्तर पर तीन पदक जीत चुकी हैं और पहली बार खेलो इंडिया में खेलेंगी।
28. राजी, कराटे
स्कूल में खेल की शुरुआत करने वाली राजी ने दोस्तों के साथ सेल्फ डिफेंस के लिए कराटे सीखना शुरू किया था। पिता कश्मीरी लाल ने बेटी का खेल में पूरा साथ दिया। कोच परविंद्र उन्हें अभ्यास कराते हैं। नेशनल खेल चुकी है। राज्य स्तर पर तीन पदक प्राप्त कर चुकी हैं।