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Panipat News: ढाई हजार पंजीकरण, 120 को मिली नई रोशनी

Wed, 10 Jun 2026 02:33 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, पानीपत
संवाद न्यूज एजेंसी, पानीपत Updated Wed, 10 Jun 2026 02:33 AM IST
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2,500 registrations; 120 received the gift of sight.
कृष्णवंती चुघ। स्रोत : दल
संवाद न्यूज एजेंसी
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पानीपत। लोगों की सोच में सकारात्मक बदलाव आ रहा है, जिसके चलते वे नेत्रदान और अंगदान जैसे पुनीत कार्यों के लिए आगे आ रहे हैं। जिला नागरिक अस्पताल के नेत्रदान वार्ड में वर्ष 2023 से अब तक करीब ढाई हजार लोगों ने नेत्रदान के लिए पंजीकरण कराया है। परिणामस्वरूप, 120 व्यक्तियों के नेत्रदान सफलतापूर्वक संपन्न हो चुके हैं। इन नेत्रदानों से कई अंधेरी जिंदगियों को नई रोशनी मिली है, जिससे समाज में आशा का संचार हुआ है।

नेत्रदान अभियान में जिला नागरिक अस्पताल की टीम जनसेवा दल के सहयोग से सक्रिय भूमिका निभा रही है। यह टीम लगातार लोगों को नेत्रदान के महत्व के बारे में जागरूक कर रही है। इस पहल से मरणोपरांत भी नेत्रदाता दूसरों की आंखों से संसार को देख पा रहे हैं।
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कृष्णवंती की अंतिम इच्छा थी दो जिंदगियों को रोशनी देना -

नेत्रदान के कई हृदयस्पर्शी उदाहरण सामने आए हैं, जो दूसरों को भी प्रेरित कर रहे हैं। यमुना एन्क्लेव के सतीश चुघ और अनिल चुघ ने बताया कि उनके माता-पिता दोनों के मरणोपरांत नेत्रदान हुए थे। उनकी माता कृष्णवंती की यह अंतिम इच्छा थी कि उनके भी पति की तरह नेत्रदान हों। वे चाहती थीं कि उनके नेत्रों से दो अंधेरी जिंदगियों को रोशनी मिल सके। पिछले महीने उनके निधन के बाद, जनसेवा दल के सहयोग से उनके नेत्रों का दान किया गया। अब उनके नेत्र दो लोगों को संसार देखने में मदद कर रहे हैं, जिससे उनकी इच्छा पूरी हुई है।
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मानवता की मिसाल बने किशोर ग्रोवर

अंसल निवासी कांशीगिरी मंदिर के सलाहकार किशोर ग्रोवर ने भी मृत्यु के बाद मानवता की एक मिसाल पेश की। उन्होंने अपने नेत्र दो नेत्रहीन व्यक्तियों को समर्पित किए, जिससे उन्हें दृष्टि मिली। उनकी पत्नी नीलम ग्रोवर और पुत्र साहिल व राजन ग्रोवर ने मिलकर उनकी इस अंतिम इच्छा को पूरा किया।

नीलम ग्रोवर ने बताया कि किशोर ग्रोवर का मानना था कि रक्तदान महादान है और नेत्रदान जीवनदान है। उनका जीवन समाज को यह संदेश देता है कि इंसान की सबसे बड़ी पहचान उसकी सेवा होती है। उन्होंने मरणोपरांत नेत्रदान कर एक प्रेरणादायक उदाहरण स्थापित किया।




वर्जन :

नेत्रदान महादान होता है। प्रत्येक व्यक्ति को इस तरह के कार्य के लिए आगे आना चाहिए। वे इसके लिए लोगों को जागरूक भी करते हैं। लोग लगातार आगे भी आ रहे हैं। -डॉ. केतन, नोडल अधिकरी, नेत्रदान अभियान।

कृष्णवंती चुघ। स्रोत : दल

कृष्णवंती चुघ। स्रोत : दल

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