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40 दिन बाद फिर से हड़ताल, सरकार की चेतावनी के बाद यूनियन ने एक होकर किया चक्का जाम
Updated Tue, 16 Oct 2018 11:09 PM IST
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41 बसें डिपो से निकलीं, 92 का चक्का जाम, परेशान रहे यात्री
40 दिन बाद फिर से हड़ताल, सरकार की चेतावनी के बाद यूनियन ने एक होकर किया चक्का जाम
अमर उजाला ब्यूरो
पानीपत। 40 दिनों बाद एक बार फिर से हरियाणा रोडवेज कर्मचारियों ने हड़ताल का रास्ता अपनाया है। इसका जिले में पूर्ण असर देखने को मिला। हड़ताल के दौरान पानीपत डिपो से सुबह के समय 133 में से 20 बसें निकाली गईं। इसके बाद से बसें पूरी तरह से बंद रहीं।
कुछ लोकल रूट की बसों को डिपो से बहार खड़ा करवा दिया गया था ताकि बसों को निकालने में दिक्कत न हो। बसें न चलने के कारण पानीपत डिपो को 12 से 13 लाख रुपये का नुकसान उठाना पड़ा। वहीं 45 हजार के लगभग यात्रियों को निजी वाहनों व ट्रेन पर निर्भर रहना पड़ा। कुछ छात्र हड़ताल का समर्थन करने के लिए बस धरना स्थल पर भी पहुंचे। हड़ताल के दौरान सभी कर्मचारियों ने अपनी मांगें रखीं। कर्मचारियों ने रोष प्रकट करते हुए प्रशासन के खिलाफ मुर्दाबाद के नारे लगाए।
सर्व कर्मचारी संघ के जिला सचिव तेजपाल ने रोडवेज की हड़ताल का समर्थन करते हुए कहा कि सरकार सभी विभागों का निजीकरण करने का प्रयास कर रही है। महाबीर देशवाल ने कहा कि कर्मचारियों की मांग सरकार को माननी ही पड़ेगी। अगर सरकार युवाओं के रोडवेज का निजीकरण करके युवाओं के लिए रोजगार खत्म करने का प्रयास करेगी तो वो भविष्य में इसी प्रकार की अनिश्चितकालीन हड़ताल करने को मजबूर होंगे। तालमेल कमेटी के नेता भी हरिनारायण शर्मा भी दोपहर दो बजे पहुंचे व कर्मचारियों को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि सरकार ने 36 से 42 रुपये प्रति किलोमीटर के हिसाब से बसे लेने का फैसला बड़ा घोटाला करने के लिए किया है। मुख्यमंत्री मीटिंग तक को तैयार नहीं है।
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सुबह के समय निकाली डिपो से बीस बसें
विभाग के अधिकारियों ने सुबह 4 बजे के बाद दोपहर तक बीस बसें निकालीं, वहीं 33 बसें पहले से ही बस स्टैंड से बाहर थी। यानि सुबह के समय 133 में से 53 बसें डिपो से बाहर थीं। इसके बाद दूसरे रूटों से बसें सुबह आकर डिपो में खड़ी हो गईं, जिसके बाद डिपो में लगातार बसों की संख्या बढ़ती चली गई। जो शाम तक 80 से 92 पर पहुंच गई। वहीं दोपहर एक बजे डिपो से एक हरिद्वार के लिए व दो बसे बिला बोर्ड के खाली ही निकल गई।
86 बसें चली हैं बाकी भी चलवाएंगे : जीएम
जीएम एसपी प्रमार सिंह ने कहा कि उन्होंने सुबह से 86 बसों को चलाया है। परिचालकों की कमी होने के कारण सबइंस्पेक्टरों को ड्राइवर के साथ भेजा जा सकता है। अगर वह भी नहीं गए तो जनता की सहायता के लिए केवल चालक को गाड़ी देकर भेज दिया जाएगा।
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41 बसें डिपो से निकलीं, 92 का चक्का जाम, परेशान रहे यात्री
40 दिन बाद फिर से हड़ताल, सरकार की चेतावनी के बाद यूनियन ने एक होकर किया चक्का जाम
अमर उजाला ब्यूरो
पानीपत। 40 दिनों बाद एक बार फिर से हरियाणा रोडवेज कर्मचारियों ने हड़ताल का रास्ता अपनाया है। इसका जिले में पूर्ण असर देखने को मिला। हड़ताल के दौरान पानीपत डिपो से सुबह के समय 133 में से 20 बसें निकाली गईं। इसके बाद से बसें पूरी तरह से बंद रहीं।
कुछ लोकल रूट की बसों को डिपो से बहार खड़ा करवा दिया गया था ताकि बसों को निकालने में दिक्कत न हो। बसें न चलने के कारण पानीपत डिपो को 12 से 13 लाख रुपये का नुकसान उठाना पड़ा। वहीं 45 हजार के लगभग यात्रियों को निजी वाहनों व ट्रेन पर निर्भर रहना पड़ा। कुछ छात्र हड़ताल का समर्थन करने के लिए बस धरना स्थल पर भी पहुंचे। हड़ताल के दौरान सभी कर्मचारियों ने अपनी मांगें रखीं। कर्मचारियों ने रोष प्रकट करते हुए प्रशासन के खिलाफ मुर्दाबाद के नारे लगाए।
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सर्व कर्मचारी संघ के जिला सचिव तेजपाल ने रोडवेज की हड़ताल का समर्थन करते हुए कहा कि सरकार सभी विभागों का निजीकरण करने का प्रयास कर रही है। महाबीर देशवाल ने कहा कि कर्मचारियों की मांग सरकार को माननी ही पड़ेगी। अगर सरकार युवाओं के रोडवेज का निजीकरण करके युवाओं के लिए रोजगार खत्म करने का प्रयास करेगी तो वो भविष्य में इसी प्रकार की अनिश्चितकालीन हड़ताल करने को मजबूर होंगे। तालमेल कमेटी के नेता भी हरिनारायण शर्मा भी दोपहर दो बजे पहुंचे व कर्मचारियों को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि सरकार ने 36 से 42 रुपये प्रति किलोमीटर के हिसाब से बसे लेने का फैसला बड़ा घोटाला करने के लिए किया है। मुख्यमंत्री मीटिंग तक को तैयार नहीं है।
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सुबह के समय निकाली डिपो से बीस बसें
विभाग के अधिकारियों ने सुबह 4 बजे के बाद दोपहर तक बीस बसें निकालीं, वहीं 33 बसें पहले से ही बस स्टैंड से बाहर थी। यानि सुबह के समय 133 में से 53 बसें डिपो से बाहर थीं। इसके बाद दूसरे रूटों से बसें सुबह आकर डिपो में खड़ी हो गईं, जिसके बाद डिपो में लगातार बसों की संख्या बढ़ती चली गई। जो शाम तक 80 से 92 पर पहुंच गई। वहीं दोपहर एक बजे डिपो से एक हरिद्वार के लिए व दो बसे बिला बोर्ड के खाली ही निकल गई।
86 बसें चली हैं बाकी भी चलवाएंगे : जीएम
जीएम एसपी प्रमार सिंह ने कहा कि उन्होंने सुबह से 86 बसों को चलाया है। परिचालकों की कमी होने के कारण सबइंस्पेक्टरों को ड्राइवर के साथ भेजा जा सकता है। अगर वह भी नहीं गए तो जनता की सहायता के लिए केवल चालक को गाड़ी देकर भेज दिया जाएगा।