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खेतों से नहीं निकला पानी, सडने लगी धान, किसान हताश
Updated Fri, 28 Sep 2018 12:01 AM IST
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खेतों से नहीं निकला पानी, सड़ने लगा धान, किसान हताश
जिले के किसानों को हो सकता है लगभग 132 करोड़ का नुकसान
अमर उजाला ब्यूरो
पानीपत। बीते सप्ताह चार दिन हुई बारिश के बाद खेतों में जमा पानी से किसानों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। खेतों से पानी निकासी न होने से धान समेत अन्य फसलें सड़ने लगी हैं। अपनी बर्बाद होती फसल को देखकर किसान हताश व परेशान हैं। हालांकि प्रशासन ने किसानों को हरसंभव मदद करने का दावा किया है, लेकिन पानी निकासी की व्यवस्था करने की ओर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। वहीं कृषि विभाग की ओर से लगभग 350 एकड़ खराब फसल का सर्वे किया जा चुका है जबकि आवेदन तीन हजार से अधिक प्राप्त हो चुके हैं। एक अनुमान के तौर पर अभी तक 10 प्रतिशत क्षेत्र का भी सर्वे नहीं हो पाया है। किसानों का दर्द है कि फसल कटाई के बाद किए जाने वाले सर्वे का क्या फायदा होगा?
बता दें कि किसानों की धान की किस्म 1509 पककर तैयार है। कुछ फसल की कटाई भी हो चुकी है लेकिन बरसात के कारण कई क्षेत्रों में बिछी धान की फसल खराब होने के कगार पर पहुंच चुकी है। बिछी फसल खेतों में सड़ने लगी है। मजदूर भी खेत में जमा पानी में से फसल को काटकर बाहर निकालने से कतरा रहे हैं। मजबूरी में किसानों को कटी फसल को चारपाई पर लादकर बाहर निकालना पड़ रहा है। वहीं गिरी फसल का सर्वे का काम अभी तक पूरा न होने से किसानों की मुश्किलें बढ़ी हुई हैं।
74 हजार एकड़ में हैं धान की फसल
जिले में करीब 74 हजार एकड़ क्षेत्र में धान की फसल है। कृषि विभाग का कहना है कि बारिश के कारण 30 से 35 प्रतिशत फसल को नुकसान पहुंचा है। विभाग के अनुमान के तौर पर यदि आकलन किया जाए तो जिले के किसानों को करीब 132 करोड़ रुपये का नुकसान झेलना पड़ सकता है।
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महंगे रेट में मिल रहे मजदूर, फिर भी कर रहे आनाकानी
किसानों रणजीत, जयपाल व राजेश ने बताया कि धान की फसल में पानी भरा होने के कारण मजदूर सामान्य रेट से दोगुने रेट की मांग कर रहे हैं। इसके बावजूद फसल को काटकर पानी के खेत से बाहर निकालने में आनाकानी कर रहे हैं। किसानों को स्वयं साथ लगकर कटी धान की फसल को चारपाई पर लादकर बाहर निकाला जा रहा है ताकि धान के दानों को कुछ हद तक बचाया जा सके। खेतों में पानी भरा होने से किसानों की मुश्किलें कई गुणा बढ़ी हुई है।
जिन किसानों का बीमा होगा, उन्हें ही मिलेगा मुआवजा
एक ओर तो कृषि विभाग किसानों की हरसंभव सहायता करने के दावे कर रहा है, वहीं मुआवजे की राशि को लेकर संतोषजनक जवाब नहीं दिया जा रहा। सर्वे और मुआवजे को लेकर कृषि विभाग कार्यालय पहुंचे किसानों राजेश, रणजीत ने बताया कि विभाग की ओर से उन्हें संतोषजनक जवाब नहीं मिला। कृषि अधिकारी कहते हैं कि जिन किसानों का फसल बीमा होगा, उन्हें ही मुआवजा दिया जाएगा। शेष किसानों के मुआवजे को लेकर सरकार की ओर से कोई स्कीम नहीं आई है। उक्त किसानों के अनुसार अधिकारियों का कहना है कि यदि सरकार की ओर से कोई स्कीम आती है तो उसी के अनुसार प्रभावित किसानों को मुआवजा प्रदान किया जाएगा।
किसानों ने बताया अपना दर्द
गांव ऊंटला वासी किसान रणजीत ने बताया कि उसकी 15 एकड़ खेत में धान की फसल है। इसमें एक एकड़ में धान की किस्म 1509 पककर तैयार है। खेतों में बरसात का पानी भरा हुआ है। पानी निकासी की कोई व्यवस्था नहीं है। फसल बिछी होने के कारण उसके गलने का खतरा मंडरा रहा है। कृषि विभाग द्वारा अभी तक सर्वे भी नहीं किया गया है।
किसान मास्टर जयपाल ने बताया कि उसके पौने 2 एकड़ खेत में धान की किस्म 1509 पककर तैयार है लेकिन अभी तक कोई सर्वे नहीं हुआ है। खेत में पानी भरा होने से फसल के खराब होने का खतरा है। महंगे दाम पर मजदूर लगाए हैं लेकिन खेत से बाहर निकालने में आनाकानी कर रहे हैं। बारिश के कारण उनकी फसल को नुकसान पहुंचा है।
किसान राजेश पुत्र सुनहरा ने बताया कि उसकी तीन एकड़ धान की फसल जो पककर तैयार है लेकिन बारिश के कारण बिछी हुई है। वहीं बरसात के पानी में डूब चुकी है जिससे फसल खराब हो रही है। सर्वे का इंतजार करने के बाद फसल की कटाई को लेकर मजदूर लगाए हैं लेकिन कटी फसल को चारपाई पर लादकर खेत से बाहर निकाला जा रहा है।
बीमित फसल का मिलेगा मुआवजा
खराब फसल को लेकर वीरवार शाम तक 3100 किसानों के आवेदन प्राप्त हो चुके हैं। रकबा ज्यादा होने के कारण 350 एकड़ खेत का सर्वे किया जा चुका है। जिन किसानों ने फसल का बीमा करवाया हुआ है, उन्हें फसल 100 प्रतिशत खराब होने पर 29500 रुपये प्रति एकड़ मुआवजा दिया जाएगा। जिस खेत में जितने प्रतिशत नुकसान होगा, उसी के अनुसार मुआवजा दिया जाएगा। जिन किसानों ने फसल का बीमा नहीं करवाया है, उन्हें कितना मुआवजा मिलेगा, यह सरकार की घोषणा पर निर्भर करता है।
-डॉ. पवन शर्मा, उपनिदेशक, कृषि विभाग
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खेतों से नहीं निकला पानी, सड़ने लगा धान, किसान हताश
जिले के किसानों को हो सकता है लगभग 132 करोड़ का नुकसान
अमर उजाला ब्यूरो
पानीपत। बीते सप्ताह चार दिन हुई बारिश के बाद खेतों में जमा पानी से किसानों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। खेतों से पानी निकासी न होने से धान समेत अन्य फसलें सड़ने लगी हैं। अपनी बर्बाद होती फसल को देखकर किसान हताश व परेशान हैं। हालांकि प्रशासन ने किसानों को हरसंभव मदद करने का दावा किया है, लेकिन पानी निकासी की व्यवस्था करने की ओर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। वहीं कृषि विभाग की ओर से लगभग 350 एकड़ खराब फसल का सर्वे किया जा चुका है जबकि आवेदन तीन हजार से अधिक प्राप्त हो चुके हैं। एक अनुमान के तौर पर अभी तक 10 प्रतिशत क्षेत्र का भी सर्वे नहीं हो पाया है। किसानों का दर्द है कि फसल कटाई के बाद किए जाने वाले सर्वे का क्या फायदा होगा?
बता दें कि किसानों की धान की किस्म 1509 पककर तैयार है। कुछ फसल की कटाई भी हो चुकी है लेकिन बरसात के कारण कई क्षेत्रों में बिछी धान की फसल खराब होने के कगार पर पहुंच चुकी है। बिछी फसल खेतों में सड़ने लगी है। मजदूर भी खेत में जमा पानी में से फसल को काटकर बाहर निकालने से कतरा रहे हैं। मजबूरी में किसानों को कटी फसल को चारपाई पर लादकर बाहर निकालना पड़ रहा है। वहीं गिरी फसल का सर्वे का काम अभी तक पूरा न होने से किसानों की मुश्किलें बढ़ी हुई हैं।
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74 हजार एकड़ में हैं धान की फसल
जिले में करीब 74 हजार एकड़ क्षेत्र में धान की फसल है। कृषि विभाग का कहना है कि बारिश के कारण 30 से 35 प्रतिशत फसल को नुकसान पहुंचा है। विभाग के अनुमान के तौर पर यदि आकलन किया जाए तो जिले के किसानों को करीब 132 करोड़ रुपये का नुकसान झेलना पड़ सकता है।
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महंगे रेट में मिल रहे मजदूर, फिर भी कर रहे आनाकानी
किसानों रणजीत, जयपाल व राजेश ने बताया कि धान की फसल में पानी भरा होने के कारण मजदूर सामान्य रेट से दोगुने रेट की मांग कर रहे हैं। इसके बावजूद फसल को काटकर पानी के खेत से बाहर निकालने में आनाकानी कर रहे हैं। किसानों को स्वयं साथ लगकर कटी धान की फसल को चारपाई पर लादकर बाहर निकाला जा रहा है ताकि धान के दानों को कुछ हद तक बचाया जा सके। खेतों में पानी भरा होने से किसानों की मुश्किलें कई गुणा बढ़ी हुई है।
जिन किसानों का बीमा होगा, उन्हें ही मिलेगा मुआवजा
एक ओर तो कृषि विभाग किसानों की हरसंभव सहायता करने के दावे कर रहा है, वहीं मुआवजे की राशि को लेकर संतोषजनक जवाब नहीं दिया जा रहा। सर्वे और मुआवजे को लेकर कृषि विभाग कार्यालय पहुंचे किसानों राजेश, रणजीत ने बताया कि विभाग की ओर से उन्हें संतोषजनक जवाब नहीं मिला। कृषि अधिकारी कहते हैं कि जिन किसानों का फसल बीमा होगा, उन्हें ही मुआवजा दिया जाएगा। शेष किसानों के मुआवजे को लेकर सरकार की ओर से कोई स्कीम नहीं आई है। उक्त किसानों के अनुसार अधिकारियों का कहना है कि यदि सरकार की ओर से कोई स्कीम आती है तो उसी के अनुसार प्रभावित किसानों को मुआवजा प्रदान किया जाएगा।
किसानों ने बताया अपना दर्द
गांव ऊंटला वासी किसान रणजीत ने बताया कि उसकी 15 एकड़ खेत में धान की फसल है। इसमें एक एकड़ में धान की किस्म 1509 पककर तैयार है। खेतों में बरसात का पानी भरा हुआ है। पानी निकासी की कोई व्यवस्था नहीं है। फसल बिछी होने के कारण उसके गलने का खतरा मंडरा रहा है। कृषि विभाग द्वारा अभी तक सर्वे भी नहीं किया गया है।
किसान मास्टर जयपाल ने बताया कि उसके पौने 2 एकड़ खेत में धान की किस्म 1509 पककर तैयार है लेकिन अभी तक कोई सर्वे नहीं हुआ है। खेत में पानी भरा होने से फसल के खराब होने का खतरा है। महंगे दाम पर मजदूर लगाए हैं लेकिन खेत से बाहर निकालने में आनाकानी कर रहे हैं। बारिश के कारण उनकी फसल को नुकसान पहुंचा है।
किसान राजेश पुत्र सुनहरा ने बताया कि उसकी तीन एकड़ धान की फसल जो पककर तैयार है लेकिन बारिश के कारण बिछी हुई है। वहीं बरसात के पानी में डूब चुकी है जिससे फसल खराब हो रही है। सर्वे का इंतजार करने के बाद फसल की कटाई को लेकर मजदूर लगाए हैं लेकिन कटी फसल को चारपाई पर लादकर खेत से बाहर निकाला जा रहा है।
बीमित फसल का मिलेगा मुआवजा
खराब फसल को लेकर वीरवार शाम तक 3100 किसानों के आवेदन प्राप्त हो चुके हैं। रकबा ज्यादा होने के कारण 350 एकड़ खेत का सर्वे किया जा चुका है। जिन किसानों ने फसल का बीमा करवाया हुआ है, उन्हें फसल 100 प्रतिशत खराब होने पर 29500 रुपये प्रति एकड़ मुआवजा दिया जाएगा। जिस खेत में जितने प्रतिशत नुकसान होगा, उसी के अनुसार मुआवजा दिया जाएगा। जिन किसानों ने फसल का बीमा नहीं करवाया है, उन्हें कितना मुआवजा मिलेगा, यह सरकार की घोषणा पर निर्भर करता है।
-डॉ. पवन शर्मा, उपनिदेशक, कृषि विभाग