फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Panipat News ›   कुल बिजली का 20 प्रतिशत चला जाता है लाइन लॉस में

कुल बिजली का 20 प्रतिशत चला जाता है लाइन लॉस में

Tue, 02 Jul 2019 11:52 PM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Tue, 02 Jul 2019 11:52 PM IST
विज्ञापन
कुल बिजली का 20 प्रतिशत चला जाता है लाइन लॉस में
पानीपत। गर्मी के मौसम में जिले में बिजली चोरी चरम सीमा पर पहुंच गई है। बारिश न होने और ज्यादा गर्मी होने की वजह से इसकी लागत दोगुुना ज्यादा हो गई है। औसतन हर माह करीब साढ़े चार करोड़ यूनिट बिजली चोरी हो जाती है। बिजली चोरी में ग्रामीण क्षेत्र शहर वालों से दोगुना आगे हैं। जिले में लाइन लॉस कुल खर्च का 20 प्रतिशत से भी ज्यादा हो चुका है। इससे लोड बढ़ने के कारण बार-बार बिजली ट्रिप कर जाती है। बिजली खपत का मुख्य कारण गर्मी के मौसम वाले उपकरणों के ज्यादा इस्तेमाल होना है। इनमें सबसे पहला नंबर एसी का आता है। यह बिजली की खपत और उपकरणों से कई गुना बढ़ा देता है। इसके बिल से बचने के लिए लोग बिजली चोरी करने लगते हैं। जुलाई महीने की शुरुआत तक भी बारिश न आना इसका दूसरा मुख्य कारण है। बिना बारिश के उमस और गर्मी में बिजली खपत बढ़ती ही रहेगी।
विज्ञापन

हालांकि बिजली निगम की टीमें बिजली चोरी को रोकने के लिए लगातार छापेमार कर चोरी को रोकने का प्रयास भी करती रहती हैं। लोगों में जागरूकता की कमी है। उन्हें जागरूक होकर जहां जरूरत हो वहीं बिजली का इस्तेमाल करने की जरूरत है।
विज्ञापन

ये है आंकड़ें : बिजली निगम के आंकड़े बताते हैं कि जैसे ही गर्मी शुरू होती है लाइन लॉस का प्रतिशत बढ़ने लगता है। अप्रैल माह में निगम ने कुल 21 करोड़ 12 लाख 76 हजार यूनिट प्राप्त की। इसमें से सिर्फ 16 करोड़ 88 लाख 42 हजार यूनिट ही बेची जा सकी। इसमें से 4 करोड़ 33 लाख 42 हजार यूनिट चोरी कर ली गई, इससे उनका लाइन लॉस 20.43 प्रतिशत रहा। वहीं मई माह में निगम ने कुल 22करोड़ 2 लाख 8 हजार यूनिट प्राप्त की। इसमें से सिर्फ 17 करोड़ 56 लाख 58 हजार यूनिट ही बेची जा सकी। इसमें से 4 करोड़ 45 लाख 50 हजार यूनिट चोरी कर ली गई, इससे उनका लॉइन लॉस 20.23 प्रतिशत रहा। निगम अधिकारियों ने बताया कि अब तक जून माह का लाइन लॉस तैयार किया जा रहा है। यह भी पिछले महीनों की तरह ही हो सकता है।
विज्ञापन
विज्ञापन

गांव में बिजली चोरी होती है ज्यादा : निगम अधिकारियों ने बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली शहर की तुलना में ज्यादा चोरी होती है। मई माह में शहर में 1 करोड़ 41 लाख यूनिट चोरी हुई, जबकि गांव में 3 करोड़ चार लाख यूनिट चोरी की गई। अप्रैल में शहर में 64 लाख यूनिटें ही चोरी की गई, जबकि ग्रामीण क्षेत्र में तीन करोड़ 69 लाख यूनिटें चोरी हुई। इसी तरह जून माह में बिजली चोरी ज्यादा होती है।
समालखा, सब अर्बन में ज्यादा चोरी, पानीपत में कम : मई की रिपोर्ट के अनुसार बिजली चोरी समालखा डिविजन में 1 करोड़ 85 लाख यूनिट, जबकि सब अर्बन डिविजन में 1 करोड़ 62 लाख यूनिट रही। पानीपत डिविजन की बात करें तो यहां 97 लाख यूनिट बिजली चोरी हुई। ऐसे ही अप्रैल में समालखा डिविजन में एक करोड़ 90 लाख, सब अर्बन में 2 करोड़ 4 लाख और पानीपत में 39 लाख यूनिट बिजली चोरी हुई। तीनों डिविजन से सबसे ज्यादा चोरी वाली सब डिविजन छाजपुर सब डिविजन और पानीपत सब अर्बन डिविजन हैं। यहां हर महीने एक करोड़ से ज्यादा यूनिट बिजली चोरी हो जाती है।
6 महीने में पकड़ी साढ़े 10 करोड़ की चोरी, साढ़े 5 करोड़ ही हुए रिकवर : बिजली निगम की टीम ने जिले की तीनों डिविजन की 9 सब डिविजन में छापेमारी के दौरान पिछले 6 महीने में दस करोड़ साठ लाख रुपये की 2527 बिजली चोरी पकड़ी। इसमें से सिर्फ 1947 केसों से पांच करोड़ 47 लाख रुपये रिकवर किए गए। हालांकि 2527 बिजली चोरी के केसों पर पुलिस एफआईआर तक दर्ज करवाई गई है। इसके बाद भी बिजली चोरी की घटनाएं रुकने का नाम नहीं ले रही हैं।
54 साल में 60 लाख बढ़े कनेक्शन : 1996 में बिजली के कनेक्शन केवल साढ़े तीन लाख थे। अब करीब 54 साल बाद करीब 60 लाख कनेक्शन हो चुके हैं। उस समय बिजली की लागत इतनी नहीं थी, जितनी हर महीने एक सब डिविजन से चोरी हो जाती है। संसाधन बढ़ने कनेक्शन बढ़ने के साथ बिजली चोरी नहीं रुक पाई।
गर्मी में करोड़ों रुपये की ज्यादा बिजली खरीदी जाती है : निगम अधिकारियों के अनुसार हर साल इन गर्मी के तीन महीनों में करीब 800 से 900 करोड़ रुपये तक की बिजली ज्यादा खरीदनी पड़ती है। इस मौसम में लागत बढ़ जाने से ये हाल होता है। वहीं क्षमता से ज्यादा लोड डलने की वजह से लाइट ट्रिपिंग की समस्या बन जाती है।
कर्मचारियों की कमी से जूझ रहा निगम : जहां बिजली निगम को 1343 कर्मचारियों की जरूरत है, वहीं इनकी जगह केवल 534 कर्मचारी ही काम कर पा रहे हैं। यहां 809 कर्मचारी हैं ही नहीं। इनकी जरूरत निगम को है, लेकिन इन्हें भर्ती ही नहीं किया जा रहा। यहां पर लगे करीब 80 कच्चे कर्मचारियों को भी हटाया जा चुका है।
बारिश भी है जिम्मेदार : बिजली चोरी को लेकर कहीं न कहीं बारिश को भी लोगों के साथ निगम अधिकारी भी जिम्मेदार मान रहे हैं। अधिकारियों को मानना है कि बारिश के बाद मौसम की उमस और गर्मी में बदलाव के चलते बिजली चोरी कम हो जाती है। इससे संसाधनों का लोग उतना उपयोग नहीं करते जितने गर्मी के इन महीनों में किया जाता है।

बिजली बचाना अति आवश्यक है। इसके लिए गर्मी में इस्तेेमाल किए जाने वाले उपकरण 5 स्टार रैंकिग का इस्तेमाल करना चाहिए। एलईडी लाइटें लगानी चाहिएं, इससे बिजली की बचत होगी। किसी भी फॉल्ट के समय पहले 1912 पर कॉल करके सूचना दें। अगर आपकी शिकायत पर कार्रवाई न होती तो उस समय संबधित अधिकारियों को कॉल करें। ऐसे मौकों पर निगम अधिकारी व कर्मचारी पहले ही व्यस्त रहते हैं।
- पीके गोयल, एसई, बिजली निगम।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed