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पार्षदों के साथ मीटिंग में मेयर ने रखी मांग, टेंडर में उनके व पार्षदों के हों हस्ताक्षर
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पानीपत। नगर निगम हाउस की बैठक में इस बार नगर निगम अधिकारी, मेयर एवं पार्षद आमने सामने होंगे। यानी हंगामा होने के आसार है। शुक्रवार को हाउस की दूसरी मीटिंग बुलाई गई है और इससे पहले मेयर ने सोमवार को पार्षदों के साथ एक आपात बैठक कर हाउस की मीटिंग का एजेंडा तय कर दिया है। एजेंडा है अधिकारियों और ठेकेदारों की मिलीभगत से टेंडरों में हो रहा भ्रष्टाचार। ऐसे में मीटिंग का हंगामेदार होना तय लगा रहा है। मेयर ने पार्षदों के साथ बैठक में मांग रखी है कि टेंडर में उनके और पार्षदों के हस्ताक्षर भी शामिल किए जाने चाहिए। उनके हस्ताक्षर के बगैर टेंडर पास नहीं होने चाहिए। इस प्रस्ताव के साथ ही उनका कहना था कि उनका मकसद नगर निगम से भ्रष्टाचार को खत्म करना है।
मेयर अवनीत कौर ने सीधे तौर पर आरोप लगाते हुए कहा कि शहर की सरकार नगर निगम अधिकारियों और ठेकेदारों की मिलीभगत से परेशान है। जब से मेयर का पदभार संभाला है, तब से नगर निगम अधिकारियों के साथ जंग लड़ रही हैं। सीएम मनोहर लाल से भी नगर निगम में चल रहे घोटालों की शिकायत की गई। आपात बैठक में मेयर ने पार्षदों के सामने अपनी समस्याएं रखीं और पार्षदों की समस्या जानी। मेयर व पार्षदों ने शहर में सफाई की जिम्मेदार कंपनी जेबीएम का टेंडर रद्द करने की मांग की। इस मौके पर मेयर ने बताया कि शुक्रवार को हाउस की मीटिंग बुलाई गई है, जहां सभी पार्षद अपनी मांगे रखेंगे।
इन मुद्दों को भी उठाया जाएगा : पार्षदों ने मीटिंग में मेयर से मांग करते हुए कहा कि शहर में बंदरों को पकड़ने के लिए टेंडर होने चाहिए। बंदरों के कारण पूरा शहर परेशान है। आवारा पशुओं के कारण आए दिन बड़े हादसे होते हैं। इसलिए इनको भी गोशालाओं में छोड़ने के टेंडर होने चाहिए। स्ट्रीट लाइटों के अभाव में शहर परेशान है। इसलिए इनके टेंडर होने भी जरूरी है।
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ठेकेदार कहता हैं कि हम रिपोर्ट नगर निगम में करेंगे : पार्षदों का आरोप है कि वार्ड में जो काम चलते हैं, उनके बारे में उन्हें कोई जानकारी नहीं दी जाती है। उन्हें यह पता नहीं होता कि किस विकास कार्य का टेंडर कितने रुपये में छोड़ा गया है। कितने दिनों में विकास कार्य पूरा करना है। जब भी ठेकेदार से इस बारे में पूछते हैं तो ठेकेदार कहता है कि टेंडर नगर निगम से है। उनकी जवाबदेही भी नगर निगम अधिकारियों को हैं, न कि पार्षदों को।
- जेबीएम को दो करोड़ मिलते हैं, फिर भी सफाई व्यवस्था चरमराई : पार्षदों ने मीटिंग में कहा कि जेबीएम कंपनी हर माह सफाई के लिए दो करोड़ रुपये लेती है। इनके पास कर्मचारियों की भारी कमी है। नगर निगम अधिकारियों से मिलीभगत के कारण जेबीएम कंपनी मनमानी से काम करती है और सरकार को चूना लगा रही है। जगह-जगह गंदगी के ढेर लगे रहते हैं। शहर में बीमारियां फैलने का भय बना रहता है, लेकिन नगर निगम अधिकारी इस संबंध में कोई ठोस कदम नहीं उठाते हैं।
मेयर के पास नहीं पावर : सरकार ने इस बार मेयर का सीधा चुनाव कराया था। उम्मीद थी कि मेयर को पावर मिलेेगी, लेकिन सरकार ने कोई पावर मेयर को नहीं दी। अबकी बार सदन में मेयर को पावर देने का मुद्दा रखा जाएगा। प्री बैठक में पार्षदों को इसके लिए तैयार किया जाएगा। अवनीत कौर ने बताया कि मेयर को कमिश्नर तक की एसीआर लिखने का अधिकार होना चाहिए। ऐसा होने पर ही अधिकारी काम करेंगे।
मीटिंग में नहीं पहुंचे ये पार्षद : वार्ड-9 से मीनाक्षी नारंग, वार्ड-14 से शकुंतला गर्ग, वार्ड-18 से बलराम मकौल, वार्ड-22 से चंचल डाबर, वार्ड-25 से दुष्यंत भट्ट आपात बैठ में नहीं पहुंचे। सकुंतला गर्ग वार्ड-18 से कांग्रेस समर्थित पार्षद हैं, जबकि चंचल डाबर निर्दलीय हैं। इन दोनों का आरोप है कि उनको मीटिंग में नहीं बुलाया जाता है।
आज प्रेसवार्ता कर करेंगे भ्रष्ट अधिकारियों के नामों का खुलासा करने का दावा : नगर निगम अधिकारियों से खफा मेयर अवनीत कौर के पिता व पूर्व मेयर भूपेंद्र सिंह ने मंगलवार को पत्रकार वार्ता आयोजित की है। उन्होंने दावा किया है कि पत्रकार वार्ता में वे भ्रष्ट अधिकारियों के नामों का खुलासा करेंगे।
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मेयर अवनीत कौर ने सीधे तौर पर आरोप लगाते हुए कहा कि शहर की सरकार नगर निगम अधिकारियों और ठेकेदारों की मिलीभगत से परेशान है। जब से मेयर का पदभार संभाला है, तब से नगर निगम अधिकारियों के साथ जंग लड़ रही हैं। सीएम मनोहर लाल से भी नगर निगम में चल रहे घोटालों की शिकायत की गई। आपात बैठक में मेयर ने पार्षदों के सामने अपनी समस्याएं रखीं और पार्षदों की समस्या जानी। मेयर व पार्षदों ने शहर में सफाई की जिम्मेदार कंपनी जेबीएम का टेंडर रद्द करने की मांग की। इस मौके पर मेयर ने बताया कि शुक्रवार को हाउस की मीटिंग बुलाई गई है, जहां सभी पार्षद अपनी मांगे रखेंगे।
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इन मुद्दों को भी उठाया जाएगा : पार्षदों ने मीटिंग में मेयर से मांग करते हुए कहा कि शहर में बंदरों को पकड़ने के लिए टेंडर होने चाहिए। बंदरों के कारण पूरा शहर परेशान है। आवारा पशुओं के कारण आए दिन बड़े हादसे होते हैं। इसलिए इनको भी गोशालाओं में छोड़ने के टेंडर होने चाहिए। स्ट्रीट लाइटों के अभाव में शहर परेशान है। इसलिए इनके टेंडर होने भी जरूरी है।
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ठेकेदार कहता हैं कि हम रिपोर्ट नगर निगम में करेंगे : पार्षदों का आरोप है कि वार्ड में जो काम चलते हैं, उनके बारे में उन्हें कोई जानकारी नहीं दी जाती है। उन्हें यह पता नहीं होता कि किस विकास कार्य का टेंडर कितने रुपये में छोड़ा गया है। कितने दिनों में विकास कार्य पूरा करना है। जब भी ठेकेदार से इस बारे में पूछते हैं तो ठेकेदार कहता है कि टेंडर नगर निगम से है। उनकी जवाबदेही भी नगर निगम अधिकारियों को हैं, न कि पार्षदों को।
- जेबीएम को दो करोड़ मिलते हैं, फिर भी सफाई व्यवस्था चरमराई : पार्षदों ने मीटिंग में कहा कि जेबीएम कंपनी हर माह सफाई के लिए दो करोड़ रुपये लेती है। इनके पास कर्मचारियों की भारी कमी है। नगर निगम अधिकारियों से मिलीभगत के कारण जेबीएम कंपनी मनमानी से काम करती है और सरकार को चूना लगा रही है। जगह-जगह गंदगी के ढेर लगे रहते हैं। शहर में बीमारियां फैलने का भय बना रहता है, लेकिन नगर निगम अधिकारी इस संबंध में कोई ठोस कदम नहीं उठाते हैं।
मेयर के पास नहीं पावर : सरकार ने इस बार मेयर का सीधा चुनाव कराया था। उम्मीद थी कि मेयर को पावर मिलेेगी, लेकिन सरकार ने कोई पावर मेयर को नहीं दी। अबकी बार सदन में मेयर को पावर देने का मुद्दा रखा जाएगा। प्री बैठक में पार्षदों को इसके लिए तैयार किया जाएगा। अवनीत कौर ने बताया कि मेयर को कमिश्नर तक की एसीआर लिखने का अधिकार होना चाहिए। ऐसा होने पर ही अधिकारी काम करेंगे।
मीटिंग में नहीं पहुंचे ये पार्षद : वार्ड-9 से मीनाक्षी नारंग, वार्ड-14 से शकुंतला गर्ग, वार्ड-18 से बलराम मकौल, वार्ड-22 से चंचल डाबर, वार्ड-25 से दुष्यंत भट्ट आपात बैठ में नहीं पहुंचे। सकुंतला गर्ग वार्ड-18 से कांग्रेस समर्थित पार्षद हैं, जबकि चंचल डाबर निर्दलीय हैं। इन दोनों का आरोप है कि उनको मीटिंग में नहीं बुलाया जाता है।
आज प्रेसवार्ता कर करेंगे भ्रष्ट अधिकारियों के नामों का खुलासा करने का दावा : नगर निगम अधिकारियों से खफा मेयर अवनीत कौर के पिता व पूर्व मेयर भूपेंद्र सिंह ने मंगलवार को पत्रकार वार्ता आयोजित की है। उन्होंने दावा किया है कि पत्रकार वार्ता में वे भ्रष्ट अधिकारियों के नामों का खुलासा करेंगे।