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किसान की एक ईंच जमीन नीलाम करके दिखाए सरकार
Updated Mon, 04 Jun 2018 12:01 AM IST
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किसान की एक इंच जमीन नीलाम करके दिखाए सरकार : हुड्डा
अमर उजाला ब्यूरो
समालखा। रैली के दौरान नेताओं के संबोधन में किसानों के हितों की बात ज्यादा थी। इस दौरान पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने सरकार की ओर से किसानों को दिए गए नीलामी नोटिस पर करारा जवाब देते हुए सरकार को चेताया। उन्होंने कहा कि हिम्मत है तो सरकार किसी किसान की एक इंच जमीन को नीलाम करके दिखाए। उन्होंने किसानों को भरोसा दिया कि वे संकट के इस समय में कंधे से कंधा मिलाकर उनके साथ खड़े हैं। किसान की दुर्दशा यह है कि आज उसकी फसल कौड़ियों के भाव लूटी जा रही है। चाहे धान हो, सरसों, कपास हो, बाजरा, पॉपुलर, प्याज, टमाटर, या आलू हो। फसल का उचित भाव न मिलने के कारण किसान कर्ज में डूब गया है।
उन्होंने कहा कि फसल बीमा के नाम से लूट की योजना चलाई गई। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक प्रीमियम के नाम पर निजी कंपनियों को 22 हजार करोड़ रुपये थमा दिये गए। इस एवज में किसानों को मुआवजे के नाम पर मात्र 12978 करोड़ रुपये दिये गये बाकी बचे 9000 करोड़ रुपये निजी कंपनियों की झोली में डाल दिया। उन्होंने कहा कि इस निर्दयी सरकार की मार से त्रस्त देश का किसान आंदोलन की राह पर है और फसल को सड़क पर फेंकने को मजबूर हो रहा है। हुड्डा ने कहा कि जबसे केंद्र में भाजपा सरकार आई है, 10 लाख करोड़ रुपये हिंदुस्तान की जनता की जेब से निकल कर कंपनियों और सरकार के खजाने में भर लिया है। सरकार कहती है कि 10 लाख करोड़ रुपये गांव के विकास के लिये खर्च किया है, तो फिर ये बताया जाए कि पंचायतों के इतिहास में सरपंचों को आंदोलन क्यों करना पड़ रहा है। जनता के साथ सबसे क्रूर मजाक तो ये है कि 15 दिनों में तेल का भाव 4 रुपये बढ़ा कर 16वें दिन एक पैसा कम कर दिया गया।
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अमर उजाला ब्यूरो
समालखा। रैली के दौरान नेताओं के संबोधन में किसानों के हितों की बात ज्यादा थी। इस दौरान पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने सरकार की ओर से किसानों को दिए गए नीलामी नोटिस पर करारा जवाब देते हुए सरकार को चेताया। उन्होंने कहा कि हिम्मत है तो सरकार किसी किसान की एक इंच जमीन को नीलाम करके दिखाए। उन्होंने किसानों को भरोसा दिया कि वे संकट के इस समय में कंधे से कंधा मिलाकर उनके साथ खड़े हैं। किसान की दुर्दशा यह है कि आज उसकी फसल कौड़ियों के भाव लूटी जा रही है। चाहे धान हो, सरसों, कपास हो, बाजरा, पॉपुलर, प्याज, टमाटर, या आलू हो। फसल का उचित भाव न मिलने के कारण किसान कर्ज में डूब गया है।
उन्होंने कहा कि फसल बीमा के नाम से लूट की योजना चलाई गई। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक प्रीमियम के नाम पर निजी कंपनियों को 22 हजार करोड़ रुपये थमा दिये गए। इस एवज में किसानों को मुआवजे के नाम पर मात्र 12978 करोड़ रुपये दिये गये बाकी बचे 9000 करोड़ रुपये निजी कंपनियों की झोली में डाल दिया। उन्होंने कहा कि इस निर्दयी सरकार की मार से त्रस्त देश का किसान आंदोलन की राह पर है और फसल को सड़क पर फेंकने को मजबूर हो रहा है। हुड्डा ने कहा कि जबसे केंद्र में भाजपा सरकार आई है, 10 लाख करोड़ रुपये हिंदुस्तान की जनता की जेब से निकल कर कंपनियों और सरकार के खजाने में भर लिया है। सरकार कहती है कि 10 लाख करोड़ रुपये गांव के विकास के लिये खर्च किया है, तो फिर ये बताया जाए कि पंचायतों के इतिहास में सरपंचों को आंदोलन क्यों करना पड़ रहा है। जनता के साथ सबसे क्रूर मजाक तो ये है कि 15 दिनों में तेल का भाव 4 रुपये बढ़ा कर 16वें दिन एक पैसा कम कर दिया गया।
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