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Panchkula News: कर्मी की विधवा को कोर्ट आने के लिए किया मजबूर, पीआरटीसी पर 25 हजार जुर्माना
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चंडीगढ़। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने पेप्सू रोड ट्रांसपोर्ट कॉर्पोरेशन (पीआरटीसी) को कर्मचारी की विधवा को ग्रेच्युटी में से काटी गए 707832 रुपये 7 प्रतिशत ब्याज के साथ लौटानेे का आदेश दिया है। साथ ही विधवा को कोर्ट के चक्कर लगाने को मजबूर करने पर 25 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है।
याचिका दाखिल करते हुए फाजिल्का निवासी सुखजीत कौर ने एडवोकेट विकास चतरथ के माध्यम से हाईकोर्ट को बताया कि उसके पति पीआरटीसी में इंस्पेक्टर थे और 31 जुलाई 2013 को रिटायर हुए थे। रिटायरमेंट के कुछ समय बाद उनकी मौत हो गई थी। जब याची के पति के रिटायरमेंट लाभ की गणना की गई तो पाया गया कि उनका वेतन गलत तय हुआ था और उन्हें अतिरिक्त भुगतान किया गया था। इसके बाद ग्रेच्युटी में से 707832 रुपये काट लिए गए थे। ऐसा करते हुए न्याय के सिद्धांत का पालन नहींं किया गया और न ही कोई कारण बताओ नोटिस जारी किया गया।
हाईकोर्ट ने याची पक्ष की दलीलों को सुनने के बाद कहा कि यहां मामला यह नहीं है कि याची के पति ने कोई धोखाधड़ी की थी बल्कि यह विभाग की गलती थी। ऐसे में इसके लिए कर्मचारी या उसके आश्रितों को परिणाम भुगतने नहीं दिया जा सकता। किसी भी कर्मचारी के पीछे से उसके खिलाफ आदेश बिना सुनवाई का मौका दिए जारी नहीं किया जा सकता। ऐसे हाईकोर्ट ने काटी गई राशि को अब 7 प्रतिशत ब्याज के साथ याची को सौंपने का आदेश दिया है। इसके साथ ही हाईकोर्ट ने कहा कि विभाग के रवैए के चलते याची को हाईकोर्ट की शरण लेनी पड़ी और अब विभाग मुआवजे के रूप में 25 हजार रुपये का भुगतान याची को करे।
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याचिका दाखिल करते हुए फाजिल्का निवासी सुखजीत कौर ने एडवोकेट विकास चतरथ के माध्यम से हाईकोर्ट को बताया कि उसके पति पीआरटीसी में इंस्पेक्टर थे और 31 जुलाई 2013 को रिटायर हुए थे। रिटायरमेंट के कुछ समय बाद उनकी मौत हो गई थी। जब याची के पति के रिटायरमेंट लाभ की गणना की गई तो पाया गया कि उनका वेतन गलत तय हुआ था और उन्हें अतिरिक्त भुगतान किया गया था। इसके बाद ग्रेच्युटी में से 707832 रुपये काट लिए गए थे। ऐसा करते हुए न्याय के सिद्धांत का पालन नहींं किया गया और न ही कोई कारण बताओ नोटिस जारी किया गया।
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हाईकोर्ट ने याची पक्ष की दलीलों को सुनने के बाद कहा कि यहां मामला यह नहीं है कि याची के पति ने कोई धोखाधड़ी की थी बल्कि यह विभाग की गलती थी। ऐसे में इसके लिए कर्मचारी या उसके आश्रितों को परिणाम भुगतने नहीं दिया जा सकता। किसी भी कर्मचारी के पीछे से उसके खिलाफ आदेश बिना सुनवाई का मौका दिए जारी नहीं किया जा सकता। ऐसे हाईकोर्ट ने काटी गई राशि को अब 7 प्रतिशत ब्याज के साथ याची को सौंपने का आदेश दिया है। इसके साथ ही हाईकोर्ट ने कहा कि विभाग के रवैए के चलते याची को हाईकोर्ट की शरण लेनी पड़ी और अब विभाग मुआवजे के रूप में 25 हजार रुपये का भुगतान याची को करे।
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