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सेक्टर-17 में 50 साल से खाली पड़ा प्लॉट हमें देने में प्रशासन को आपत्ति क्यों: हाईकोर्ट

Tue, 19 Mar 2024 11:14 PM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Tue, 19 Mar 2024 11:14 PM IST
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Why does the administration have objection in giving us the plot lying vacant for 50 years in Sector-17: High Court
चंडीगढ़। सेक्टर-17 में आरबीआई की बिल्डिंग के निकट मौजूद 2 एकड़ के प्लॉट को जो पिछले 50 साल से खाली पड़ा है हाईकोर्ट के नाम करने पर आपत्ति जताने पर नाराजगी जताते हुए अगली सुनवाई पर जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है। प्रशासन, हाईकोर्ट बार, कर्मचारी एसोसिएशन व अन्य सभी पक्षों को बैठक के बाद हाईकोर्ट में मंगलवार को सौंपी रिपोर्ट पर भी जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।
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पिछली सुनवाई पर हाईकोर्ट की 50 साल की जरूरत को देखते हुए कितनी भूमि की आवश्यकता है, यह तय करने के लिए प्रशासन, हाईकोर्ट बार, हाईकोर्ट रजिस्ट्रार, कर्मचारी एसोसिएशन व अन्य सभी पक्षों को बैठक करने का आदेश दिया गया था। इस बैठक में तय किया जाना था कि हाईकोर्ट की असल जरूरत कितनी है और तय होने के बाद यह भूमि सारंगपुर में उपलब्ध करवाने का पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने प्रशासन को आदेश दिया था।
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मंगलवार को मामले की सुनवाई आरंभ होते ही हाईकोर्ट ने चंडीगढ़ प्रशासन से सारंगपुर में भूमि अलॉटमेंट पर जवाब मांगा तो प्रशासन की ओर से पेश हुए सीनियर स्टैंडिंग काउंसिल अमित झांजी ने बताया कि वहां पर भूमि की कमी है। हाईकोर्ट ने कहा कि हमारी जरूरत के अनुसार भूमि उपलब्ध करवाने में आनाकानी नहीं होनी चाहिए।
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रिपोर्ट के अनुसार, वकीलों को 5.80 लाख, एडवोकेट जनरल पंजाब कार्यालय को 92000 व एडवोकेट जनरल कार्यालय हरियाणा को 87000 स्क्वेयर फीट भूमि की जरूरत है। इसके साथ ही एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ऑफ इंडिया को तथा यूटी के सीनियर स्टैंडिंग काउंसिल कार्यालय को भी भूमि की जरूरत है। औसतन एक वकील को 50 स्क्वेयर फीट जगह की जरूरत होती है और वर्तमान में 13 हजार वकील हाईकोर्ट में मौजूद रहते हैं। ऐसे में वर्तमान में मौजूद स्थान के अतिरिक्त वकीलों को 5.80 लाख स्क्वेयर फीट भूमि की जरूरत है।


छह मंजिल इमारत बनाने से मिल सकती है बड़ी राहत

हाईकोर्ट ने कहा कि सेक्टर-17 में छह मंजिल की इमारत बनाने में भी कोई आपत्ति नहीं है। आरबीआई के बगल में मौजूद इमारत को 1970 में एक होटल के लिए अलॉट किया गया था। निर्माण न होने के चलते 1974 में इसे रिज्यूम कर लिया गया था। ऐसे में यह प्लॉट पिछले 50 साल से खाली पड़ा है और इस पर 6 मंजिल की इमारत का निर्माण कर हाईकोर्ट पर से बड़ा बोझ उतारा जा सकता है।
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