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'जिसे गिरफ्तार करने को हाईकोर्ट को दखल देना पड़ा, उसे कैसे दें जेल से बाहर आने की अनुमति'
Thu, 02 Jul 2020 12:18 PM IST
पंचकुला ब्यूरो
अमर उजाला, चंडीगढ़
अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: पंचकुला ब्यूरो
Updated Thu, 02 Jul 2020 12:18 PM IST
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फाइल फोटो
पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट ने हिसार के बरवाला स्थित सतलोक आश्रम के प्रमुख रामपाल द्वारा पोती की शादी में शामिल होने के लिए एक हफ्ते तक सजा निलंबित करने संबंधी अपील वाली एक याचिका खारिज कर दी है। इस दौरान कोर्ट ने कहा कि जिसकी गिरफ्तारी के लिए हाई कोर्ट को दो बार दखल देना पड़ा हो उसे कैसे जेल से बाहर आने की अनुमति दी जा सकती है।
अपनी पोती की शादी में शामिल होने के लिए रामपाल ने दो याचिकाएं हाईकोर्ट में डाली थी।
इनमें से एक याचिका जस्टिस सत्यनारायण एवं जस्टिस अर्चना पुरी की खंडपीठ के समक्ष सुनवाई के लिए आई तो कोर्ट ने कहा कि जब इसी मामले में रामपाल के बेटे वरिंदर, जिसकी बेटी की शादी है, उसे तीन सप्ताह की अंतरिम जमानत दी जा चुकी है तो अब उसी आधार पर रामपाल को कैसे जमानत दी जाए। इसके बाद याचिका खारिज कर दी, इस तरह रामपाल को फ़िलहाल हाईकोर्ट से राहत नहीं मिल पाई है।
वहीं, इससे पहले जस्टिस एस. मुरलीधर एवं जस्टिस अवनीश झिंगन की खंडपीठ ने समक्ष जो याचिका सुनवाई के लिए आई थी, उसमें खंडपीठ ने रोहतक के पुलिस उच्चाधिकारी को, जहां रामपाल की पोती का विवाह होना है, निर्देश दिए हैं कि वह सुरक्षा बंदोबस्त का जायजा लें और पर्याप्त सुरक्षा प्रबंध करें।
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इसके अलावा व्यक्तिगत तौर पर हलफनामा दायर कर और यह सुनिश्चित करें कि विवाह में ज्यादा लोग शामिल न हों। कोरोना के चलते विवाह शादी के लिए केंद्र सरकार ने जो निर्देश दिए हैं उसका पूरी तरह से पालन किया जा रहा है या नहीं, उसकी पूरी जानकारी की रिपोर्ट 6 जुलाई को अगली सुनवाई पर सौंपें।
एक याचिका में सजा निलंबन और दूसरे में अंतरिम जमानत की मांग की
दो याचिकाएं इस लिए दायर की गई थी क्योंकि रामपाल के खिलाफ दो अलग-अलग केस लंबित हैं जिस केस में याचिका ख़ारिज हुई है उस केस में रामपाल को दोषी करार दे सजा सुनाई गई थी ऐसे में इस केस में एक सप्ताह के सजा निलंबन की मांग की गई थी वहीं अन्य केस में अंतरिम जमानत दिए जाने की मांग की गई थी। एक याचिका ख़ारिज होने के चलते फ़िलहाल रामपाल को राहत नहीं मिल पाई है। रामपाल के एडवोकेट अर्जुन श्योराण ने कहा कि वे अब इस मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करेंगे।
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अपनी पोती की शादी में शामिल होने के लिए रामपाल ने दो याचिकाएं हाईकोर्ट में डाली थी।
इनमें से एक याचिका जस्टिस सत्यनारायण एवं जस्टिस अर्चना पुरी की खंडपीठ के समक्ष सुनवाई के लिए आई तो कोर्ट ने कहा कि जब इसी मामले में रामपाल के बेटे वरिंदर, जिसकी बेटी की शादी है, उसे तीन सप्ताह की अंतरिम जमानत दी जा चुकी है तो अब उसी आधार पर रामपाल को कैसे जमानत दी जाए। इसके बाद याचिका खारिज कर दी, इस तरह रामपाल को फ़िलहाल हाईकोर्ट से राहत नहीं मिल पाई है।
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वहीं, इससे पहले जस्टिस एस. मुरलीधर एवं जस्टिस अवनीश झिंगन की खंडपीठ ने समक्ष जो याचिका सुनवाई के लिए आई थी, उसमें खंडपीठ ने रोहतक के पुलिस उच्चाधिकारी को, जहां रामपाल की पोती का विवाह होना है, निर्देश दिए हैं कि वह सुरक्षा बंदोबस्त का जायजा लें और पर्याप्त सुरक्षा प्रबंध करें।
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इसके अलावा व्यक्तिगत तौर पर हलफनामा दायर कर और यह सुनिश्चित करें कि विवाह में ज्यादा लोग शामिल न हों। कोरोना के चलते विवाह शादी के लिए केंद्र सरकार ने जो निर्देश दिए हैं उसका पूरी तरह से पालन किया जा रहा है या नहीं, उसकी पूरी जानकारी की रिपोर्ट 6 जुलाई को अगली सुनवाई पर सौंपें।
एक याचिका में सजा निलंबन और दूसरे में अंतरिम जमानत की मांग की
दो याचिकाएं इस लिए दायर की गई थी क्योंकि रामपाल के खिलाफ दो अलग-अलग केस लंबित हैं जिस केस में याचिका ख़ारिज हुई है उस केस में रामपाल को दोषी करार दे सजा सुनाई गई थी ऐसे में इस केस में एक सप्ताह के सजा निलंबन की मांग की गई थी वहीं अन्य केस में अंतरिम जमानत दिए जाने की मांग की गई थी। एक याचिका ख़ारिज होने के चलते फ़िलहाल रामपाल को राहत नहीं मिल पाई है। रामपाल के एडवोकेट अर्जुन श्योराण ने कहा कि वे अब इस मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करेंगे।