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Panchkula News: नए कानूनों में ई-साक्ष्य शुरू होने पर पुलिस नहीं कर पाएगी हेरफेर, बेकसूरों को नहीं होगी सजा

Mon, 07 Jul 2025 01:26 AM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Mon, 07 Jul 2025 01:26 AM IST
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When e-evidence is introduced in the new laws, police will not be able to manipulate and innocent people will not be punished
पंचकूला। भारतीय न्याय संहिता लागू हुए एक साल हो गया है। इस दौरान कानून की धाराओं में हुए बदलाव समझने और लोगों को इन बदलाव से हुई सहूलियत को जानने लिए अमर उजाला ने शहर के अधिवक्ताओं के साथ संवाद कर उनके विचार जाने। इस दौरान शहर के वकीलों ने तीनों कानूनों के तहत प्रभावी नई धाराओं पर फोकस कर उपयोगी जानकारियां दीं।
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उन्होंने बताया कि नए कानूनों में ई-साक्ष्य, ई-समन जैसी व्यवस्थाएं शुरू हुई हैं, जिससे अपराधों की सूचना, साक्ष्य संग्रहण और दोषियों की निगरानी अत्यधिक सशक्त हुई है। इस कानून के तहत गंभीर मामलों की रिपोर्ट तुरंत दर्ज होगी, जबकि सामान्य मामलों में अधिकतम 14 दिन की जांच होगी। इसके बाद जरूरी हुआ तो रिपोर्ट दर्ज की जाएगी। जीरो क्राइम नंबर पर दर्ज होने वाले मामले घटनास्थल के हिसाब से मुताबिक संबंधित जिले या थाने को भेज दिए जाएंगे। वहीं, नए कानून में महिलाओं और बच्चों के संरक्षण को प्राथमिकता दी है। इनके प्रति होने वाले अपराधों में त्वरित व प्रभावी कार्रवाई की जाएगी। इसके अलावा कोर्ट पेंडिंग ट्रायल पर आज पुराने धाराओं के तहत कार्रवाई की जा रही है।
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कोई भी निर्दोष दंडित न हो
नए कानूनों की मूल भावना तकनीक का अधिक से अधिक प्रयोग कर यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी स्थित में वादी (शिकायतकर्ता) का उत्पीड़न न हो और कोई भी निर्दोष व्यक्ति दंडित न हो। पुलिस विवेचना में अब तकनीक का उपयोग अधिक से अधिक होगा। इसके लिए डिजिटल साक्ष्यों को पारंपरिक साक्ष्यों के रूप में मान्यता दी गई है। ई-एफआइआर और जीरो एफआईआर की भी व्यवस्था की गई है। -अमित कुमार गोयल, एडवोकेट पंचकूला
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तलाशी या जब्ती की वीडियोग्राफी जरूरी
नए कानून के तहत तलाशी या जब्ती की प्रक्रिया में पुलिस को वीडियोग्राफी करवाना जरूरी होगा। जिससे साक्ष्य को डिजीलॉकर में सुरक्षित किया जा सकेगा। इससे कोर्ट में साक्ष्य पेश करने में किसी भी प्रकार की तकनीकी बाधा नहीं आएगी। पुलिस जो भी कार्रवाई करेगी, वादी या उसके रिश्तेदार के मोबाइल फोन पर इसकी सूचना जाएगी। कोर्ट भी चार्जशीट मिलने के दो माह के बाद ट्रायल शुरू कर देगा। इससे जल्दी सजा का आधार तैयार होगा। -अभिषेक राणा, एडवोकेट पंचकूला

झूठा वादा कर संबंध बनाने पर दस साल की सजा
नए कानून के तहत लागू की गई बीएनएस की धाराओं के मुताबिक किसी भी महिला के साथ शादी, रोजगार, पदोन्नति का झूठा वादा या पहचान छिपाकर संभोग करने पर दस साल तक की कैद और जुर्माने का प्रावधान है। वहीं, पहले से ही विवाहित होते हुए इस तथ्य को छिपाकर दूसरा विवाह करने पर दोषी को दस साल तक कैद की हो सकती है। ऐसे मामलों में पहले सजा का प्रावधान कम हुआ करता था। -हरसिमरन कौर, एडवोकेट पंचकूला

सबूत के अभाव में छूट रहे अपराधी
सीआरपीसी में सबसे ज्यादा तब्दीली इलेक्ट्रानिक सबूतों को लेकर है। सीसीटीवी कैमरा, वीडियो, सोशल मीडिया पर पोस्ट, निजी चैटिंग आदि को सबूतों में शामिल करना आपराधिक कानून को मजबूत बनाएगा। वहीं, सबूत के अभाव में बड़ी संख्या में अपराधी छूट जाते हैं। कानून के जानकारों का मानना है कि इलेक्ट्रानिक सबूतों पर जोर देने से अब पहले की अपेक्षा ज्यादा अपराधियों को सजा मिल सकेगी। -विक्रम सिंह राणा, एडवोकेट पंचकूला


पुराने कानून की धाराओं के क्रम बदले
अपराधों की परिभाषा, सजा की मात्रा में कोई परिवर्तन नहीं किया गया है। अलबत्ता, आपराधिक प्रक्रिया संहिता में व्यापक परिवर्तन किए गए हैं। खासतौर पर न्यायिक हिरासत की अवधि और इलेक्ट्रानिक सबूतों को लेकर। पुराने कानून की धाराओं के क्रम बदल दिए गए हैं। -डिंपल ठाकुर, एडवोकेट पंचकूला
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