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यह कैसा सर्वे : किसी की प्रापर्टी किसी के नाम, लोग काट रहे चक्कर, निगम लाचार
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यह कैसा सर्वे : किसी की प्रापर्टी किसी के नाम, लोग काट रहे चक्कर, निगम लाचार
पंचकूला नगर निगम कार्यालय तीन साल में प्रॉपर्टी आईडी ठीक नहीं कर पाया, लोग हो रहे हैं परेशान
दीपक शाही
पंचकूला। लोगों को सुविधा देेने वाली सरकारी व्यवस्थाओं पर सवाल उठने लगे हैं। तीन साल में नगर निगम लोगों की प्रॉपर्टी आईडी भी ठीक नहीं कर पाया है। कहीं किसी का नाम गलत है तो किसी का पता। आवासीय प्रॉपर्टी को व्यावसायिक में बदल दिया है। प्रॉपर्टी आईडी में सुधार के लिए दो माह से पंचकूला सेक्टर-4 नगर निगम कार्यालय का चक्कर काटकर लोग थक चुके हैं। उनकी समस्या का नगर निगम समाधान करने में स्वयं को लाचार महसूस कर रहा है।
संपत्ति मालिकों का रिकॉर्ड भी दुरुस्त नहीं सरकार ने प्रॉपर्टी आईडी को लेकर जिस भी कंपनी से सर्वे करवाया, उस कंपनी ने इतनी बड़ी लापरवाही बरती कि आज तक लोगों को खामियाजा भुगतना पड़ रहा है।नगर निगम के क्षेत्र में लगभग संपत्तियों को ऑनलाइन करने के लिए प्रदेश सरकार की ओर से कंपनी को ठेका दिया गया था। कंपनी के नुमाइंदों की ओर से संपत्ति का ब्योरा एंट्री करते समय जल्दबाजी की गई, जिसके चलते गड़बड़ियों को ठीक करने में कई बार नगर निगम कार्यालय व क्षेत्रों में शिविर लगाए गए थे, लेकिन उन शिविरों में भी रिकॉर्ड को दुरुस्त नहीं किया गया।
केस नंबर एक
सेक्टर-21 महेशपुर निवासी जगदीश भगत सिंह ने बताया कि प्रॉपर्टी आईडी में सुधार के लिए दो माह में दस बार नगर निगम कार्यालय का चक्कर काट चुके हैं, लेकिन आजतक समस्या का समाधान नहीं हो पाया। उन्होंने बताया कि उनके मकान का नंबर 166 है, लेकिन प्रॉपर्टी आईडी पर नाम किसी दूसरे अंकित किया गया है। नगर निगम की गलतियों की वजह से आवासीय प्लॉट को व्यावसायिक बना दिया गया है। मेरे नाम के जगह किसी रेनु भाटिया का नाम मेरे प्रॉपर्टी आईडी में अंकित कर दिया गया है।
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केस नंबर दो
सेक्टर-21 महेशपुर निवासी नंदी देवी ने बताया कि नई प्रॉपर्टी आईडी के लिए 11 फरवरी को आवेदन किया था। वहां मेरे नाम के जगह आईडी में किसी संदीप का नाम अंकित कर दिया गया है। नगर निगम कार्यालय में जाती हूं तो वहां से जवाब मिलता है, सुविधा केंद्र में सुधार हो होगा। वहां एक माह पहले 150 रुपये देकर करेक्शन करवाया, लेकिन प्रॉपर्टी आईडी की गलतियों में सुधार नहीं हुआ। अब दोबारा इस माह प्रॉपर्टी आईडी में 150 रुपये देकर सही कराया, पैसे भी खर्च किए, लेकिन समस्या का समाधान नहीं हो पाया। अब वीरवार को नगर निगम कार्यालय पहुंची तो यहां बताया गया कि सेक्टर-12 में बिल्डिंग इंस्पेक्टर करेंगे। वहां गई तो वहां वह उपस्थित नहीं थे।
केस नंबर तीन
रिटायर्ड आईएएस जेसी दुग्गल पांच बार नगर निगम के चक्कर लगा चुके हैं। सेक्टर-15 निवासी ने बताया कि अकाउंट में पोस्ट अपडेट नहीं होने के चलते उन्हें प्रॉपर्टी टैक्स 10 फीसदी का रिबेट नहीं मिल पा रहा है। गलती नगर निगम की है और भुगत वह रहे हैं। उन्होंने बताया कि बुजुर्ग हूं। यहां के स्थानीय मुलाजिम बार-बार चक्कर कटवा रहे हैं। जब भी नगर निगम कार्यालय में आता हूं, स्थानीय निकाय विभाग को पत्र लिखा गया है।
केस नंबर चारएमडीसी स्वास्तिक विहार निवासी केसी गुप्ता ने बताया कि पिछले दस दिनों से प्रॉपर्टी आईडी में सुधार के लिए नगर निगम कार्यालय का चक्कर काट रहा हूं, लेकिन मेरी आईडी आजतक ठीक नहीं हो पाई। जिसके चलते निगम कार्यालय सेक्टर-4 का बार बार चक्कर काट रहा हूं। यहां एक काउंटर से दूसरे काउंटर मुलाजिम दौड़ाते हैं, थक कर दोपहर में घर चला जाता हूं। शुरू में ही प्रॉपर्टी आईडी सही बनाई गई होती तो सैकड़ों लोगों को निगम कार्यालय के बार बार चक्कर न लगाने पड़ते।
एक कंपनी को प्रॉपर्टी आईडी बनाने का ठेका दिया गया था, कंपनी की ओर से गलती की गई है। अब नगर निगम की ओर से सुधार किया जा रहा है। इसमें थोड़ा समय लगेगा। इसके लिए दो काउंटर भी बढ़ाए जांएगे। गुलाब सिंह, जेडटीओ नगर निगम पंचकूला।
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पंचकूला नगर निगम कार्यालय तीन साल में प्रॉपर्टी आईडी ठीक नहीं कर पाया, लोग हो रहे हैं परेशान
दीपक शाही
पंचकूला। लोगों को सुविधा देेने वाली सरकारी व्यवस्थाओं पर सवाल उठने लगे हैं। तीन साल में नगर निगम लोगों की प्रॉपर्टी आईडी भी ठीक नहीं कर पाया है। कहीं किसी का नाम गलत है तो किसी का पता। आवासीय प्रॉपर्टी को व्यावसायिक में बदल दिया है। प्रॉपर्टी आईडी में सुधार के लिए दो माह से पंचकूला सेक्टर-4 नगर निगम कार्यालय का चक्कर काटकर लोग थक चुके हैं। उनकी समस्या का नगर निगम समाधान करने में स्वयं को लाचार महसूस कर रहा है।
संपत्ति मालिकों का रिकॉर्ड भी दुरुस्त नहीं सरकार ने प्रॉपर्टी आईडी को लेकर जिस भी कंपनी से सर्वे करवाया, उस कंपनी ने इतनी बड़ी लापरवाही बरती कि आज तक लोगों को खामियाजा भुगतना पड़ रहा है।नगर निगम के क्षेत्र में लगभग संपत्तियों को ऑनलाइन करने के लिए प्रदेश सरकार की ओर से कंपनी को ठेका दिया गया था। कंपनी के नुमाइंदों की ओर से संपत्ति का ब्योरा एंट्री करते समय जल्दबाजी की गई, जिसके चलते गड़बड़ियों को ठीक करने में कई बार नगर निगम कार्यालय व क्षेत्रों में शिविर लगाए गए थे, लेकिन उन शिविरों में भी रिकॉर्ड को दुरुस्त नहीं किया गया।
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केस नंबर एक
सेक्टर-21 महेशपुर निवासी जगदीश भगत सिंह ने बताया कि प्रॉपर्टी आईडी में सुधार के लिए दो माह में दस बार नगर निगम कार्यालय का चक्कर काट चुके हैं, लेकिन आजतक समस्या का समाधान नहीं हो पाया। उन्होंने बताया कि उनके मकान का नंबर 166 है, लेकिन प्रॉपर्टी आईडी पर नाम किसी दूसरे अंकित किया गया है। नगर निगम की गलतियों की वजह से आवासीय प्लॉट को व्यावसायिक बना दिया गया है। मेरे नाम के जगह किसी रेनु भाटिया का नाम मेरे प्रॉपर्टी आईडी में अंकित कर दिया गया है।
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केस नंबर दो
सेक्टर-21 महेशपुर निवासी नंदी देवी ने बताया कि नई प्रॉपर्टी आईडी के लिए 11 फरवरी को आवेदन किया था। वहां मेरे नाम के जगह आईडी में किसी संदीप का नाम अंकित कर दिया गया है। नगर निगम कार्यालय में जाती हूं तो वहां से जवाब मिलता है, सुविधा केंद्र में सुधार हो होगा। वहां एक माह पहले 150 रुपये देकर करेक्शन करवाया, लेकिन प्रॉपर्टी आईडी की गलतियों में सुधार नहीं हुआ। अब दोबारा इस माह प्रॉपर्टी आईडी में 150 रुपये देकर सही कराया, पैसे भी खर्च किए, लेकिन समस्या का समाधान नहीं हो पाया। अब वीरवार को नगर निगम कार्यालय पहुंची तो यहां बताया गया कि सेक्टर-12 में बिल्डिंग इंस्पेक्टर करेंगे। वहां गई तो वहां वह उपस्थित नहीं थे।
केस नंबर तीन
रिटायर्ड आईएएस जेसी दुग्गल पांच बार नगर निगम के चक्कर लगा चुके हैं। सेक्टर-15 निवासी ने बताया कि अकाउंट में पोस्ट अपडेट नहीं होने के चलते उन्हें प्रॉपर्टी टैक्स 10 फीसदी का रिबेट नहीं मिल पा रहा है। गलती नगर निगम की है और भुगत वह रहे हैं। उन्होंने बताया कि बुजुर्ग हूं। यहां के स्थानीय मुलाजिम बार-बार चक्कर कटवा रहे हैं। जब भी नगर निगम कार्यालय में आता हूं, स्थानीय निकाय विभाग को पत्र लिखा गया है।
केस नंबर चारएमडीसी स्वास्तिक विहार निवासी केसी गुप्ता ने बताया कि पिछले दस दिनों से प्रॉपर्टी आईडी में सुधार के लिए नगर निगम कार्यालय का चक्कर काट रहा हूं, लेकिन मेरी आईडी आजतक ठीक नहीं हो पाई। जिसके चलते निगम कार्यालय सेक्टर-4 का बार बार चक्कर काट रहा हूं। यहां एक काउंटर से दूसरे काउंटर मुलाजिम दौड़ाते हैं, थक कर दोपहर में घर चला जाता हूं। शुरू में ही प्रॉपर्टी आईडी सही बनाई गई होती तो सैकड़ों लोगों को निगम कार्यालय के बार बार चक्कर न लगाने पड़ते।
एक कंपनी को प्रॉपर्टी आईडी बनाने का ठेका दिया गया था, कंपनी की ओर से गलती की गई है। अब नगर निगम की ओर से सुधार किया जा रहा है। इसमें थोड़ा समय लगेगा। इसके लिए दो काउंटर भी बढ़ाए जांएगे। गुलाब सिंह, जेडटीओ नगर निगम पंचकूला।