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जल जनित बीमारियों पर लगेगा अंकुश, सरकार ने तय की विभागीय जिम्मेदारी
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चंडीगढ़। पंजाब में अब दूषित जल से होने वाले रोगों पर प्रभावी अंकुश लगाने के लिए पंजाब सरकार ने व्यापक नीति जारी की है। नीति के तहत शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में इसको लेकर जिम्मेदारी तय कर दी गई है। जिम्मेदार विभागों द्वारा प्रतिदिन ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में पानी के क्लोरीनेशन के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही जहां दूषित जल से संक्रमण बीमारियां हो रही हैं वहां स्वास्थ्य विभाग परीक्षण कराएगा।
पंजाब सरकार की इस नई नीति के अनुसार शहरी क्षेत्रों के निवासियों के लिए पेयजल की आपूर्ति और नियमित रूप से नमूने एकत्र करने की जिम्मेदारी स्थानीय सरकार (निकाय), जल आपूर्ति और सीवरेज बोर्ड को दी गई है। ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल की आपूर्ति और नियमित रूप ये नमूने एकत्र करने की जिम्मेदारी जल आपूर्ति एवं स्वच्छता विभाग को सौंपी गई है। स्थानीय सरकार और जल आपूर्ति एवं स्वच्छता विभाग, ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के निवासियों को सप्लाई किए जा रहे पानी की नियमित रूप से क्लोरीनेशन को सुनिश्चित करेंगे। राज्य में पेयजल के प्रतिदिन एकत्र किए जाने वाले नमूने स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग द्वारा नहीं लिए जाएंगे।
हालांकि, पानी से संबंधित किसी भी तरह की बीमारी के फैलने की स्थिति में स्वास्थ्य विभाग द्वारा पेयजल के नमूने एकत्र कर पानी में बैक्टीरिया होने संबंधी जांच की जाएगी। साथ ही उन इलाकों से पेयजल के नमूने एकत्र किए जाएंगे, जहां पिछले समय के दौरान पानी से होने वाली बीमारियों के फैलने की खबरें मिली हैं। स्वास्थ्य विभाग उन क्षेत्रों से नमूने लेगा, जहां पानी के गंदे होने की शिकायत मिली है या जहां से डायरिया या पानी से होने वाली बीमारियों के मामले सामने आ रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग की ओर से इस संबंध में सभी सिविल सर्जनों को निर्देश जारी किए गए हैं।
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स्वास्थ्य विभाग द्वारा एकत्र किए गए पानी के नमूनों को जांच के लिए स्टेट पब्लिक हेल्थ लैबोरेटरी, खरड़ भेजा जाएगा। तुरंत उपायों के लिए संबंधित विभाग को उन इलाकों के विवरण साझे किए जाएंगे, जहां से पानी के नमूने (बैक्टीरिया आदि के कारण) ठीक नहीं पाए गए। साथ ही जिन-जिन स्थानों से जलजनित रोगों के मामले ज्यादा आएंगे वहां भी क्लोरीनेशन की व्यवस्था की जाएगी।
दूषित जल से होने वाले रोगों की बढ़ती संख्या को देखते हुए इस नई नीति को सरकार ने पहली बार लागू किया है। इस नीति के सही क्रियान्वयन के लिए पारदर्शी व्यवस्था लागू की गई है। जल्द ही इसके अच्छे परिणाम आने शुरू हो जाएंगे।
- बलबीर सिंह सिद्धू, स्वास्थ्य मंत्री, पंजाब।
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पंजाब सरकार की इस नई नीति के अनुसार शहरी क्षेत्रों के निवासियों के लिए पेयजल की आपूर्ति और नियमित रूप से नमूने एकत्र करने की जिम्मेदारी स्थानीय सरकार (निकाय), जल आपूर्ति और सीवरेज बोर्ड को दी गई है। ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल की आपूर्ति और नियमित रूप ये नमूने एकत्र करने की जिम्मेदारी जल आपूर्ति एवं स्वच्छता विभाग को सौंपी गई है। स्थानीय सरकार और जल आपूर्ति एवं स्वच्छता विभाग, ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के निवासियों को सप्लाई किए जा रहे पानी की नियमित रूप से क्लोरीनेशन को सुनिश्चित करेंगे। राज्य में पेयजल के प्रतिदिन एकत्र किए जाने वाले नमूने स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग द्वारा नहीं लिए जाएंगे।
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हालांकि, पानी से संबंधित किसी भी तरह की बीमारी के फैलने की स्थिति में स्वास्थ्य विभाग द्वारा पेयजल के नमूने एकत्र कर पानी में बैक्टीरिया होने संबंधी जांच की जाएगी। साथ ही उन इलाकों से पेयजल के नमूने एकत्र किए जाएंगे, जहां पिछले समय के दौरान पानी से होने वाली बीमारियों के फैलने की खबरें मिली हैं। स्वास्थ्य विभाग उन क्षेत्रों से नमूने लेगा, जहां पानी के गंदे होने की शिकायत मिली है या जहां से डायरिया या पानी से होने वाली बीमारियों के मामले सामने आ रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग की ओर से इस संबंध में सभी सिविल सर्जनों को निर्देश जारी किए गए हैं।
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स्वास्थ्य विभाग द्वारा एकत्र किए गए पानी के नमूनों को जांच के लिए स्टेट पब्लिक हेल्थ लैबोरेटरी, खरड़ भेजा जाएगा। तुरंत उपायों के लिए संबंधित विभाग को उन इलाकों के विवरण साझे किए जाएंगे, जहां से पानी के नमूने (बैक्टीरिया आदि के कारण) ठीक नहीं पाए गए। साथ ही जिन-जिन स्थानों से जलजनित रोगों के मामले ज्यादा आएंगे वहां भी क्लोरीनेशन की व्यवस्था की जाएगी।
दूषित जल से होने वाले रोगों की बढ़ती संख्या को देखते हुए इस नई नीति को सरकार ने पहली बार लागू किया है। इस नीति के सही क्रियान्वयन के लिए पारदर्शी व्यवस्था लागू की गई है। जल्द ही इसके अच्छे परिणाम आने शुरू हो जाएंगे।
- बलबीर सिंह सिद्धू, स्वास्थ्य मंत्री, पंजाब।