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यूक्रेन में युद्ध : ट्रेन के पास बम गिरा तो सभी डर गए, जहाज में बैठे तो लगा सुरक्षित हैं
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पंचकूला। यूक्रेन बॉर्डर पार होने तक एक मिनट भी यह एहसास नहीं हुआ कि हम सुरक्षित हैं। जब ट्रेन के पास बम गिरा और उससे डिब्बा भी पूरी तरह हिल उठा तो सभी की धड़कनें बढ़ गई थीं। एक बार तो साक्षात यमदूत के दर्शन हो गए थे। यूक्रेन से लौटी सेक्टर-4 निवासी आकांक्षा ने अमर उजाला के साथ आपबीती साझा की है।
आकांक्षा शनिवार दोपहर करीब तीन बजे पंचकूला स्थित अपने घर पहुंचीं। यहां पहुंचने के बाद उसने बताया कि दो माह बाद उसे डिग्री मिल जानी थी, मगर अब युद्ध शुरू हो गया है। छह साल तक की गई मेहनत खराब होने का डर सता रहा है। अब हालात सामान्य होने का इंतजार कर रही हूं। आकांक्षा ने कहा कि छह साल की मेहनत को ऐसे नहीं छोड़ सकती। विश्वविद्यालय से डिग्री लेने के लिए जरूर जाऊंगी।
फ्लैट के सामने लगी थी तेल डिपो में आग
आकांक्षा ने बताया कि जब युद्ध की शुरुआत हुई तो एक तेल डिपो में आग लगा दी गई थी। वह उनके फ्लैट से बस आधा किलोमीटर दूर था। आग इतनी भयंकर थी कि देखकर ही रूह कांप रही थी। वहां लोग डर के साये में जी रहे हैं। लोगों के पास खाने-पीने का सामान खत्म होता जा रहा है। हालात खराब होते जा रहे हैं। लोगों को हर वक्त मौत का डर सताता रहता है।
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जहाज में बैठने के बाद लगा था सुरक्षित हैं
आकांक्षा ने बताया कि बमबारी और जहाजों का शोर सुनकर डर लगता था। जेहन में हर समय सही डर लगता था कि पता नहीं अगले पल क्या होगा। सभी एक दूसरे को दिलासा दे रहे थे, मगर सभी डरे हुए थे। आकांक्षा ने कहा कि लंबा समय बीतने के बाद जब वे वतन वापसी के लिए जहाज में बैठे तब लगा कि वे सुरक्षित हैं।
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आकांक्षा शनिवार दोपहर करीब तीन बजे पंचकूला स्थित अपने घर पहुंचीं। यहां पहुंचने के बाद उसने बताया कि दो माह बाद उसे डिग्री मिल जानी थी, मगर अब युद्ध शुरू हो गया है। छह साल तक की गई मेहनत खराब होने का डर सता रहा है। अब हालात सामान्य होने का इंतजार कर रही हूं। आकांक्षा ने कहा कि छह साल की मेहनत को ऐसे नहीं छोड़ सकती। विश्वविद्यालय से डिग्री लेने के लिए जरूर जाऊंगी।
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फ्लैट के सामने लगी थी तेल डिपो में आग
आकांक्षा ने बताया कि जब युद्ध की शुरुआत हुई तो एक तेल डिपो में आग लगा दी गई थी। वह उनके फ्लैट से बस आधा किलोमीटर दूर था। आग इतनी भयंकर थी कि देखकर ही रूह कांप रही थी। वहां लोग डर के साये में जी रहे हैं। लोगों के पास खाने-पीने का सामान खत्म होता जा रहा है। हालात खराब होते जा रहे हैं। लोगों को हर वक्त मौत का डर सताता रहता है।
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जहाज में बैठने के बाद लगा था सुरक्षित हैं
आकांक्षा ने बताया कि बमबारी और जहाजों का शोर सुनकर डर लगता था। जेहन में हर समय सही डर लगता था कि पता नहीं अगले पल क्या होगा। सभी एक दूसरे को दिलासा दे रहे थे, मगर सभी डरे हुए थे। आकांक्षा ने कहा कि लंबा समय बीतने के बाद जब वे वतन वापसी के लिए जहाज में बैठे तब लगा कि वे सुरक्षित हैं।