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नशे के खिलाफ युद्ध सही लेकिन अभियान को ईमानदारी से लागू करना सुनिश्चित करें: हाईकोर्ट

Wed, 27 Aug 2025 11:51 PM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Wed, 27 Aug 2025 11:51 PM IST
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War against drugs is right but ensure that the campaign is implemented honestly: High Court
अमर उजाला ब्यूरो
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चंडीगढ़। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने नशे की तस्करी मामले में सुनवाई करते हुए हाल के महीनों में दर्ज हुए हजारों एनडीपीएस मामलों पर चिंता जताई है। हाईकोर्ट ने राज्य सरकारों को सख्त निर्देश दिए कि किसी भी निर्दोष व्यक्ति को झूठे मामलों में फंसाया न जाए।

जस्टिस संदीप मौदगिल की बेंच के समक्ष लुधियाना, फाजिल्का, श्री मुक्तसर साहिब, अमृतसर, जालंधर और अन्य जिलों से जुड़े कई मामलों में आरोपी पक्ष ने दलील दी कि बड़ी संख्या में दर्ज हो रही एफआईआर में ज्यादातर बरामदगी संदिग्ध है। छह महीनों में केवल पंजाब में ही 2107 मामले दर्ज हुए हैं जिनमें से अधिकांश में बरामद गोलियां और कैप्सूल बिना बैच नंबर और एक्सपायरी डेट के पाए गए। ऐसी परिस्थितियों में पुलिस अधिकारियों द्वारा उक्त दवा के दुरुपयोग से झूठी बरामदगी की संभावना और भी अधिक हो जाती है।
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समय-समय पर मुख्यमंत्री व पंजाब के डीजीपी के बीच हुई बैठकों में यह कहा गया कि जिन पुलिस अधिकारियों द्वारा अधिक मामले दर्ज किए जाएंगे उन्हें अतिरिक्त रूप से पुरस्कृत भी किया जाएगा। बेंच ने देखा कि याचिकाकर्ताओं की ओर से अदालत के समक्ष प्रस्तुत आंकड़े चौंकाने वाले थे। मार्च से जुलाई 2025 तक केवल 148 दिनों में ही करीब 14,906 एफआईआर दर्ज हुईं और 23,647 लोगों की गिरफ्तारी की गई।
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सुनवाई के दौरान पंजाब के एडवोकेट जनरल ने अदालत को विश्वास दिलाया कि राज्य सरकार और पुलिस विभाग युद्ध नशे के विरुद्ध अभियान को सही दिशा और निष्पक्षता से लागू करेंगे।
हरियाणा सरकार की ओर से भी यह भरोसा दिलाया गया कि एनडीपीएस मामलों में दर्ज की जा रही एफआईआर केवल नशे के खिलाफ सख्त कार्रवाई के उद्देश्य से हैं, न कि आंकड़े बढ़ाने या दिखावटी सफलता हासिल करने के लिए। हरियाणा ने अदालत को बताया कि उनकी पुलिस किसी भी निर्दोष को बेवजह निशाना नहीं बना रही और इस संबंध में उच्च अधिकारियों को भी आगाह किया गया है।

अदालत ने कहा कि नशे की समस्या समाज के लिए बेहद गंभीर है और इससे निपटने के लिए कानून का कड़ाई से पालन होना आवश्यक है। साथ ही निर्दोष लोगों को केवल आंकड़े बढ़ाने के लिए गिरफ्तार करना न्याय के सिद्धांतों के खिलाफ है।
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