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Panchkula News: पंचकूला सिविल अस्पताल में न्यूरो मरीजों के लिए विशेषज्ञ का इंतजार
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पंचकूला। हरियाणा, पंजाब और हिमाचल के सीमावर्ती इलाकों से न्यूरो संबंधी बीमारियों के मरीज इलाज के लिए पंचकूला सिविल अस्पताल पहुंचते हैं, लेकिन विशेषज्ञ की सुविधा नहीं होने से उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कालका, रायपुररानी, नानकपुर और मोरनी के साथ बद्दी-नालागढ़ व मोहाली बॉर्डर से आने वाले मरीजों को कई बार पीजीआई या निजी अस्पताल रेफर किया जाता है। कुछ मरीज महीनों से दर्द निवारक दवाओं के सहारे हैं।
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के अनुसार जिले में न्यूरोलॉजिस्ट का एक भी पद स्वीकृत नहीं है। सिविल अस्पताल में फिजिशियन ही न्यूरो मरीजों को परामर्श दे रहे हैं। अधिकारियों के मुताबिक मल्टी-स्पेशलिटी का दर्जा मिलने के बाद ही न्यूरोलॉजी सेवाओं और दवाओं की व्यवस्था संभव होगी। फिजिशियन स्तर पर लेवेटिरासेटम, कार्बामाजेपिन, फेनिटोइन जैसी एंटी-एपिलेप्टिक दवाओं तथा स्ट्रोक में एंटी-प्लेटलेट और स्टेटिन के प्रिस्क्रिप्शन को लेकर भी जोखिम रहता है। मल्टी-स्पेशलिटी सर्टिफिकेशन के अभाव में सेंट्रल सप्लाई से न्यूरो ड्रग्स की उपलब्धता भी प्रभावित होने की बात सामने आई है।
इन सेवाओं की कमी
जिला अस्पताल में न्यूरोलॉजी की डेडिकेटेड ओपीडी, आईपीडी और इमरजेंसी कवर नहीं है। एक्यूट इस्केमिक स्ट्रोक में गोल्डन आवर के दौरान थ्रोम्बोलाइसिस, एपिलेप्सी में ईईजी मॉनिटरिंग, माइग्रेन, क्रॉनिक हेडेक, पेरिफेरल न्यूरोपैथी, पार्किंसन और डिमेंशिया जैसे मामलों में विशेषज्ञ मूल्यांकन की सुविधा नहीं है। एमआरआई, सीटी-एंजियो और एनसीवी जैसी जांचों के लिए मरीजों को रेफर किया जा रहा है।
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पंचकूला से सटे अन्य राज्यों के इलाकों में न्यूरोलाॅजी स्पेश्लिस्ट नहीं है, इस लिए मरीज सिविल अस्पताल में आते हैं लेकिन यहां भी टर्शरी लेवल मेडिकल फेसिलिटी यानी मल्टी-स्पेशलिटी सर्टिफिकेशन नहीं होने के कारण मरीज इलाज के लिए चंडीगढ़ जाते हैं।-डॉ. आरएस चाैहान, पीएमओ
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स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के अनुसार जिले में न्यूरोलॉजिस्ट का एक भी पद स्वीकृत नहीं है। सिविल अस्पताल में फिजिशियन ही न्यूरो मरीजों को परामर्श दे रहे हैं। अधिकारियों के मुताबिक मल्टी-स्पेशलिटी का दर्जा मिलने के बाद ही न्यूरोलॉजी सेवाओं और दवाओं की व्यवस्था संभव होगी। फिजिशियन स्तर पर लेवेटिरासेटम, कार्बामाजेपिन, फेनिटोइन जैसी एंटी-एपिलेप्टिक दवाओं तथा स्ट्रोक में एंटी-प्लेटलेट और स्टेटिन के प्रिस्क्रिप्शन को लेकर भी जोखिम रहता है। मल्टी-स्पेशलिटी सर्टिफिकेशन के अभाव में सेंट्रल सप्लाई से न्यूरो ड्रग्स की उपलब्धता भी प्रभावित होने की बात सामने आई है।
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इन सेवाओं की कमी
जिला अस्पताल में न्यूरोलॉजी की डेडिकेटेड ओपीडी, आईपीडी और इमरजेंसी कवर नहीं है। एक्यूट इस्केमिक स्ट्रोक में गोल्डन आवर के दौरान थ्रोम्बोलाइसिस, एपिलेप्सी में ईईजी मॉनिटरिंग, माइग्रेन, क्रॉनिक हेडेक, पेरिफेरल न्यूरोपैथी, पार्किंसन और डिमेंशिया जैसे मामलों में विशेषज्ञ मूल्यांकन की सुविधा नहीं है। एमआरआई, सीटी-एंजियो और एनसीवी जैसी जांचों के लिए मरीजों को रेफर किया जा रहा है।
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पंचकूला से सटे अन्य राज्यों के इलाकों में न्यूरोलाॅजी स्पेश्लिस्ट नहीं है, इस लिए मरीज सिविल अस्पताल में आते हैं लेकिन यहां भी टर्शरी लेवल मेडिकल फेसिलिटी यानी मल्टी-स्पेशलिटी सर्टिफिकेशन नहीं होने के कारण मरीज इलाज के लिए चंडीगढ़ जाते हैं।-डॉ. आरएस चाैहान, पीएमओ