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गायब फाइल मामले में कोर्ट ने दिए जांच के आदेश
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चंडीगढ़। विजिलेंस ऑफिस से गायब फाइल के मामले में जिला अदालत ने जांच के आदेश जारी कर दिए हैं। अदालत ने कहा कि अकेले इंस्पेक्टर कर्म चंद की लापरवाही से फाइलें गायब नहीं हो सकतीं। इंस्पेक्टर कर्म चंद विजिलेंस में काफी समय बाद आए थे। ये फाइलें विभाग ने लंबे समय से दबा रखी थीं। विजिलेंस में कर्म चंद की मौजूदगी में फाइलें गुम होने के कारण उन पर मामला दर्ज किया गया है। अभी तक गायब फाइलों का कुछ पता नहीं चल पाया है, इसलिए मामले में हाईलेवल जांच किए जाने की आवश्यकता है। अब मामले की अगली सुनवाई 14 अक्तूबर को होगी।
कोर्ट ने 14 अक्तबूर को जांच रिपोर्ट पेश करने के लिए कहा है। 2 जनवरी 2019 को इंस्पेक्टर कर्म चंद के खिलाफ कोर्ट में आईपीसी की धारा-409 के तहत चालान पेश किया गया था। चालान के मुताबिक 2009 में कर्मचंद बतौर सब इंस्पेक्टर विजिलेंस विभाग में कार्यरत थे। 2012 में विजिलेंस ओएसडी कुलवंत सिंह पन्नू ने कुछ इंस्पेक्टरों को नोटिस जारी किया था। नोटिस में 2009 में विजिलेंस की चेकिंग के बारे में स्टेटस रिपोर्ट पेश करने केलिए कहा गया था। जांच में सामने आया था कुछ फाइलें विजिलेंस ने कब्जे में ली थी। इन फाइलों को इंस्पेक्टर जसविंदर कौर को सौंपा गया था। उसकेबाद उन्होंने 60 दिनों की छुट्टी ले ली थी। उनकेजाने केबाद चार्ज दूसरे पुलिसकर्मी शिव कुमार को सौंप दिया गया था।
7 सितंबर 2009 को उन्होंने एसआई कर्म चंद को फाइलें सौंप दी थीं, इसलिए फाइल गायब होने का आरोप इंस्पेक्टर कर्म चंद पर लगा था। कर्मचंद ने लिखित जवाब में कहा था कि उन्होंने एक निरीक्षक के रूप एसपीएस सोंधी को मौखिक आदेशों के अनुसार फाइलें सौंप दी थीं। उन्होंने यह भी कहा था कि 13 जुलाई 2011 को डीआईजी विजिलेंस की अगुवाई में एक बैठक हुई थी, जिसमें गायब हुई उसी फाइल को अच्छी तरह से दिखाया गया था। इसके बावजूद फाइल गायब होने का आरोप उन पर लगाया गया है। यह मामला तब सामने आया, जब मार्च 2013 में निगम नेपत्र लिखकर इस फाइल को वापस मांगा था। तब जाकर जसविंदर कौर ने जवाब में कहा था कि उनके पास यह फाइल मौजूद नहीं है। इसके बाद कर्मचंद पर आरोप के तहत मामला दर्ज किया गया था।
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कोर्ट ने 14 अक्तबूर को जांच रिपोर्ट पेश करने के लिए कहा है। 2 जनवरी 2019 को इंस्पेक्टर कर्म चंद के खिलाफ कोर्ट में आईपीसी की धारा-409 के तहत चालान पेश किया गया था। चालान के मुताबिक 2009 में कर्मचंद बतौर सब इंस्पेक्टर विजिलेंस विभाग में कार्यरत थे। 2012 में विजिलेंस ओएसडी कुलवंत सिंह पन्नू ने कुछ इंस्पेक्टरों को नोटिस जारी किया था। नोटिस में 2009 में विजिलेंस की चेकिंग के बारे में स्टेटस रिपोर्ट पेश करने केलिए कहा गया था। जांच में सामने आया था कुछ फाइलें विजिलेंस ने कब्जे में ली थी। इन फाइलों को इंस्पेक्टर जसविंदर कौर को सौंपा गया था। उसकेबाद उन्होंने 60 दिनों की छुट्टी ले ली थी। उनकेजाने केबाद चार्ज दूसरे पुलिसकर्मी शिव कुमार को सौंप दिया गया था।
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7 सितंबर 2009 को उन्होंने एसआई कर्म चंद को फाइलें सौंप दी थीं, इसलिए फाइल गायब होने का आरोप इंस्पेक्टर कर्म चंद पर लगा था। कर्मचंद ने लिखित जवाब में कहा था कि उन्होंने एक निरीक्षक के रूप एसपीएस सोंधी को मौखिक आदेशों के अनुसार फाइलें सौंप दी थीं। उन्होंने यह भी कहा था कि 13 जुलाई 2011 को डीआईजी विजिलेंस की अगुवाई में एक बैठक हुई थी, जिसमें गायब हुई उसी फाइल को अच्छी तरह से दिखाया गया था। इसके बावजूद फाइल गायब होने का आरोप उन पर लगाया गया है। यह मामला तब सामने आया, जब मार्च 2013 में निगम नेपत्र लिखकर इस फाइल को वापस मांगा था। तब जाकर जसविंदर कौर ने जवाब में कहा था कि उनके पास यह फाइल मौजूद नहीं है। इसके बाद कर्मचंद पर आरोप के तहत मामला दर्ज किया गया था।
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