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एचपीएससी भर्ती मामला: विजिलेंस की थ्योरी फेल, न गवाह और न पुख्ता सबूत; व्हाट्सएप चैट भी कोर्ट में बेअसर

Tue, 03 Mar 2026 09:11 AM IST
Nivedita दीपक शाही, अमर उजाला, पंचकूला
दीपक शाही, अमर उजाला, पंचकूला Published by: Nivedita Updated Tue, 03 Mar 2026 09:11 AM IST
सार

विशेष न्यायाधीश राजीव गोयल ने 32 पन्नों के आदेश में स्पष्ट किया कि अभियोजन पक्ष के पास ठोस साक्ष्य नहीं थे और मामला मुख्य रूप से ‘सुनाई-सुनाई’ बातों तथा अधूरे डिजिटल रिकॉर्ड पर आधारित था।

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Vigilance Bureau major setback in Haryana Public Service Commission dental surgeon HCS recruitment case
HPSC - फोटो : https://hpsc.gov.in/en-us/

विस्तार

हरियाणा लोक सेवा आयोग (एचपीएससी) के डेंटल सर्जन और एचसीएस भर्ती प्रकरण में विजिलेंस ब्यूरो को बड़ा झटका लगा है। 

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पंचकूला स्थित विशेष सीबीआई अदालत ने चौधरी बंसी लाल विश्वविद्यालय के पूर्व परीक्षा नियंत्रक पवन गुप्ता को डिस्चार्ज करते हुए जांच प्रक्रिया में गंभीर खामियां गिनाई हैं।

विशेष न्यायाधीश राजीव गोयल ने 32 पन्नों के आदेश में स्पष्ट किया कि अभियोजन पक्ष के पास ठोस साक्ष्य नहीं थे और मामला मुख्य रूप से ‘सुनाई-सुनाई’ बातों तथा अधूरे डिजिटल रिकॉर्ड पर आधारित था।

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जांच में बड़ी चूक

विजिलेंस का आरोप था कि पवन गुप्ता ने पांच अभ्यर्थियों के रोल नंबर मुख्य आरोपी को व्हाट्सएप किए। अदालत ने पाया कि जांच अधिकारी ने उन पांचों अभ्यर्थियों से पूछताछ तक नहीं की और न ही उन्हें गवाह बनाया। इसे अदालत ने जांच की गंभीर कमजोरी माना।

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व्हाट्सएप चैट को नहीं मिली कानूनी मान्यता

अभियोजन ने व्हाट्सएप चैट को अहम साक्ष्य बताया, लेकिन भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 65-बी के तहत अनिवार्य प्रमाणपत्र अदालत में पेश नहीं किया गया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि बिना वैधानिक प्रमाणपत्र के डिजिटल साक्ष्य की कानूनी मान्यता नहीं होती।

मंजूरी के बिना मुकदमा

अदालत ने यह भी कहा कि भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7 के तहत किसी लोक सेवक के खिलाफ मुकदमा चलाने से पहले सक्षम प्राधिकारी की अनुमति आवश्यक है, जो इस मामले में नहीं ली गई।

संदेह सजा का आधार नहीं

न्यायाधीश ने टिप्पणी की कि सह-आरोपी द्वारा पुलिस रिमांड में दिया गया बयान अंतिम सत्य नहीं माना जा सकता। जब तक स्वतंत्र गवाह या पैसों की रिकवरी जैसी ठोस कड़ी न हो, केवल संदेह के आधार पर किसी को आरोपी नहीं ठहराया जा सकता।

विजिलेंस का दावा और कोर्ट की टिप्पणी

विजिलेंस का दावा था कि पवन गुप्ता परीक्षा प्रक्रिया को प्रभावित करने वाले गिरोह के संपर्क में थे। हालांकि अदालत में कॉल डिटेल रिकॉर्ड या अन्य प्रत्यक्ष साक्ष्य पेश नहीं किए जा सके, जो आरोपों को पुष्ट कर पाते। इस फैसले के बाद जांच एजेंसी की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि आदेश का असर मामले के अन्य आरोपियों पर भी पड़ सकता है।

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