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Panchkula News: श्री गुरुग्रंथ साहिब के 328 पावन स्वंरूप गायब होने के मामले में फैसला सुरक्षित
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आरोपियों ने जमानत की मांग को लेकर इस मामले में दाखिल की थी याचिका
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। श्री गुरुग्रंथ साहिब के 328 पावन स्वरूप एसजीपीसी के प्रकाशन विभाग से गायब होने के मामले में आरोपियों की अग्रिम जमानत याचिका पर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने सभी पक्षों को सुनने के बाद फैसला सुरक्षित कर लिया है। इससे पहले एसआईटी ने बताया था कि इस मामले में कुछ नई धाराएं एफआईआर में जोड़ी गई हैं। हाईकोर्ट ने आरोपियों को इन धाराओं को चुनौती देने की छूट दे दी और 30 जनवरी को मामले की सुनवाई तय की थी।
याचिकाओं में बताया यह मामला 2015 से 2018 के बीच का है, जब एसजीपीसी के प्रकाशन विभाग से श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी के 328 पावन स्वरूप लापता हो गए थे। जांच के लिए अकाल तख्त साहिब के सचिवालय द्वारा एक समिति का गठन किया गया था। इस समिति ने अपनी जांच के बाद 23 अगस्त 2020 को एसजीपीसी को एक विस्तृत रिपोर्ट सौंपी थी।
इसके बाद इस मामले में एसआईटी ने जांच आरंभ की थी और याचिकाकर्ताओं ने गिरफ्तारी की आशंका जताते हुए हाईकोर्ट की शरण ली थी। सुनवाई के दौरान कोर्ट को बताया गया था कि एसआईटी ने जांच के दौरान कुछ नए तथ्य, जानकारी व सबूत सामने आने के बाद मामले में कुछ अन्य आपराधिक धाराएं जोड़ी हैं। इस दौरान आरोपियों ने अपील की कि उन्हें इन धाराओं को भी चुनौती देने का मौका दिया जाए।
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अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। श्री गुरुग्रंथ साहिब के 328 पावन स्वरूप एसजीपीसी के प्रकाशन विभाग से गायब होने के मामले में आरोपियों की अग्रिम जमानत याचिका पर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने सभी पक्षों को सुनने के बाद फैसला सुरक्षित कर लिया है। इससे पहले एसआईटी ने बताया था कि इस मामले में कुछ नई धाराएं एफआईआर में जोड़ी गई हैं। हाईकोर्ट ने आरोपियों को इन धाराओं को चुनौती देने की छूट दे दी और 30 जनवरी को मामले की सुनवाई तय की थी।
याचिकाओं में बताया यह मामला 2015 से 2018 के बीच का है, जब एसजीपीसी के प्रकाशन विभाग से श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी के 328 पावन स्वरूप लापता हो गए थे। जांच के लिए अकाल तख्त साहिब के सचिवालय द्वारा एक समिति का गठन किया गया था। इस समिति ने अपनी जांच के बाद 23 अगस्त 2020 को एसजीपीसी को एक विस्तृत रिपोर्ट सौंपी थी।
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इसके बाद इस मामले में एसआईटी ने जांच आरंभ की थी और याचिकाकर्ताओं ने गिरफ्तारी की आशंका जताते हुए हाईकोर्ट की शरण ली थी। सुनवाई के दौरान कोर्ट को बताया गया था कि एसआईटी ने जांच के दौरान कुछ नए तथ्य, जानकारी व सबूत सामने आने के बाद मामले में कुछ अन्य आपराधिक धाराएं जोड़ी हैं। इस दौरान आरोपियों ने अपील की कि उन्हें इन धाराओं को भी चुनौती देने का मौका दिया जाए।
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