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'अफसरों की लापरवाही से अनावश्यक याचिकाएं हाईकोर्ट नहीं पहुंचे, इसके लिए क्या कदम उठाए'
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चंडीगढ़ । अतिरिक्त मुख्य सचिव द्वारा कर्मचारी का पक्ष सुने बगैर उसके खिलाफ आदेश पारित करने के मामले में पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट के आदेश पर मुख्य सचिव कोर्ट में पेश हुए। हाईकोर्ट ने अब हरियाणा के मुख्य सचिव को आदेश दिया है कि अफसरों की लापरवाही के कारण अनावश्यक याचिकाओं के बोझ को कम करने के लिए उठाए गए कदमों की जानकारी उन्हें हलफनामे के माध्यम से सौंपनी होगी।
फिरोजपुर झिरका निवासी हिम्मत खान ने याचिका दाखिल करते हुए हाईकोर्ट को बताया कि वह हरियाणा राज्य सहकारी कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक में क्लर्क के तौर पर कार्यरत था। दिसंबर 2010 में बैंक के पूर्व प्रबंधकों द्वारा किए गए घोटाले में याची के शामिल होने की बात कहते हुए उसकी सेवाओं को समाप्त कर दिया गया था। इस मामले में नूंह के अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने याची को बरी करते हुए कहा था कि उसे इस मामले में फंसाया गया है। न्यायालय का फैसला आने के बावजूद याची को बैंक ने सेवा में बहाल नहीं किया।
इस मामले में याचिकाकर्ता को रजिस्ट्रार सहकारी समिति ने बहाल करने का आदेश दिया था। इसके खिलाफ अपील पर याचिकाकर्ता का पक्ष सुने बगैर याची के खिलाफ आदेश जारी कर दिया गया। हाईकोर्ट ने इस पर हैरानी जताते हुए कहा कि कैसे प्रभावित व्यक्ति का पक्ष सुने बगैर उसके खिलाफ आदेश जारी किया जा सकता है।
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बुधवार को हाईकोर्ट के आदेश पर मुख्य सचिव कोर्ट में मौजूद रहे। उन्हाेंने न्यायालय को विश्वास दिलाया कि भविष्य में ऐसा नहीं होगा। हाईकोर्ट ने कहा कि अफसरों के लापरवाह रवैए के कारण न्यायालय पर अनावश्यक याचिकाओं का बोझ बढ़ रहा है। इस अनावश्यक बोझ को कम करने के लिए राज्य सरकार क्या कदम उठा रही है इस बारे में मुख्य सचिव को अगली सुनवाई पर हलफनामा सौंपना होगा।
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फिरोजपुर झिरका निवासी हिम्मत खान ने याचिका दाखिल करते हुए हाईकोर्ट को बताया कि वह हरियाणा राज्य सहकारी कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक में क्लर्क के तौर पर कार्यरत था। दिसंबर 2010 में बैंक के पूर्व प्रबंधकों द्वारा किए गए घोटाले में याची के शामिल होने की बात कहते हुए उसकी सेवाओं को समाप्त कर दिया गया था। इस मामले में नूंह के अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने याची को बरी करते हुए कहा था कि उसे इस मामले में फंसाया गया है। न्यायालय का फैसला आने के बावजूद याची को बैंक ने सेवा में बहाल नहीं किया।
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इस मामले में याचिकाकर्ता को रजिस्ट्रार सहकारी समिति ने बहाल करने का आदेश दिया था। इसके खिलाफ अपील पर याचिकाकर्ता का पक्ष सुने बगैर याची के खिलाफ आदेश जारी कर दिया गया। हाईकोर्ट ने इस पर हैरानी जताते हुए कहा कि कैसे प्रभावित व्यक्ति का पक्ष सुने बगैर उसके खिलाफ आदेश जारी किया जा सकता है।
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बुधवार को हाईकोर्ट के आदेश पर मुख्य सचिव कोर्ट में मौजूद रहे। उन्हाेंने न्यायालय को विश्वास दिलाया कि भविष्य में ऐसा नहीं होगा। हाईकोर्ट ने कहा कि अफसरों के लापरवाह रवैए के कारण न्यायालय पर अनावश्यक याचिकाओं का बोझ बढ़ रहा है। इस अनावश्यक बोझ को कम करने के लिए राज्य सरकार क्या कदम उठा रही है इस बारे में मुख्य सचिव को अगली सुनवाई पर हलफनामा सौंपना होगा।