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Panchkula News: संयुक्त किसान मोर्चा का कल चंडीगढ़ में रोष मार्च
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चंडीगढ़। संयुक्त किसान मोर्चा पंजाब ने राज्य में मक्का और मूंग की फसल न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर नहीं खरीदे जाने के विरोध में 27 जून को चंडीगढ़ में मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर रोष मार्च निकालने का एलान किया है। मोर्चा के घटकों ने अपनी एक ऑनलाइन बैठक में रोष मार्च का फैसला किया। इसके तहत 27 जून के मोहाली के गुरुद्वारा अंब साहिब में मोर्चा से संबंधित 33 किसान संगठनों के नेता और कार्यकर्ता एकत्र होंगे और रोष मार्च के लिए चंडीगढ़ की तरफ कूच करेंगे।
भारतीय किसान यूनियन (लखोवाल) के महासचिव हरिंदर सिंह लखोवाल ने बताया कि मार्च 2022 में आम आदमी पार्टी (आप) की सरकार बनते ही मुख्यमंत्री भगवंत मान ने फसली विविधता को बढ़ावा देने और पंजाब का भूजल बचाने के लिए किसानों को मक्का और मूंगी की फसल बोने का आह्वान किया था। मुख्यमंत्री ने किसानों को यह भरोसा भी दिलाया था कि इन दोनों फसलों को सरकार एमएसपी पर खरीदेगी।
किसान नेताओं ने कहा कि पिछले साल भी सरकार ने किसानों से ये फसलें एमएसपी पर नहीं खरीदीं और इस बार भी किसान मंडियों में फसल लेकर पहुंच रहे हैं, लेकिन वहां सरकार एमएसपी पर इनकी खरीद नहीं कर रही। किसान नेताओं ने कहा कि सरकार की अनदेखी के कारण अब किसानों को अपनी फसलें मजबूरी में सस्ते दाम पर व्यापारियों को बेचनी पड़ रही है और व्यापारी भी इस समय किसानों की मजबूरी का फायदा उठा रहे हैं। नेताओं ने बताया कि मक्की की एमएसपी 2090 रुपये प्रति क्विंटल तय है जबकि व्यापारी 1000-1200 रुपये का भाव दे रहे हैं। इसी तरह मूंगी की एमएसपी 7800 रुपये है लेकिन व्यापारी औने-पौने दाम पर यह फसल उठा रहे हैं।
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किसान नेताओं ने आरोप लगाया कि मंडियों में व्यापारियों ने मंडी बोर्ड के अफसरों के साथ मिलीभगत करके अनाज उतारने वाली जगह पर कब्जा कर लिया है, जिसके कारण किसानों की फसल उनकी ट्रॉलियों में ही खराब हो रही है। उन्होंने मांग की कि सरकार मक्की और मूंग की फसलों की एमएसपी पर खरीद करे ताकि व्यापारियों के हाथों किसानों की लूट को रोका जा सके।
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भारतीय किसान यूनियन (लखोवाल) के महासचिव हरिंदर सिंह लखोवाल ने बताया कि मार्च 2022 में आम आदमी पार्टी (आप) की सरकार बनते ही मुख्यमंत्री भगवंत मान ने फसली विविधता को बढ़ावा देने और पंजाब का भूजल बचाने के लिए किसानों को मक्का और मूंगी की फसल बोने का आह्वान किया था। मुख्यमंत्री ने किसानों को यह भरोसा भी दिलाया था कि इन दोनों फसलों को सरकार एमएसपी पर खरीदेगी।
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किसान नेताओं ने कहा कि पिछले साल भी सरकार ने किसानों से ये फसलें एमएसपी पर नहीं खरीदीं और इस बार भी किसान मंडियों में फसल लेकर पहुंच रहे हैं, लेकिन वहां सरकार एमएसपी पर इनकी खरीद नहीं कर रही। किसान नेताओं ने कहा कि सरकार की अनदेखी के कारण अब किसानों को अपनी फसलें मजबूरी में सस्ते दाम पर व्यापारियों को बेचनी पड़ रही है और व्यापारी भी इस समय किसानों की मजबूरी का फायदा उठा रहे हैं। नेताओं ने बताया कि मक्की की एमएसपी 2090 रुपये प्रति क्विंटल तय है जबकि व्यापारी 1000-1200 रुपये का भाव दे रहे हैं। इसी तरह मूंगी की एमएसपी 7800 रुपये है लेकिन व्यापारी औने-पौने दाम पर यह फसल उठा रहे हैं।
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किसान नेताओं ने आरोप लगाया कि मंडियों में व्यापारियों ने मंडी बोर्ड के अफसरों के साथ मिलीभगत करके अनाज उतारने वाली जगह पर कब्जा कर लिया है, जिसके कारण किसानों की फसल उनकी ट्रॉलियों में ही खराब हो रही है। उन्होंने मांग की कि सरकार मक्की और मूंग की फसलों की एमएसपी पर खरीद करे ताकि व्यापारियों के हाथों किसानों की लूट को रोका जा सके।